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यह हाल:कबीरधाम में नहीं पाल सके डेंगू मच्छर का लार्वा खाने वाली गंबूजिया मछली

कवर्धा14 दिन पहले
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वर्तमान में सीएमएचओ कार्यालय के बाहर टंकी में गंबूजिया मछली रखी गई है। - Dainik Bhaskar
वर्तमान में सीएमएचओ कार्यालय के बाहर टंकी में गंबूजिया मछली रखी गई है।
  • जिले में एक महीने में डेंगू के चार मरीज मिले, राहत की बात है अब सभी ठीक हो चुके हैं लेकिन सावधानी जरूरी
  • बीमारी की पुष्टि करने जांच की सुविधा सिर्फ जिला अस्पताल में है

राज्य में राजधानी रायपुर समेत दुर्ग-भिलाई में लगातार डेंगू के मरीज मिल रहे है। ऐसे में शासन ने सभी जिलों को अलर्ट कर रखा है। कबीरधाम जिले में भी डेंगू के रोकथाम को लेकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन जिले में इस बीमारी की रोकथाम को लेकर स्थिति ठीक नहीं है। जिले में बीते एक माह में डेंगू के 4 मरीज मिल चुके हैं। राहत की बात है कि जिले अभी तक किसी भी डेंगू से पीड़ित मरीज की मौत नहीं हुई है।

बीमारी की रोकथाम को लेकर स्थिति ऐसी है कि डेंगू मच्छर के लार्वा खाने वाली गंबूजिया मछली पालने के निर्देश बीते वर्ष कलेक्टर रमेश शर्मा ने दिए थे। इसे लेकर विभाग ने अपने कार्यालय के बाहर एक छोटा सा टंकी निर्माण जरूर करा दिया। वर्तमान में इस टंकी में करीब 50 से 100 की संख्या में यह मछली है। बताया जा रहा हैं राज्य स्तर पर इस मछली की सप्लाई नहीं होने के कारण टंकी में केवल पानी ही है। इधर अब जिले में डेंगू के मरीज मिलने लगे तो विभागीय अधिकारी अलर्ट हुए हैं। मौजूदा संसाधन से बचाव में लगे हुए हैं।

8 लाख की आबादी और यह हाल, सुविधा नहीं है
आठ लाख आबादी वाले जिले में डेंगू बीमारी की पुष्टि के लिए जांच की सुविधा सिर्फ जिला अस्पताल में है। विभाग की मानें तो सभी सरकारी अस्पताल में रैपिड एंटीजन किट है, इसके माध्यम से सस्पेक्टेड मरीज की जांच की जाती है। लेकिन पुष्टि के लिए केवल जिला अस्पताल में मेक एलाइजा मशीन है। जिले में मिले चार मरीज की पुष्टि इसी मशीन के जरिए हुई।

जिले के शहरी क्षेत्र में डेंगू का ज्यादा खतरा बढ़ा
जिले में अब तक चार मरीज की पुष्टि हुई है। विभाग का दावा है इन चारों मरीज का सोर्स जिले से नहीं था। क्योंकि चारों मरीज भिलाई व नागपुर से संक्रमित होकर आए हुए थे। जिले में जांच के बाद ये संक्रमित पाए गए। डेंगू को लेकर सबसे ज्यादा खतरा शहरी क्षेत्रों में है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी निकाय के सीएमओ को प्रतिदिन जमे हुए पानी में दवा का छिड़काव करने निर्देश दिए हैं।

इस वर्ष जिले में मलेरिया के सर्वाधिक 166 मरीज मिले
इधर जिले में मलेरिया के मरीज भी लगातार बढ़ रहे है। हाल में ही जिले में मलेरिया मुक्त अभियान चलाया गया था। इसमें 22 हजार 458 लोगों का सैंपल लिया गया, जिसमें से 166 मलेरिया के मरीज मिले हैं। वर्ष 2020 में 1 लाख 53 हजार 945 लोगों का सैंपल लिया गया था, जिसमें से 136 मलेरिया के मरीज मिले थे। लेकिन इस वर्ष अगस्त माह तक 166 मरीज मिल चुके हैं। सावधानी जरूरी है।

कोरोना के साथ मलेरिया के मरीज भी मिले
बीते माह हुए मलेरिया मुक्त अभियान की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। जिले में मलेरिया के साथ कोरोना का असर भी रहा है। विभाग के रिपोर्ट अनुसार अगस्त माह तक 166 मलेरिया के मरीज मिले है, जिनमें 39 ऐसे मरीज मिले, जो पहले से ही कोरोना संक्रमित थे। ऐसे में मलेरिया व कोरोना का इलाज एक साथ किया गया। डेंगू बीमारी के लक्षण की शुरुआत वायरल फीवर के साथ शुरू होती है। यही शुरुआती लक्षण कोरोना के भी होते हैं।

तेज बुखार के साथ सिर व जोड़ों में दर्द, डेंगू के लक्षण
तेज बुखार आना, सिर में आगे की और तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द और आंखों के हिलने से दर्द में और तेजी, मांसपेशियों (बदन) व जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगना, चक्कर आना, जी घबराना, उल्टी आना यह सब डेंगू के लक्षण हैं। इनमें से कोई भी लक्षण होने पर तत्काल अस्पताल में जाकर जांच कराएं।

भिलाई व नागपुर से संक्रमित होकर लौटे थे: सीएमएचओ
सीएमएचओ डॉ.एसके मंडल ने बताया कि वर्तमान में रायपुर से गंबूजिया मछली नहीं आई है। बीते वर्ष ब्लॉक स्तर पर इस प्रजाति के मछली को जरूर बांटा गया था। वर्तमान में जिले में डेंगू के 4 मरीज मिले थे, ये भी स्वस्थ्य हो चुके है। इन सभी मरीज का बैकग्राउंड जिले से नहीं था। क्योंकि ये भिलाई व नागपुर से संक्रमित होकर लौटे थे। रहा सवाल जिले में मलेरिया के मरीज बढ़ने का तो सर्वे के कारण ही संख्या बढ़ी है, हम सर्वे नहीं करते तो ये आंकड़े भी नहीं मिलते।

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