परेशानी:नदी में पुल नहीं, जान जोखिम में डाल नदी पार कर रहे लोग

संगम2 महीने पहले
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संगम। कोयलीबेड़ा ब्लॉक के अंदरुनी गांव में स्कूली बच्चे इस तरह खतरा मोल लेकर करते हैं नदी पार। - Dainik Bhaskar
संगम। कोयलीबेड़ा ब्लॉक के अंदरुनी गांव में स्कूली बच्चे इस तरह खतरा मोल लेकर करते हैं नदी पार।
  • शासन-प्रशासन तक लगाई गुहार, मांग को कर रहे नजरअंदाज

जिले के सबसे बड़े ब्लॉक कोयलीबेड़ा के अंदरुनी गांवों के लोग पुल-पुलिया की सुविधा के लिए तरस रहे हैं। पुल-पुलिया नहीं होने के चलते लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार करने पर मजबूर हैं। ऐसा ही मामला बुरका और जामकुटनी गांव में देखने को मिला है।

इस गांव से छोटेबेटिया, पखांजुर जाने के लिए कोई पुल-पुलिया नहीं है। इस क्षेत्र से जाने में काफी परेशानी होती है। गांव में स्कूल तो है, लेकिन हाईस्कूल नहीं होने के कारण बच्चे दूसरे गांव में नदी-नाले पार कर अपनी जान जोखिम में डाल कर विद्यालय जाते हैं।

जनप्रतिनिधियों से लेकर शासन तक लगाई गुहार : ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने नदी-नालों में पुल-पुलिया के लिए मांग नहीं की। ग्रामीण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से लेकर शासन-प्रशासन तक गुहार लगाई है। पंचायत स्तर से प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन ग्रामीणों की मांग अब भी अधूरी है।

बारिश में स्कूल जाने वाले बच्चों को ज्यादा खतरा
छात्रों को स्कूल जाने के लिए नदी-नाला पार करना पड़ता है। सबसे अधिक परेशानी बारिश के समय में होती है,जब नदी का जलस्तर बढ़ जाता है। इस समय कई बच्चे स्कूल जाने से वंचित हो जाते हैं। छोटेबेटिया से मेहड़ा होते हुए पीवी 62 तक एक सड़क 3 साल से बन रही है, लेकिन ठेकेदार की लापरवाही से यह अब भी अधूरी पड़ी है। इससे क्षेत्र के सैकड़ों स्कूली छात्र जान जोखिम में डालकर नदी पार कर पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं।

ग्रामीणों ने कहा सड़क की स्थिति खराब होने के कारण बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी का सहारा लेना पड़ता है। इससे हमेशा डर लगा रहता है कि कही कोई बड़ा हादसा न हो जाए। ऐसे में जिला प्रशासन को पुल निर्माण कराने की आवश्यकता है। पीवी 62, बुरका के छात्राओं ने कहा स्कूल जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। स्कूल जाना नहीं छोड़ सकते, इसलिए बिना कुछ सोचे हर दिन इसी तरह नाला पार कर स्कूल जाते हैं। छात्र अजीत कुमार ने कहा सड़क और पुल के नहीं होने के कारण सभी छात्रों और ग्रामीणों को नदी पार कर एक ओर से दूसरी ओर जाना पड़ता है।

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