जिले में नसबंदी कराने पर मिलेगी 3 हजार प्रोत्साहन राशि:6 माह में 88 पुरुषों ने कराया ऑपरेशन, कवर्धा में जनसंख्या वृद्धि दर 40.66%, छग से 18% ज्यादा इसलिए प्रोत्साहन राशि बढ़ाई

कवर्धा2 महीने पहले
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केले की फसल से स्वावलंबी बन रहे किसान। - Dainik Bhaskar
केले की फसल से स्वावलंबी बन रहे किसान।

छत्तीसगढ़ राज्य में कबीरधाम और सरगुजा जिले में पुरुषों को नसबंदी कराने पर 3 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दिया जाता है, जो कि दीगर जिलों की तुलना में 1 हजार रुपए ज्यादा है। ऐसा इसलिए क्योंकि इन दोनों जिले में पॉपुलेशन ग्रोथ (जनसंख्या वृद्धि दर) ज्यादा है। कबीरधाम जिले की बात करें, तो वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक यहां जनसंख्या वृद्धि दर 40.66 प्रतिशत है, जो कि छग से 18.07 फीसदी ज्यादा है।

यही कारण है कि यहां नसबंदी कराने वाले पुरुषों को 3 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि दिया जा रहा है। अन्य जिलों में पुरुष नसबंदी पर 2 हजार रुपए मिलते हैं। अच्छी बात यह है कि कबीरधाम में परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता बढ़ी है। पुरुष भी नसबंदी को अपना रहे हैं। वर्तमान में पुरुष नसबंदी के मामले की छत्तीसगढ़ राज्य में कबीरधाम की स्थिति दीगर जिलाें से बेहतर है। बीते 3 साल से प्रतिवर्ष औसतन 350 पुरुष नसबंदी करा चुके हैं। वर्ष 2020 में कोविड के दौरान (अप्रैल से सितंबर माह) में 80 पुरुष नसबंदी हुए थे। इसी साल अप्रैल से सितंबर तक 6 माह में ही 88 पुरुषों ने नसबंदी कराई है।

आंकड़ों में समझिए, जिले में पापुलेशन ग्रोथ को
जनगणना 2011 के मुताबिक

  • छत्तीसगढ़ की जनसंख्या वृद्धि दर- 22.59%
  • सबसे अधिक जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला- कबीरधाम- 40.66%
  • सबसे काम जनसंख्या वृद्धि दर- बीजापुर- 8.66%

जनगणना 2001 के मुताबिक

  • छत्तीसगढ़ की जनसंख्या वृद्धि दर- 18.06%
  • सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला- सरगुजा- 24.58%
  • न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर वाला जिला- महासमुंद- 8.72%

पुरुष नसबंदी में कवर्धा और बोड़ला आगे
अप्रैल से सितंबर 2021 तक के आंकड़ों में पुरुष नसबंदी में कवर्धा और बोड़ला आगे है। मिली जानकारी केअनुसार बोड़ला और कवर्धा ब्लॉक में 27- 27 पुरुष नसबंदी हुआ है। इसी तरह पंडरिया में 23, सहसपुर लोहारा में 6 और जिला अस्पताल में 5 पुरुष नसबंदी हुआ है। कवर्धा बीएमओ डॉ. सतीश चंद्रवंशी ने बताया कि इसके लिए प्रेरकों की मेरिट सूची बनाई है। लोगों को लगातार प्रोत्साहित कर नसबंदी कराने जागरुक किया जा रहा है।

601 लक्ष्य दंपती की बैठकें लीं और प्रेरित किया
स्वास्थ्य विभाग की ओर से परिवार नियोजन पखवाड़े के तहत 601 लक्ष्य दंपतियों की बैठकें ली गई और उन्हें नसबंदी के लिए प्रेरित किया। इनमें से बहुत से लोगों ने नसबंदी करा लिया है। जो बचे हुए हैं, वे नसबंदी करा रहे हैं। जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से लोगों को पुरुष नसबंदी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

महिला की अपेक्षा आसान है पुरुष नसबंदी: डॉ. मंडल
सीएमएचओ डॉ. शैलेन्द्र कुमार मंडल ने पुरुष और महिला नसबंदी की पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुरुष नसबंदी महिला नसबंदी से अपेक्षाकृत अधिक सरल है। इसके बावजूद भ्रम, सामाजिक मान्यताओं और पुरुष प्रधान समाज होने के कारण लोग इसे अपनाने से कतराते हैं। उन्होंने बताया कि नसबंदी के बाद व्यक्ति को किसी प्रकार के आराम की विशेष आवश्यकता नहीं होती है। इससे न ही किसी प्रकार की कमजोरी आती है।

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