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आक्रोश:थाने का घेराव कर रहे आदिवासियों को पुलिस ने डंडे से मारा तो भीड़ ने किया पथराव, बोड़ला टीआई जख्मी

कवर्धा/ रेंगाखार जंगल2 महीने पहले
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  • खम्हरिया में निर्दोष ग्रामीण से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होने से थे नाराज

ग्राम खम्हरिया में निर्दोष ग्रामीण से मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज आदिवासियों ने बुधवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के नेतृत्व में रेंगाखार जंगल थाने का घेराव कर दिया। घेराव के दौरान एक आदिवासी को पुलिस ने डंडे से मार दिया, जिससे भीड़ उग्र हो गई। आदिवासियों ने डंडा लेकर पुलिस पर चढ़ाई कर दी। थाने में पथराव किया गया, जिसके चलते बोड़ला टीआई संतराम सोनी समेत 9 पुलिसकर्मी जख्मी हो गए हैं। वहीं पुलिस की ओर से लाठियां बरसाई गई, जिसमें 12 ग्रामीण घायल हुए हैं। हालांकि, किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। पथराव के चलते बोड़ला टीआई संतराम सोनी के सिर से खून निकलने लगा। थाना घेराव को लेकर गोंगपा ने बाकायदा आवेदन दिया था। आदिवासियों के घेराव को देखते हुए सहसपुर लोहारा, झलमला, सिंघनपुरी और बोड़ला थाने से फोर्स बुलाई गई थी। जब आदिवासियों ने पत्थर मारना शुरू किया, तो पुलिस अधिकारियों ने गेट बंद किया और सीधे थाने में घुस गए।

सभा के बाद कुल्हाड़ी, डंडे व खाड़ा लेकर थाने पहुंचे
घेराव को लेकर दोपहर 12 बजे रेंगाखार चौक पर आदिवासी समाज के लोग एकजुट हुए, जहां पर सभा हुई। सभा के बाद आदिवासी घेराव करने निकले। रैली की शक्ल में पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए आधा किमी पैदल चलकर थाने पहुंचे। सभी ने हाथ में झंडे के अलावा पारंपरिक हथियार कुल्हाड़ी, डंडा व खाडा (तलवारनुमा हथियार) पकड़ रखा था। इस दाैरान आदिवासी समाज के लोग अाक्रोशित थे। घेराव के दौरान वे उग्र हो गए।

डटे रहे आदिवासी, एफआईआर के आश्वासन पर माने
हंगामे बाद आदिवासी समाज के लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ । वे थाने को घेरकर बैठ रहे। इस दौरान पुलिस अधिकारी व पूरी फोर्स थाने के अंदर ही थी। यही नहीं तहसीलदार सतीष त्रिशांत भी वहीं मौजूद थे। शाम करीब 6 बजे मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर करने आश्वासन दिया। एफआईआर के लिए 3 दिन की मोहलत मांगी गई। आश्वासन के बाद आदिवासियों का गुस्सा शांत हुआ और घेराव खत्म किया।

आदिवासी समाज के लोगों ने इसलिए घेरा थाना
दरअसल, ये पूरा घटनाक्रम 23 दिसंबर के उस वाकिये से जुड़ा है, जब खम्हरिया- मोहनपुर रोड पर रेत से भरी दो गाड़ी लावारिस हालत में खड़ी मिली थी। रेत चोरी के मामले में गाड़ी मालिक सम्रत सिंह को पकड़ने के लिए खम्हरिया गांव पहुंची। लेकिन गलती से सांवतराम मरकाम के घर पहुंच गए। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने सांवतराम से गाली- गलौच करते हुए मारपीट की। घटना के बाद मारपीट करने वाले पुलिसकर्मियों की शिकायत करने थाने गए, तो एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसी बात को लेकर आदिवासी समाज के लोगों में नाराजगी थी। इस कारण थाने घेरने पहुंच गए।

कार्रवाई नहीं होने पर फिर से आंदोलन की चेतावनी
गोंगपा के जिलाध्यक्ष मलेश मरकाम ने बताया कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने 3 दिन की मोहलत मांगी गई है। इसलिए घेराव खत्म कर दिया। अगर कार्रवाई नहीं हुई, तो फिर आंदोलन करेंगे।

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