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9 लाख क्विंटल धान का अब तक उठाव नहीं:कबीरधाम में अब किसानों को दूसरी फसल लेने कर रहे जागरूक, 2800 हेक्टेयर में किसानों ने लगाया गन्ना

कवर्धा18 दिन पहले
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  • धान उत्पादन ज्यादा होने से शासन को नुकसान, कृषि विभाग- इस बार धान का रकबा 7 हजार हेक्टेयर घटेगा

जिले में खेती संबंधित काम शुरू हो गए है। इस बार किसानों ने फिर से धान की फसल पर विश्वास जताया है। क्योंकि धान से किसानों को फायदा हाे रहा है। लेकिन दूसरी ओर शासन धान का रकबा कम करने की कोशिश कर रही है। क्योंकि शासन को ज्यादा धान खरीदने से करोड़ों रुपए नुकसान हो रहा है।

दरअसल बीते साल 39 लाख क्विंटल धान खरीदी हुई। खरीदी बंद हुए 4 माह हो रहा है। अभी भी खरीदी केन्द्रों में करीब 9 लाख क्विंटल धान रखा हुआ है। बारिश के कारण धान खराब हो रहे हैं। धान का उठाव धीमा गति से जारी है। धान क फसल कम करने कृषि विभाग अभी से जुट गया है। कृषि विभाग के उपसंचालक एमडी डडसेना ने बताया कि उनके विभाग की टीम गांव-गांव में जाकर सर्वे कर रहीं है। जिले में अब तक 2800 हेक्टेयर में धान का रकबा कम हुअा है, इसमेें गन्ने की फसल ली जा रही है। संबंधित भूमि में दो साल तक सिर्फ गन्ने की फसल होगी। इस कारण धान का रकबा आने वाले दो साल तक कम होगा। जिले में धान के बदले अन्य फसल लगाने करीब 7 हजार 500 हेक्टेयर का लक्ष्य शासन ने निर्धारित किया है। बीते साल 93 हजार हेक्टेयर में धान का रकबा था। ऐसे में 7 हजार रकबा कम भी कर दिए जो 86 हजार रकबा में धान की फसल होना तय है।

समितियों से अब तक 4422 क्विंटल बीज का उठाव
इस साल पंजीयन में देरी के कारण किसानों को बीज उठाव में शुरुआती दिनों में परेशानी हुई है। यहीं कारण हैं कि समितियों में खाद बीज का उठाव कम हुआ है। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार अब तक समितियों से 4422 क्विंटल बीज का उठाव हुआ है। खरीफ फसलों की अभी बोनी प्रारंभ नहीं हुई है। वर्तमान में धान के अलावा दूसरे फसल लगाने किसानों को जागरूक कर रहे है। शुरूआती सर्वे में धान का रकबा अपेक्षा अनुसार कम नहीं हुआ है। उल्टे सोयाबीन फसल के बदले किसान धान की फसल लेना पसंद कर रहे है। क्योंकि बीते दाे वर्ष से अगस्त-सितंबर माह में बारिश होने के सोयाबीन फसल को नुकसान हुआ था। इस कारण किसान सोयाबीन के फसल से परहेज कर रहे है।

स. लाेहारा में धान के बाद उद्यानिकी की फसल ज्यादा
जिले में धान की फसल सबसे ज्यादा पंडरिया, कवर्धा व बोड़ला ब्लॉक में लिया जाता है। इसके बाद इन ब्लॉक में गन्ने की फसल दूसरे नंबर है। लेकिन सहसपुर लोहारा ब्लॉक में धान के बाद उद्यानिकी की फसल सबसे ज्यादा ली जाती है। उद्यानिकी विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार जिले में हर साल 10 से 12 हजार हेक्टेयर में उद्यानिकी की फसल जैसे सब्जी, फल लगाई जाती है। लोहारा ब्लॉक में करीब 5 हजार हेक्टेयर में उद्यानिकी की फसल ली जाती है। इस कारण लोहारा ब्लॉक में धान के बाद उद्यानिकी फसल में किसानों की रुचि ज्यादा है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में धान का समर्थन मूल्य बढ़ाए जाने के बाद किसानों मेंं धान की खेती किए जाने को लेकर उत्साह बढ़ा है, इससे धान का रकबा भी बढ़ा।

धान का उठाव नहीं होने से समितियों को नुकसान
इधर जिले के अन्य ब्लॉक की तरह लोहारा ब्लॉक के खरीदी केन्द्र में धान के उठाव की स्थिति ठीक नहीं है। स्थिति ऐसी है कि खरीदी केन्द्रों में धान रखे-रखे सड़ गए है, जो अब कोई काम के नहीं है। इससे समितियों को नुकसान होना तय है। बोरियों में धान अंकुरण हो रहे है। अब बचे हुए धान की रखवाली करना समिति प्रभारी के लिए एक समस्या खड़ा हो गया है। जानकारी अनुसार बड़ौदाकला धान खरीदी केन्द्र में 8 हजार क्विंटल, कुरवा धान खरीदी केन्द्र में 5 हजार 600 क्विंटल, मोहगांव में 4 हजार 500 क्विंटल, ग्राम बिडोरा धान खरीदी केन्द्र में 7 हजार 375 क्विंटल धान जाम है। इन समितियों के जिला अध्यक्ष गंगादास मानिकपुरी ने बताया की डीओ कटने के बाद भी परिवहनकर्ता ठेकेदार खरीदी केन्द्र में रखे धान का उठाव नहीं कर रहे। धान खराब होने की जानकारी जिला स्तर के अफसरों को दे रहे हैं, कोई ध्यान नहीं दे रहे हंै।

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