अलर्ट / भालू के बाद अब मैदानी क्षेत्र में तेंदुए के आने की संभावना, वन विभाग ने एडवाइजरी जारी की

After the bear, leopard likely to come in the plains, Forest Department issued advisory
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After the bear, leopard likely to come in the plains, Forest Department issued advisory

  • मैदानी क्षेत्र भी तेंदुए के लिए अनुकूल, विभाग ने वनांचल के लोगों को किया अलर्ट

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

कवर्धा. इस साल फरवरी से लेकर अब तक जिले में जंगली जानवर की मूवमेंट मैदानी क्षेत्र में हुई है। पंडरिया, बोड़ला व सहसपुर लोहारा ब्लॉक में तो भालू व जंगली सुअर के हमले सामने आए हैं। अब इन क्षेत्र में तेंदुए की मूवमेंट दिखाई दी है। इस स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने मंगलवार को एडवाइजरी जारी कर दी है। 
जारी आदेश में कहा गया है कि वन क्षेत्र में मानवीय बसाहट, अतिक्रमण, अवैध कटाई, अवैध उत्खनन, वन्य प्राणियों शिकार के चलते वन्य प्राणियों के लिए प्राकृतिक आवास और प्राकृतिक संसाधन सीमित होते जा रहे हैं। इसके चलते वन्यप्राणी जंगल से निकलकर मानवीय बसाहट वाले क्षेत्र में पहुंच रहे हैं। इससे मानव-वन्य प्राणी द्वंद की स्थिति निर्मित होती है। इस द्वंद में कभी मनुष्य की जान जाती है तो कभी वन्य प्राणी की। कभी फसल हानि होती है तो कभी संपत्ति नुकसान होता है। जिले के अलग-अलग क्षेत्र में तेंदुआ के आवासीय क्षेत्रों में घुस जाने की या तेंदुए के शावकों की अनाथ अवस्था में प्राप्ति, तेंदुए की मृतक अवस्था में मिलने की सूचना वन विभाग को मिल रही है। इसे देखते हुए वन विभाग ने जनजागरूकता लाने व मदद के लिए मोबाइल नंबर जारी किया गया है।
जनहानि होने पर क्षतिपूर्ति का प्रावधान: डीएफओ दिलराज प्रभाकर ने बताया कि विभाग की तरफ से तेंदुआ से हुई जनहानि के लिए प्रति व्यक्ति 6 लाख रुपए, जन घायल (स्थाई रुप से अपंग) के लिए 2 लाख रुपए, सामान्य जन घायल के इलाज के लिए अधिकतम 59 हजार 100 रुपए तक की क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। साथ ही लोगों से अपील की गई कि वन्य प्राणी जैसे, तेंदुआ, जंगली सुअर, लकड़बग्घा, बायसन, बाघ, सोन कुत्ता, भालू, जहरीले सांप समेत अन्य जीवों के संबंध में सूचना मिलती है तो जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि वन्य प्राणी की सुरक्षा की जा सके। उन्हें पकड़ कर जंगल में छोड़ सके।
कवर्धा शहर के आसपास भी खतरा: कवर्धा शहर के आसपास भी तेंदुए की खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता। क्योंकि शहर के 5 किलोमीटर के बाद भोरमदेव रोड़ व सरोदा बांध की ओर जंगल का क्षेत्र शुरू हो जाता है। सरोदा बांध के आसपास तो कई बार भालू के हमले से ग्रामीण घायल हुए हैं। इसी प्रकार सरोदा बांध के ऊपर वाले हिस्से मांदाघाट में तो लोगों को आना-जाना लगा रहता है। खासकर कवर्धा शहर में शुक्रवार मार्केट बंद होने के कारण इस क्षेत्र में लोग पहुंचते ही है। इसी प्रकार भोरमदेव से बंजरी होने हुए चिल्फीघाटी जाने रास्ता है। यहां भी तेंदुए की खतरे से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि इन दोनों क्षेत्र में शाम होते हुए वन विभाग द्वारा गेट बंद कर दिया जाता है।
वन्य प्राणीयों से बचाव व सुरक्षा के लिए कंट्रोल रूम स्थापित
सेल का नाम - मोबाइल नंबर 
वन्य प्राणी सेल - 7587013323
उड़नदस्ता सहायक प्रभारी -9425576857 
अधीक्षक भोरमदेव अभ्यारण- 7587013350 
परिक्षेत्र अधिकारी भोरमदेव अभ्यारण - 7828853500 
उप वनमंडल अधिकारी - 9479027029 
परिक्षेत्र अधिकारी कवर्धा - 8770976735 
तरेगांव व पश्चिम पंडरिया - 9981192548 
उपवनमंडल अधिकारी पंडरिया -7974210301 
परिक्षेत्र अधिकारी पूर्व पंडारिया- 9340135862 
सहसपुर लोहारा - 7898755213 
परिक्षेत्र अधिकारी सहसपुर लोहारा -7647995150 
परिक्षेत्र अधिकारी रेंगाखार - 7471180875 
परिक्षेत्र अधिकारी ग्राम खारा - 9340896308
वन मंडल अधिकारी -9479105168

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