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बीज का संकट:9 हजार क्विंटल की डिमांड भेजी, मिले सिर्फ 1200 क्विं. बीज, वो भी नहीं बंटे

कवर्धाएक महीने पहले
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  • लेट से बुआई होने पर इन फसलों का ग्रोथ कम होगा, इस कारण नुकसान तय, 50 हजार से अधिक किसान परेशान

आने वाले रबी सीजन की तैयारी शुरू हो गई है। लेकिन जिले के किसानों को बीज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ज्यादातर समिति में बीज नहीं है। लेट से बीज मिलने के कारण बोनी भी लेट होगी, इसका असर फसल पर पड़ेगा। स्थिति ऐसी है कि कृषि विभाग ने बीज के लिए बीज एवं कृषि विकास निगम को डिमांड भी भेजा है। लेकिन डिमांड के अनुरूप बीज नहीं मिल सका है। कृषि विभाग के कार्यालय से प्राप्त जानकारी रबी सीजन के 12 विभिन्न प्रकार की फसल के लिए 9 हजार 5 क्विंटल बीज की डिमांड भेजी गई थी। मंगलवार की स्थिति में बीज प्रक्रिया केन्द्र ग्राम घोटिया में मात्र 995.45 क्विंटल बीज का भंडारण किया गया है। वहीं बुधवार को करीब 500 क्विंटल बीज की खेप और आई है, जिसे रखा जा रहा है। अब तक करीब 1200 क्विंटल बीज का भंडारण किया जा चुका है, जो कि लक्ष्य से 7800 क्विंटल से भी कम है। अब तक किसानों के लिए बीज बंट जाना था, क्योंकि 15 अक्टूबर से लेकर 15 नवंबर तक बोनी होती है। जिले में सबसे ज्यादा डिमांड चना व गेहूं बीज की है। चना व गेहूं की फसल से 50 हजार से अधिक किसान जुड़े हुए हैं।

पिछले साल 80 हजार हेक्टेयर में चने की फसल हुई थी खराब, नहीं मिला मुआवजा
चना की फसल बीते वर्ष के सीजन में पूरी तरह से खराब हो गयी थी। क्योंकि जनवरी से लेकर मार्च माह तक बेमौसम बारिश हुई थी। यही कारण है कि करीब 50 हजार से अधिक चना प्रभावित किसानों के लिए शासन ने 70 करोड़ रुपए मुआवजे की राशि जारी की,जो वर्तमान में जिला कोषालय से तहसीलदार को जारी हो गयी है। लेकिन अभी भी ज्यादातर किसानों को नहीं मिल पायी है। बताया जा रहा है कि कई किसानों के बैंक अकाउंट व आईएफएससी नंबर में त्रुटि है।

अधिक बारिश के चलते 17 हजार 589 हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल खराब
इस साल किसान बीज की ज्यादा डिमांड कर रहे हैं। किसान पवन साहू, राधे लाल ने बताया कि इस वर्ष भारी बारिश के कारण सोयाबीन की फसल खराब हो गई है। खेत खाली पड़ा हुआ है,ऐसे में गेहूं-चना समेत अन्य प्रकार के रबी फसल की बोनी करना चाह रहे हैं लेकिन समितियों में बीज ही नहीं आई है। भू-अभिलेख शाखा से प्राप्त जानकारी अनुसार 20 सितंबर की स्थिति फसल मूल्यांकन रिपोर्ट में जिले में 17589 हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल बोई गई थी, जो बारिश के कारण खराब हो गए है।

12 में से 8 फसल के लिए बीज का एक दाना भी नहीं
बीज एवं कृषि विकास निगम के गोदाम में भी बीज का संकट जारी है। स्थिति ऐसी है कि कृषि विभाग द्वारा भेजे गए 12 फसलों के बीज में से 8 फसल के बीज का एक दाना भी नहीं आया है। इसमें मटर, मसूर, तोरिया, उड़द, मूंग, तिल, अलसी, मक्का शामिल है। फिलहाल चना व गेहूं, तिवड़ा, सरसों के बीज मिल गए हैं। इन बीज को जिले के करीब 62 समितियों के माध्यम से किसानों को दिया जाना है। सभी बीज के लिए रेट का भी तय किया गया है।

एक दो दिन में सभी समितियों में भंडारण हो जाएगा
फसलों के बीज के संबंध में कृषि विभाग के उपसंचालक एमडी डडसेना ने बताया कि वर्तमान में गोदामों में भंडारण किया जा रहा है। जल्द ही समितियों के लिए जारी किया जाएगा। बीज के लिए डिमांड भेजा गया है, लेकिन रायपुर से ही बीज नहीं आ पा रहा। इस कारण थोड़ा लेट हो रहा है। आने वाले समय में 15 नवंबर से पहले सभी केन्द्र में पर्याप्त मात्रा में बीज का भंडारण हो जाएगा। इससे किसानों को नुकसान नहीं होगा।

एक्सपर्ट व्यू: फसल के उत्पादन पर पड़ेगा असर
एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर कवर्धा की कृषि वैज्ञानिक डॉ.हेमलता निराला ने बताया कि नियमानुसार चना व गेहूं की बोनी 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के मध्य की जानी चाहिए। इससे फसलों को तैयार होने का भरपूर समय मिलता है। वर्तमान में बोनी लेट से होगी तो आने वाले समय में फसल के ग्रोथ में कमी आएगी, जिसका प्रभाव उत्पादन में पड़ेगा। इस कारण समय पर बीज मिलना व बोनी करना जरूरी है। वर्तमान में इन दोनों फसल के लिए मौसम भी अच्छा है। लेट से बोनी होने पर नुकसान की संभावना ज्यादा है।

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