शिकायत:कंपनी कमांडर को शराब न पिलाने पर मिलती है फटीक ड्यूटी

कवर्धाएक वर्ष पहले
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  • सरेखा में स्थित छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 17वीं बटालियन के हेड क्वार्टर का मामला, अज्ञात जवान ने शिकायत पत्र भेजा, कार्रवाई न कर पत्र की तस्दीक की जा रही, भास्कर के पास शिकायत की कॉपी

जिले के ग्राम सरेखा स्थित 17वीं बटालियन छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल(भारत रक्षित) के हेड क्वार्टर में शराब पिलाने पर काम मिलता है। शराब नहीं पिलाने की स्थिति में जवानों को फटीक ड्यूटी यानि अन्य काम कराया जाता है। दरअसल, इस बटालियन के अज्ञात जवान ने अपने कमांडेंट को गुमनाम पत्र लिखा है। पत्र में हेडक्वार्टर के कंपनी कमांडर थानेश्वर देशमुख के ऊपर कई गंभीर आरोप लगाए है। गुमनाम पत्र की कॉपी भास्कर के सोर्स के जरिए हाथ लगी है। एक पेज के पत्र में अज्ञात जवान ने कंपनी कमांडर द्वारा किए जा रहे बर्ताव के बारे में बताया है। यह पत्र बटालियन की ही शिकायत पेटी से मिला है। पत्र मिलने के बाद बटालियन के कमांडेंट सीडी टंडन ने अब तस्दीक कराने आदेश जारी कर दिया। 
बटालियन के ज्यादातर जवान बस्तर में ड्यूटी कर रहे
इस बटालियन में करीब 900 के आसपास कर्मचारी हैं। हेडक्वार्टर में तो करीब 100 से अधिक जवान रहते हैं। इसके बाद बाकी जवान नक्सल ऑपरेशन में लगे हुए हैं। बटालियन का मुख्यालय ग्राम सरेखा में है व बाकी 4 कंपनी बस्तर जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में ड्यूटी कर रही है। वहीं शासकीय कार्य के लिए जवानों को अपनी कंपनी को छोड़कर हेडक्वार्टर में आना पड़ता है। इसके बाद जवानों की संख्या कम होने व अवकाश में जाने से दीगर कंपनी से आए जवान को हेडक्वार्टर में रूकना पड़ता है। इसी दौरान कंपनी कमांडर के बीच ड्यूटी को लेकर विवाद की स्थिति बनती है। 17वीं बटालियन वर्ष 2012-13 में प्रारंभ किया गया है। जहां बटालियन का मुख्यालय है, वह नक्सल प्रभावित क्षेत्र थाना भोरमदेव में आता है। ऐसे में यह संवेदनशील क्षेत्र में आता है। इसके बाद भी जवानों को ड्यूटी लगाने के नाम पर कंपनी कमांडर द्वारा शराब की मांग किए जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। यह पूरा मामला जून का है, 10 जून को गुमनाम पत्र की तस्दीक कराने आदेश जारी किया गया था। 

पत्र तो मिला है, जांच जारी: कमांडेंट
इस मामले को लेकर 17वीं बटालियन के कमांडेंट सीडी टंडन ने बताया कि पत्र के आधार पर जांच करा रहे है। जांच की जिम्मेदारी बटालियन के सहायक सेनानी को सौंपी गई है। केवल गुमनाम पत्र के आधार पर कार्रवाई संभव नहीं है। जवान सामने आएंगे तो कंपनी कमांडर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। फिलहाल पत्र की तस्दीक करा रहे हैं। तस्दीक के बाद ही इस संबंध में आगे कोई जानकारी दे सकेंगे। 

जवानों की समस्या को दूर करने डीजीपी के हैं निर्देश
डीजीपी डीएम अवस्थी ने जवानों की समस्या का समाधान करने पहले ही निर्देश दिए है। बीते वर्ष 2019 में छसब के सभी कमांडेंट का सम्मेलन आयोजित किया गया था। तब डीजीपी ने कहा था कि पुलिस बल की कार्यशैली और बल की मानसिकता को सही ढंग से समझने के लिए कमांडेंट पद का सेवाकाल आवश्यक है। जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए कमांडेंट को नक्सल क्षेत्रों में जाकर उनके तैनाती स्थलों पर मिलना चाहिए, उनका हौसला और बढ़ेगा। 

गुमनाम पत्र में यह लिखा...

श्रीमान सेनानी महोदय जी, 17वीं विशेष(भा-र) वाहिनी छ.स.ब. कबीरधाम (छ.ग.)

विषय- कंपनी कमांडर थानेश्वर प्रसाद देशमुख के बारे में शिकायत बाबत  ‘सविनय निवेदन है कि जवानों के प्रति क्षेत्रवाद किया जा रहा है। सर जी जो उसको दारू पिलाता है, उसे वो अच्छे-अच्छे काम दे कर रखा है और जो उसको दारू नहीं पिलाता उसे फटीक में रखता है और सर जी आदमी देखकर ड्यूटी लगाया जाता है। और तो और आदमी देखकर स्पष्टीकरण लिया जाता है। और जो उसको दारू लाकर देता है उसे माफ कर देता है। पूरा-पूरा भ्रष्टाचार हो रहा है। वैसे तो जो दारू पीकर बाहर झगड़ा करके आते हैं उसे वह अपने साथ ड्राइवर बनाकर रखता है। किसी से सीधे मुंह बात नहीं करता, जब बोलेगा तो टेढ़ा ही बोलेगा और जात-पात पे आ जाता है और बोला जाता है जिसको जा के शिकायत करना है कर देना, बोला जाता है। मेरा क्या होगा तो सर जी हम कहां जाएं शिकायत करने के लिए सर जी। आपसे निवेदन है कि उचित कार्रवाई करें।’

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