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बैगा बच्चे इमली को कहेंगे अब अमली:कक्षा 1 व 2 के बच्चों को दी किताबें क्योंकि प्रदेश में पहली बार बैगा बोली काे मिली पहचान

कुकदुर/कवर्धा11 दिन पहले
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  • कक्षा पहली व दूसरी हिंदी विषय के सभी पाठ का बैगानी में अनुवाद, जिले के 37 स्कूल के 2546 बच्चों के लिए बैगानी बोली की पुस्तक लांच

जिले के 37 स्कूल के कक्षा पहली व दूसरी के 2546 बैगा बच्चे बैगानी बोली में पढ़ाई करेंगे। क्योंकि इन बच्चों के लिए स्थानीय भाषा में पढ़ाई कराए जाने पाठ्यपुस्तक के पाठ को अनुवाद कराया गया है। यानी अब ये बच्चे इमली को अमली कहेंगे, पुस्तक में इनकी बोली के आधार पर अनुवाद किया गया है। नए शिक्षा सत्र से इसे लांच भी कर दिया गया है। वनांचल क्षेत्र के कुई संकुल अंतर्गत संचालित स्कूलों में नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक का वितरण किया जा रहा है। शालाओं में अध्ययनरत कक्षा पहली और दूसरी के बैगा बच्चों को बैगानी बोली में छपी पुस्तकें दी जा रही। कुई संकुल प्रभारी सभाजीत सिंह ने बताया कि शासन ने यह निर्णय लिया है कि बैगा बच्चों को उनके स्थानीय भाषा में पढ़ाई कराई जाए। कक्षा पहली एवं दूसरी में अध्ययनरत बच्चों के लिए बैगानी भाषा की पुस्तकें दी गई। इस पुस्तक की खासियत यह है कि एक ही पुस्तक में एक तरफ हिंदी तथा दूसरी तरफ बैगानी भाषा में छपाई की गई है, जिसे वनांचल के स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा पहली एवं दूसरी के छात्रों को बैगानी बोली पढ़ने में आसानी होगी। प्राथमिक शाला रोखनी के बैगा शिक्षक प्रीतम सिंह धुर्वे, धनी राम मेरावी द्वारा वितरण किया जा रहा है।

जिले में ही तैयार की गई
पुस्तक को स्थानीय भाषा में तैयार करने जिला स्तर पर टीम का गठन किया गया था। डीईओ कार्यालय में पदस्थ शिक्षक शिव कुमार सिन्हा ने बताया कि पूरे पाठ्यक्रम को अनुवाद करने बैगा शिक्षकों व बैगा समाज के लोगों से सहयोग लिया गया। इसमें बैगा शिक्षक प्रीतम सिंह, धनी राम मेरावी, बैगा समाज के इतवारी बैगा शामिल थे। डाइट कॉलेज में कक्षा पहली व दूसरी के हिंदी विषय के पाठ्यक्रम को बैगानी बोली में अनुवाद किए। पुस्तकों के हिंदी शब्दावली को बैगानी भाषा में बदलकर शब्दावली तैयार कर एससीईआरटी भेजा गया।

विलुप्त हो रही बैगा बोली को बचाने पहल
जिले के सरकारी स्कूलाें में केवल कक्षा पहली व दूसरी में करीब 2546 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। सबसे ज्यादा बैगा बच्चे बोड़ला व पंडरिया ब्लॉक में है। बैगानी बोली विलुप्त होने को देखते हुए यह प्रयास किए हैं। बैगानी शब्दावली बनने से उन बैगा छात्र-छात्राओं को भी लाभ होगा। वर्तमान में इसका सबसे पहले इसका प्रयोग प्राथमिक विद्यालय में किया जा रहा है।

अन्य जिलों में भी स्थानीय भाषा के आधार पर अनुवाद
कबीरधाम जिले के अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी उनके स्थानीय भाषा के आधार पर अनुवाद कराया गया है। प्रदेश में कमार, अबूझमाड़िया, पहाड़ी कोरवा, बिरहारे और बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति हैं। जनजाति समुदाय की भाषा-बोली के संरक्षण के लिए भी यह पहल कारगर होगी। छत्तीसगढ़ में बोली जाने वाली बोलियों में छत्तीसगढ़ी रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में, बैगानी बैगा जाति के लोग यह बोली बोलते हैं। यह बोली कवर्धा और बिलासपुर में बोली जाती है। खल्टाही रायगढ़ के कुछ हिस्सों में, कोरबा में सदरी बोली बोलते हैं।

आप इस तरह से समझें बैगानी भाषा के पाठ को....

  • बैगानी भाषा - कक्षा 1
  • पाठ का नाम – अमली कुसेल
  • आमट अमली गुड़तुड़ कुसेल, चरथय छेड़ी पतड़ा कर मांझा।
  • चल कपितर खाबो हम, तबला जोड़ से बजाबो हम।
  • हिंदी भाषा में अनुवाद-कक्षा 1
  • पाठ का नाम – इमली ईख
  • खट्टी इमली मीठी ईख, चरती बकरी वन के बीच।
  • चलो पपीता खाएं हम, तबला खूब बचाएं हम।

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