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​​​​​​​प्रदर्शन:कोयलीबेड़ा के व्यापारियों ने नारायणपुर जिले में शामिल करने दुकानें बंद रखीं

कोयलीबेड़ा6 दिन पहले
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कोयलीबेड़ा। ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते व्यापारियों ने बंद रखी दुकानें। - Dainik Bhaskar
कोयलीबेड़ा। ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करते व्यापारियों ने बंद रखी दुकानें।

कोयलीबेड़ा क्षेत्र के 18 पंचायतों के 68 गांव के ग्रामीण नारायणपुर जिले में शामिल करने की मांग को लेकर पखवाड़ेभर से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कोयलीबेड़ा के व्यापारियों ने उनकी मांगों का समर्थन करते हुए रविवार को दुकानें बंद रखीं। जिले में एक ओर जहां पूरे कांकेर जिले में तीन-तीन जगह जिला बनाने की मांग को लेकर धरना दिया जा रहा है। वहीं कोयलीबेड़ा अपने पुराने तहसील में शामिल करने की मांग कर रहा है। यही वजह है नारायणपुर जिले में शामिल करने की मांग को लेकर कोयलीबेड़ा में अनिश्चित कालीन धरना जारी। यहां 15 दिनों से जनप्रतिनिधि व ग्रामीण धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन अब तक किसी प्रकार की कोई पहल नजर न आते देख अब ग्रामीण व जनप्रतिनिधियों ने अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता अपनाया है।

ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने कहा कोयलीबेड़ा क्षेत्र के 18 पंचायत के 68 गांव जो पूर्व में नारायणपुर तहसील के अंतर्गत ही आते थे। जिसे नवीन जिला बनने पर जनता को विश्वास में लेकर मनमर्जी से कांकेर जिला में शामिल कर दिया गया। जबकि भौगोलिक दृष्टि से कोयलीबेड़ा नारायणपुर जिले में शामिल होने के लिए उपयुक्त था। आज भी कोयलीबेड़ा क्षेत्र के देव विग्रहों के कार्य नारायणपुर से संबंधित गांवों से ही होता। कांकेर जाने में 150 किमी का अनावश्यक सफर लोगों को करना पड़ता है। इससे मानसिक व आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

ब्लॉक कोयलीबेड़ा लेकिन सभी कार्यालय पखांजूर में : जिले में कोयलीबेड़ा क्षेत्र ब्लॉक मुख्यालय होने के बावजूद उपेक्षा का शिकार होता आया है। यहां न ब्लॉक कार्यालय लगता है न बीईओ कार्यालय में काम होता है। यहां तक कि बीआरसी भवन होते हुए भी कार्यालय नहीं लगता।

सभी कार्यालयों का संचालन पखांजूर से किया जाता है। बीएमओ पखांजूर में ही ऑफिस लगाए बैठे हैं, जबकि ब्लॉक कोयलीबेड़ा है। न कोयलीबेड़ा में कॉलेज खुल पा रहा है न आईटीआई और न ही ब्लॉक स्तरीय आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल। कोयलीबेड़ा लगातार पिछड़ता जा रहा। यहां पहुंच मार्ग 14 सालों से अधूरा है, लेकिन जिम्मेदारों को इससे कोई लेना-देना नहीं है।

कई बार किया गया आंदोलन लेकिन सुनवाई नहीं : ग्रामीणों ने कहा साल दर साल मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोग कई बार सड़कों पर उतरे, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। ग्रामीणों के सब्र का बांध अब टूट चुका है और वे अपने पुराने तहसील नारायणपुर जिले में शामिल होना चाहते हैं।

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