समर्पण और सेवा / कोरोना ने बदली एमबीबीएस डॉक्टर्स की जिंदगी, लैब टेक्नीशियन बन सैंपल लिए

Corona changed the life of MBBS doctors, took samples as lab technician
X
Corona changed the life of MBBS doctors, took samples as lab technician

  • जरूरत को देखते हुए डॉक्टरों ने यह काम भी किया, जिले में अब तब करीब 4 हजार 670 सैंपल लिए गए हैं, 102 कोरोना संक्रमित मरीज मिले, 92 स्वस्थ हुए

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

कवर्धा. 23 मार्च से कोरोना संक्रमण को देखते हुए लॉकडाउन लागू किया गया था। तब से लेकर अब तक कोरोना काल चलता रहा। ऐसे में कोरोना को लेकर सबसे ज्यादा मेहनत जिले के डॉक्टरों ने की है। स्थिति ऐसी थी कि राज्य सरकार ने हेल्थ विभाग के सभी कर्मचारियों की अवकाश पर बैन लगा दिया। तब से लेकर अब तक हेल्थ विभाग की टीम लगातार काम कर रही है। 
एमबीबीएस होकर डॉॅक्टरों को लैब टेक्नीशियन का काम करना पड़ा। कोविड–19 के जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ.गौरव परिहार ने बताया कि कोरोना काल के दौरान व वर्तमान में भी वे सभी प्रकार के स्वास्थ्य संबंधित काम कर रहे हैं। इसमें प्रमुख रूप से कोरोना सैंपल का जांच शामिल है। जिले में अब तब करीब 4 हजार 670 सैंपल लिए गए है। सैंपल लेने के लिए वैसे लैब टेक्नीशियन द्वारा काम किया जाता है। लेकिन ज्यादा लोगों का सैंपल लेने डॉक्टरों को टेक्नीशियन का काम करना पड़ा है। जिले में अब तक 102 कोरोना संक्रमित मरीज मिले है, इनमें से 92 स्वस्थ होकर लौट चुके है। वहीं स्वस्थ होकर लौटे मरीजों को प्रोत्साहित करने मनोचिकित्सक बनना पड़ा।

डॉक्टरों के प्रति लोगों का नजरिया बदला: जिला सर्विलेंस अधिकारी डॉ.गौरव परिहार ने बताया कि शुरुआती दिनों में कोरोना संक्रमण को लेकर लोगों में काफी डर था। हल्की सर्दी-खासी को कोरोना समझ बैठते थे। जिले में पहली बार जंगल रेंगाखार क्षेत्र में काेरोना संक्रमित मरीज मिले तो डर और भी बढ़ गया था। ऐसे में डॉक्टर होने के नाते लोगों को मोटिवेट करने मनोचिकित्सक का काम करना पड़ा। अभी स्वस्थ होकर लौटे लोगों को कोविड सेंटर 14 दिन के लिए क्वारेंटाइन में रखा गया है। इन लोगों से रोज भेंट करते है,ताकि डर दूर हो जाए। पहले की तुलना में डॉक्टरों के प्रति लोगों का नजरिया बदला है। 

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में सबसे ज्यादा सैंपल लिया: बोड़ला ब्लॉक के वनांचल व नक्सल प्रभावित क्षेत्र जंगल रेंगाखार में मेडिकल ऑफिसर डॉ.प्रेमलाल रात्रे हाल ही में पदस्थ हुए है। लेकिन जब से पदस्थ हुए तब से कोरोनाकाल शुरू हो गया। ऐसे में जिले में पहला कोरोना मरीज इसी क्षेत्र में मिले। इस कारण यहां सैंपल लेने का दबाव बन गया। ऐसी स्थिति में लैब टेक्नीशियन की कमी होने के कारण खुद से सैंपल लिया। पूरे जिले में पहले एमबीबीएस डॉक्टर है, जो कोरोना काल के दौरान करीब 150 से अधिक सैंपल लिए है। यह पहला मौका रहा कि लैब टेक्नीशियन का काम करना पड़ा। 

जिला अस्पताल के साथ वनांचल में भी काम किया: जिले के जंगल रेंगाखार में पहला कोरोना संक्रमित मरीज मिला। ऐसे में जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर आदेश बागड़े की ड्यूटी जंगल रेंगाखार के सरकारी अस्पताल में लगाई गई। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में दो-दो जगहों में काम देखना पड़ता था। कभी जिला अस्पताल तो कभी जंगल रेंगाखार से सैंपल लेकर आना पड़ता था। इस दौरान लोगों के बीच में सैंपल लिए जाने दिक्कत हाेती थी। जिन लोगों में कोरोना संक्रमण पाए गए, उनके लक्षण नहीं दिख रहा था, पहचान करना मुश्किल होता था। अब स्थिति सामान्य हुई है।

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना