5 साल में नहीं बढ़ी सीटें:12वीं में 9045 स्टूडेंट्स पास, अब कॉलेजों में पढ़ने इनमें से 55% के लिए सीटें ही नहीं

कवर्धा3 महीने पहले
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कॉलेजों में एडमिशन के लिए चॉइस सेंटर्स में ऑनलाइन आवेदन। - Dainik Bhaskar
कॉलेजों में एडमिशन के लिए चॉइस सेंटर्स में ऑनलाइन आवेदन।
  • हर साल स्टूडेंट्स बढ़ते गए, कॉलेजों में इस बार कटऑफ भी बढ़ेगा, होगी दिक्कत
  • यह भी जानिए: कोरोना के चलते पैरेंट्स अपने बच्चों को बाहर भेजना नहीं चाहते

कबीरधाम जिले के 9 सरकारी कॉलेजों में इस बार 55 फीसदी स्टूडेंट्स को एडमिशन नहीं मिल पाएगा क्योंकि इस बार वैश्विक महामारी के चलते 12वीं में 9045 स्टूडेंट्स पास हुए हैं। सभी कॉलेज मिलाकर फर्स्ट ईयर की कुल 4145 सीटें ही हैं। ऐसे में 12वीं पास 55% स्टूडेंट्स के लिए कॉलेजों में पढ़ाई करने सीटें ही नहीं है।

कॉलेजों में इस बार कटऑफ भी बढ़ेगा। क्योंकि सीटें कम हैं और कोरोना के चलते पैरेंट्स अपने बच्चों को बाहर भेजना नहीं चाहते हैं। वहीं जो स्टूडेंट्स इस साल 12वीं पास हुए हैं, उनके मार्क्स बहुत ज्यादा हैं। इतने स्टूडेंट्स को दाखिला दिलाने के लिए कॉलेजों में सीट दोगुना करना होगी। ऐसा करने से ही स्टूडेंट्स रेगुलर पढ़ाई कर पाएंगे। खास बात यह है कि हर साल 12वीं पास स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ रही है, लेकिन कॉलेजों में सीटें नहीं बढ़ाई जा रही। इसलिए भी स्टूडेंट्स की परेशानी बढ़ती जा रही है।

बीए फर्स्ट ईयर की एक सीट के लिए 3 दावेदार
विश्लेषण करने पर पता चलता है कि कॉलेजों में बीए फर्स्ट ईयर की 1 सीट के लिए 3- 3 दावेदारी है। सभी 9 सरकारी काॅलेजों में बीए की 1870 सीटें हैं, जबकि 12वीं पास स्टूडेंट्स की संख्या 4109 है। बीएससी में 1655 सीटों के विरुद्ध 3512 दावेदार हैं, जो कि दोगुना ज्यादा है। वहीं बीकॉम की 620 सीटों के विरुद्ध 1134 स्टूडेंट्स दावेदारी करने को तैयार हैं।

सीटें कम, 4 हजार छात्र रेगुलर नहीं पढ़ सके
सीटें कम हाेने का नतीजा बीते साल पीजी कॉलेज में देख चुके हैं। वर्ष 2020 में पीजी कॉलेज में विभिन्न संकायों में एडमिशन के लिए 5305 स्टूडेंट्स ने आवेदन किया था। यहां फर्स्ट ईयर की सिर्फ 1235 सीटें है। मेरिट के आधार पर दाखिले हुए। 4070 स्टूडेंट्स को दाखिले से वंचित रहना पड़ा। वे रेगुलर पढ़ाई नहीं कर पाए। मजबूरी में प्राइवेट परीक्षा देना पड़ा।

समस्या को देख सीटें बढ़ाने के लिए मांग की पर मंजूरी नहीं, कुछेक कॉलेज ने भेजी ही नहीं
दाखिले की मारामारी के चलते विभिन्न कॉलेजों ने सीटें बढ़ाने के लिए शासन से मांग की है। पीजी कॉलेज में फर्स्ट ईयर में 280 सीटें बढ़ाने शासन से मांग किया है। इसी तरह कुई-कुकदूर कॉलेज में भी 150 सीटें बढ़ाने मांग की है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिल पाई है। पांडातराई, पंडरिया और बोड़ला काॅलेज में भी सीटें की जरूरत है, लेकिन यहां स्टूडेंट्स को बैठाने के लिए पर्याप्त कमरे, पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी है। इसलिए मांग ही नहीं किए। इधर सीटों की मारामारी के चलते छात्रों के सामने बड़ी समस्या हो जाती है। ऐसे में इनके सामने प्राइवेट परीक्षा देना ही विकल्प रहता है।

इनका कहना है
प्रस्ताव शासन को भेजे हैं

पीजी कॉलेज में जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष मोहित माहेश्वरी बताते हैं कि फर्स्ट ईयर में 460 समेत पीजी में कुल 660 सीटें बढ़ाने प्रस्ताव तैयार किया है। इसे शासन को भेजी जा चुकी है। उम्मीद है कि स्वीकृति मिल जाएगी। यह जिले का सबसे बड़ा कॉलेज है, इसलिए स्टूडेंट्स यहां ज्यादा आते हैं।

सीटें बढ़ने की स्वीकृति का इंतजार
कुई-कुकदूर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसी वर्मा का कहना है कि बीए, बीएससी व बीकॉम तीनों में 50- 50 सीटें बढ़ाने के लिए शासन से मांग की है। सीटें बढ़ने की स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं।

कॉलेज में पर्याप्त कमरे नहीं हैं
पंडरिया कॉलेज के प्राचार्य एमएल कश्यप बताते हैं कि कॉलेज में पर्याप्त कमरे नहीं है। अध्यापन कार्य के लिए शिक्षक भी कम है, इसलिए सीट बढ़ाने मांग नहीं की गई है। पिपरिया कॉलेज के प्राचार्य एसके श्रीवास और पांडातराई कॉलेज के प्राचार्य अविनाश लाल का भी कुछ ऐसा ही कहना है।

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