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अन्नदाता संकट में:बारिश से खराब हुई फसल, बीमा क्लेम के लिए भटक रहे पंडरिया ब्लाॅक के किसान

महली/कवर्धा8 महीने पहले
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  • ब्लॉक के ज्यादातर गांवों में यही समस्या, मुआवजा नहीं मिली तो होगा बड़ा नुकसान

हाल में हुई बारिश के कारण किसानों की फसल को नुकसान हुआ है। पंडरिया ब्लॉक के करीब 500 से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया था। लेकिन अब फसल का नुकसान होने के बाद बीमा क्लेम कराने किसानों को दिक्कत हो रही है। क्योंकि बीमा कंपनी के टोल फ्री नंबर में सही जानकारी नहीं मिल पा रही है। कंपनी के अफसर भी टोल फ्री नंबर में किसानों को बात करने का सलाह देकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इसके चलते अब किसान दफ्तरों का चक्कर लगा रहे हैं। ग्राम महली के किसान होरीलाल ने बताया कि उनकी तैयार हो चुकी धान की फसल बारिश से खेत में गिर गई है। लगातार पानी बहने से पूरी फसल खराब हो रही है। किसान कल्पन चंद्राकर ने बताया कि पानी भरे खेत में गिरी बालियों में अब अंकुरण होने लगा है। कटी हुई फसल पानी में डूब गई है। सूरजपुरा, दुल्लापुर, नानापुरी, कोड़ापुरी, बघर्रा जैसे अंचल के कई गांवों में सैकड़ों किसानों की फसल पानी में गिर चुकी है। इन सब के बीच बीमा क्लेम को लेकर दिक्कत हो रही है। किसानों ने बताया कि बीमा क्लेम नहीं किया तो फसल का मुआवजा भी नहीं मिलेगा। ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान होगा। जिसने फसल बीमा कराया है, उनके खेत में जाकर कंपनी मूल्यांकन करे।

बीमा कराने के बाद भी किसानों को नहीं मिल रहा योजना का कोई लाभ
किसानों का कहना है जब क्लेम की बारी आती है तो न तो कृषि विभाग रुचि लेता है और न बीमा कंपनी। ऐसे में पंडरिया ब्लॉक के किसान अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। किसानों ने बीमा कंपनी के इस कार्य को लेकर जांच की मांग की है। प्रधानमंत्री बीमा योजना में सिंचित धान प्रति एकड़ 340 रुपए रुपए प्रीमियम तय है। देय प्रीमियम बीमित राशि का अधिकतम 2 प्रतिशत ही किसानों को देना होता है। प्रीमियम की शेष राशि 50-50 प्रतिशत के अनुपात में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जमा कराई जाती है।

फसल मूल्यांकन के बाद भी बीमा कंपनी को मुआवजा देने रुचि नहीं
महली के किसान बली चंद्राकर, अनुज राम, घनश्याम, इतवारी चंद्राकर ने बताया कि बीमा कंपनी अब किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है। फसल की शुरुआत में कृषि विभाग व बीमा कंपनी ने किसानों से बीमा कराए जाने कई तरह के दावे किए करते थे। दावा भी किया जाता था कि फसल नुकसान होने पर मूल्यांकन के बाद रुपए भी दिए जाएंगे। लेकिन अब फसल खराब होने के बाद कोई भी जानकारी नहीं दी जा रही है। इससे यही साबित हो रहा है कि बीमा कंपनी को मुआवजा देने कोई रुचि नहीं है।

कवर्धा को छोड़ सभी तहसीलदार ने मुआवजा देने बिल जमा किया
राज्य सरकार के राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग ने बाढ़ एवं अतिवृष्टि से प्रभावित होने वाले लोगों को आर्थिक अनुदान सहायता उपलब्ध कराने वित्तीय वर्ष 2020-21 अंतर्गत जिले के लिए 74 करोड़ रुपए जारी किया है। यह राशि उन किसानों के लिए है जो दिसंबर 2019 से अप्रैल 2020 तक फसल ली थी। राजस्व विभाग के डिप्टी कलेक्टर अनिल सिदार ने बताया कि इस राशि को दिए जाने जिला कोषालय में पंडरिया क्षेत्र के तहसीलदार ने बिल भी जमा कराया है। कुछ दिनों में किसानों को राशि जारी कर दी जाएगी।

जिस नंबर में शिकायत करना है वह नहीं लग रहा
किसान होरीलाल ने बताया कि फसलों को सड़ने से बचाने के लिए कई तरह से जतन कर रहे हैं। अभी भी खेत में नमी है। इस कारण धान की फसल को नुकसान हो रहा है। किसान कृषि विभाग द्वारा ब्लॉक मुख्यालयों में जारी किए गए बीमा कंपनी के नंबर पर वस्तु स्थिति की जानकारी देने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन उस नंबर पर न तो फोन लग रहा और न ही सोशल मीडिया में जवाब दिया जा रहा है। बीमा कंपनी के कारण किसानों को नुकसान होगा।

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