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अभियान:465 पंचायतों में 9000 असाक्षर ढूंढना था, 88 पंचायतों में ही मिल गए 9382

कवर्धा10 दिन पहले
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असाक्षर लोगों को साक्षर बनाने के लिए केंद्रीय स्तर पर पढ़ना- लिखना अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत कबीरधाम जिले में 9 हजार असाक्षर को साक्षर बनाने का लक्ष्य दिया गया था। असाक्षर को ढूंढने के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में सर्वे किया गया। सर्वे का काम पूरा हो चुका है। जिले के 465 ग्राम पंचायतों में सर्वे होना था, लेकिन शिक्षा विभाग को 88 ग्राम पंचायतों में ही लक्ष्य से ज्यादा असाक्षर मिल गए।
सर्वे में कुल 9382 असाक्षर मिले हैं, जो कि लक्ष्य से 382 ज्यादा है । जिले के 377 ग्राम पंचायतों में सर्वे ही नहीं किया गया। क्योंकि टारगेट के अनुरूप असाक्षर का चिह्नांकन करने के बाद सर्वे बंद कर दिया गया है। पढ़ना- लिखना अभियान के समन्वयक व बीईओ टीआर साहू बताते हैं कि अप्रैल 2021 से गांव- मोहल्ले में कक्षाएं लगाई जाएगी। चिह्नांकित असाक्षर को हिंदी और गणित का ज्ञान दिया जाएगा। इसे लेकर 1001 वालिंटियर टीचर की नियुक्ति की गई है। प्रति 10 असाक्षर पर 1 टीचर नियुक्त किया गया है।
जानिए, क्या है अभियान: पढ़ना- लिखना अभियान के तहत 15 वर्ष से अधिक उम्र वाले असाक्षर की पहचान कर उन्हें स्वयंसेवी शिक्षक के माध्यम से साक्षर किया जाना है। साक्षर करने के लिए स्वयंसेवी शिक्षकों को कोई मानदेय नहीं दिया जाएगा। समय- समय पर अच्छे कार्य करने वाले स्वयंसेवी शिक्षकों को प्रोत्साहित व सम्मानित किया जाएगा।
पूर्व में 1.90 लाख असाक्षर लोगों को साक्षर बनाने का दावा: पढ़ना- लिखना अभियान के पहले केंद्रीय स्तर पर साक्षर भारत मिशन चलाया गया था। मिशन के तहत वर्ष 2011 के सर्वे के मुताबिक 2.08 लाख लोगों को साक्षर बनाने का लक्ष्य रक्षा गया था। इनमें से 1.90 लाख असाक्षर लोगों को साक्षर बनाने का दावा किया गया। लेकिन 12 फीसदी यानी 18 हजार महिला- पुरुष असाक्षर को अशक्त मानकर साक्षर नहीं किया।

छह साल में करीब 24 करोड़ रुपए किया खर्च
सर्वे में मिले 2.08 लाख महिला- पुरुषों को साक्षर बनाने के लिए तत्कालीन 368 ग्राम पंचायतों में 727 नोडल प्रेरक नियुक्त किए गए थे। इन प्रेरकों को सैलरी देने में सालाना 1.80 करोड़ रुपए खर्च हुआ। इसके अलावा पाठ्य सामग्री भी बांटे गए। 6 साल में करीब 24 करोड़ रुपए खर्च किया गया, लेकिन लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए। वर्तमान में पढ़ना- लिखना अभियान के लिए हुए सर्वे में जो अधिकांश असाक्षर चिह्नांकित किए गए हैं, वे पूर्व में साक्षरता से छूटे हुए लोग हैं।

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