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चिंता में अन्नदाता:धान खरीदी के लिए 12 दिन शेष, 15 हजार से अधिक किसान नहीं बेच पाए हैं आठ लाख क्विंटल धान, समय बढ़ाने की मांग

कवर्धा11 दिन पहले
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  • प्रतिदिन 1500 से अधिक टोकन जारी करना है, लेकिन बारदाना संकट के बीच दिया जा रहा मात्र 500 टोकन

जिले में अब धान खरीदी का अंतिम दौर शुरू हो गया है। 94 खरीदी केन्द्र के माध्यम से 1 लाख 3 हजार से अधिक पंजीकृत किसानों से धान खरीदी किया जाना है। मंगलवार की स्थिति में लगभग 88 हजार किसानों से धान खरीदी पूरी कर ली गई। वर्तमान में बड़े किसानों से धान खरीदी किया जाना है। लेकिन समस्या यह हैं कि धान खरीदी के लिए मात्र 12 दिन का समय बचा है। ऐसे में 15 हजार किसानों से करीब 8 लाख क्विंटल धान खरीदी किया जाना है। किसान नेता रवि चन्द्रवंशी ने बताया कि जिस हिसाब से धान खरीदी की मात्रा बचा है, ऐसे में 12 दिन के भीतर खरीदी पूर्ण करना एक चुनौती है। समय कम होने के कारण किसानों में डर है कि उनके धान की खरीदी हो पाएगी कि नहीं। वर्तमान में टोकन भी लगभग 800 से एक हजार तक काटे जा रहे हैंै। जबकि समय से पहले तक खरीदी पूरी किए जाने 1500 तक किसानों का टोकन जारी करना बेहद जरूरी है। इससे समय का बचत होगी व जल्द ही धान खरीदी पूरी कर ली जाएगी। इस वर्ष धान खरीदी एक दिसंबर से प्रारंभ हुई है, जिसे 31 जनवरी तक पूरा किया जाना है।

इस साल 40 लाख क्विंटल धान खरीदी का मिला है लक्ष्य
जिले में इस वर्ष एक लाख 7 हजार हेक्टेयर में धान का रकबा है। धान बेचने के लिए 1 लाख 3 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है। वहीं धान खरीदी के लिए 40 लाख क्विंटल का लक्ष्य मिला है। इसमें से 32 लाख क्विंटल धान की खरीदी पूरी कर ली गई है। किसानों द्वारा बेचे गए धान का कुल मूल्य 614 करोड़ रुपए है। प्रदेश में किसानों के पंजीकृत रकबे में से सर्वाधिक रकबा प्रतिशत का धान का क्रय कर कबीरधाम प्रथम स्थान पर है। वहीं जिला प्रशासन ने पंजीकृत किसान से अपील किया है कि धान खरीदी के मामले में फैलाई जा रही किसी भी प्रकार के भ्रम में नहीं आए। जिले के सभी पंजीकृत किसानों से धान की खरीदी की जाएगी।

प्रदेश में पहले पायदान पर है कबीरधाम जिला
बीते साल की तुलना में इस वर्ष धान खरीदी में ज्यादा विवाद नहीं हुआ है। शुरुआती दौर में टोकन के कारण कई केन्द्रों में विवाद की स्थिति बनी। लेकिन जैसे-जैसे खरीदी होते गया, तो विवाद भी कम हुआ है। कबीरधाम जिला पूरे प्रदेश में खरीदी के मामले में पहले पायदान पर है।

धान नहीं बेच पाए तो मंडी ही सहारा, होगा नुकसान
धान नहीं बेच पाने की स्थिति में किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। क्योंकि 2500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब शासन को छोड़ कोई भी व्यापारी खरीदी नहीं कर रहा।वर्तमान में मंडी में अधिकतम1500 से 1550रुपए प्रति क्विंटल के रेट से खरीदी हो रहीं है। ग्राम जोराताल स्थित मंडी के सचिव एसएल वर्मा ने बताया कि शुरूआत के दिसंबर माह में करीब 1600 रुपए प्रति क्विंटल धान का रेट गया था। जैसे-जैसे समितियों में धान खरीदी बढ़ती गई तो मंडी में रेट कम होते गया। अब औसतन 1500 रुपए प्रति क्विंटल तक धान बेचा जा रहा है। मंडी में प्रतिदिन रेट कम-ज्यादा होता है। किसान को प्रति क्विंटल एक हजार रुपए का नुकसान हो रहा है।

उठाव तेज, 10 लाख क्विंटल धान का हुआ परिवहन
जिले के 94 धान खरीदी केन्द्र से जिले के दो संग्रहण केन्द्रों के लिए धान उठाव में तेजी आई है। जिले में मार्कफेड के दो संग्रहण केन्द्र में 3 लाख 79 हजार 197 क्विंटल धान अब तक संग्रहित किया जा चुका है। राइस मिलर्स द्वारा डिलवरी आर्डर (डीओ) के माध्यम से कुल 6 लाख 60 हजार 930 क्विंटल धान खरीदी केन्द्र से उठाया जा चुका है। जिले में 10 लाख 40 हजार 127 क्विंटल धान का उठाव हो चुका है। 11 जनवरी की स्थिति में अब तक किसी भी समिति में धान खरीदी कार्य विशेष परिस्थिति को छोड़कर बंद नहीं हुआ है। कम जगह वाली समितियों में तौलाई के लिए वैकल्पिक भूमि की व्यवस्था कर धान खरीदी कार्य जारी है।

समय से पहले खरीदी पूरी कर लेंगे: डिप्टी कलेक्टर
धान खरीदी के नोडल अधिकारी व डिप्टी कलेक्टर संदीप ठाकुर ने बताया कि बचे हुए 15 हजार किसानों से समय से पहले खरीदी कर ली जाएगी। औसतन प्रतिदिन 1.10 लाख क्विंटल धान खरीदी हुई है। इस हिसाब से वर्तमान में बचत 8 लाख क्विंटल धान को 10 दिन के भीतर खरीदी कर लेंगे। इससे पंजीकृत किसानों को कोई दिक्कत नहीं होगी। बारदाना की समस्या थी, लेकिन किसानों के बारदाना से खरीदी किए जाने से कुछ हद तक समस्या दूर हो गई है।

इस साल ऐसे हुई खरीदी

  • जिले में इस बार 70 अनुपात 30 के हिसाब से खरीदी हुई है। यानि 5 एकड़ से कम भूमि वाले किसानों को पहले प्राथमिकता देते हुए खरीदी की गई। 2.5 एकड़ तक के पंजीकृत कृषक 64090 है, जिसमें से 55469 किसान एक बार में ही समिति में अपना सभी धान बेच चुके हैं। उन्हें धान बेचने दोबारा समिति आने की आवश्यकता नही पड़ी।
  • जिले में 2.5 एकड़ से 5 एकड़ भूमि वाले 24878 पंजीकृत किसान में से 22700 किसान धान बेच चुके है। जिले में 5 एकड़ तक भूमि धारण करने वाले कुल पंजीकृत 88968 लघु/सीमांत किसान में से 78169 अपना धान बेच चुके हैं, जो कुल लघु कृषकों का 88 प्रतिशत होता है।
  • 5 एकड़ से अधिक भूमि वाले मध्यम/दीर्घ पंजीकृत किसान 11743 में से 10521 अपना धान बेच चुके है। इस वर्ष जिले में 16682 किसानों द्वारा 11325 हेक्टेयर भूमि के धान विक्रय के लिए नवीन पंजीयन कराया गया है। कुल पंजीकृत किसान में से 4477 किसानों द्वारा एक बार से अधिक धान बेचा गया है।

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