शिक्षा पर मंथन / कोरोना से जूझते हुए भी हमें सकारात्मक ही रहना होगा: प्रो. मिश्र

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  • पीजी कॉलेज कांकेर में आयोजित ऑनलाइन अंतर्राष्ट्रीय वेबीनार में बोले हिंदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

कांकेर. भानुप्रतापदेव पीजी कॉलेज में कोविड 19 महामारी मनो सामाजिक समस्याएं व समाधान विषय पर एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार में आमंत्रित वक्ता स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज एंड सोशल साइंसेज बैंगलोर डा पद्मिनी राम ने कहा महामारी के दौरान छात्रों को अनिश्चितताओं व परिवर्तनों का सामना करना पड़ रहा है। 
पूरे विश्व में दूसरे देशों में अध्ययन हेतु गए उच्च शिक्षा के छात्र लॉकडाउन के कारण फंस गए। इनके समाधान के क्रम में उच्च शिक्षा में बड़े उलटफेर हुए हैं। अब ई क्लास, ई एग्जाम, ई कंटेंट आदि पर जोर दिया जा रहा है। यह सुविधाजनक है और बिना खतरा उठाये अध्ययन जारी रख सकने में सहायक है लेकिन यह सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध नहीं है। मुख्य वक्ता प्रो गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि नए तरीके से जीने में परेशानी हो रही है लेकिन हमें सकारात्मक ही रहना होगा। वेबीनार समीनार ही था जो ऑनलाइन हुआ। शुभारंभ वेबिनार संयोजक डॉ अर्चना सिंह ने किया। महाविद्यालय प्राचार्य प्रतिनिधि प्रो पीएस गौर ने आयोजन की रुपरेखा व उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। मुख्य संरक्षक प्रो सिंह ने कहा कि महामारी के दौरान आम जनता कई प्रकार के मनोवैज्ञानिक और व्यावहारिक समस्याएं महसूस कर रही है। 

जीने के तरीके में बदलाव से हो रही परेशानी 
मुख्य वक्ता पूर्व कुलपति महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा प्रो गिरीश्वर मिश्र ने कहा कि पूरा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। यह बहुआयामी समस्या है। मानव ने जीवन जीने का जो एक तरीका तैयार किया था उसे एकाएक बदलने में स्वयं को समायोजित नहीं कर पा रहा है। इससे तनाव हो रहा है। इस आपदा की स्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग जीवन यापन के साधनों को खो बैठा है। हमें धैर्य धारण करते अपने आतंरिक ऊर्जा को बनाए रखना होगा। आमंत्रित वक्ता एडजंक्ट फैकल्टी अलास्का विश्वविद्यालय यूएसएप्रो बीएल दुबे ने अपने कहा कोरोना के कारण जो मानसिक समस्याएं उत्पन्न हुई है उनके समाधान के नए तौर तरीके भी हमने खोज लिए हैं। 

अब हमें खुद पर फोकस करना जरूरी
आमंत्रित वक्ता अमिटी यूनिवर्सिटीज दुबई डॉ सोनाक्षी रूहेला ने कहा कोविड के कई मनो सामाजिक पक्ष हैं जिन पर हमें विचार करने की आवश्यकता है। एक तरफ कई प्रकार की मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे तनाव, दुश्चिंता, कुसमायोजन तेजी से बढ़े हैं वहीं दूसरी ओर अनेक सामाजिक समस्याएं भी बढऩे लगी है। यदि हमें इस परिस्थिति में शारीरिक और मानसिक तौर पर स्वस्थ रहना है तो सबसे पहले खुद पर फोकस करना होगा। साथ ही इस बदलाव के सकारात्मक पक्षों पर ध्यान देना होगा। आमंत्रित वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालयए गोरखपुर प्रो अनुभूति दुबे ने कहा मानव जाति ने तमाम कठिन परिस्थितियों व महामारियों का सामना किया है। 

2100 प्रतिभागियों ने विषय विमर्श का उठाया लाभ
आयोजन सचिव डॉ मनोज राव ने कहा वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेश के 2100 से अधिक प्रतिभागियों ने यूट्यूब पर जुड़कर विषय विमर्श का लाभ उठाया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डा व्हीके रामटेके, नवरतन साव, सुमिता पांडे, प्रताप चौधरी, दिवाकर वर्मा, मुकेश चंद्राकर, उमेश धृतलहरे, सेमंत बघेल का योगदान रहा।

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