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कार्रवाई:कृषि भूमि पर अवैध निर्माण हटाने चली जेसीबी डीलर ऑफिस, बाउंड्रीवॉल, रोड नेटवर्क को तोड़ा

कवर्धा9 दिन पहले
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  • कवर्धा शहर के आउटर में बगैर डायवर्सन 6 जगहों पर 10 एकड़ कृषि भूमि को पाटकर की गई थी अवैध प्लाटिंग

शहर के आउटर में बगैर डायवर्सन के 6 जगहों पर लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि को पाटकर अवैध प्लाटिंग की गई थी। कॉलोनियां विकसित (डेवलप) करने के इरादे से इसे बेचने की तैयारी थी, लेकिन ऐन वक्त पर प्रशासन की नजर इस पर चढ़ गई। नगर पालिका, राजस्व और नगर एवं ग्राम निवेश विभाग की संयुक्त टीम मंगलवार को यहां जेसीबी लेकर पहुंच गई। अवैध प्लाटिंग में बने एक डीलर ऑफिस, बाउंड्रीवॉल और रोड नेटवर्क को तोड़ने कार्रवाई की गई। संबंधित भूमि मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। जबकि एक बार फिर भू- स्वामियों को लालच देकर अवैध प्लाटिंग का गोरखधंधा करने वाले साफ बचकर निकल गए। नपा सीएमअो नरेश कुमार वर्मा बताते हैं कि कवर्धा शहर से लगे क्षेत्र में ले- आउट की मंजूरी के बिना अवैध प्लांटिंग और बिना लाइसेंस कॉलोनी निर्माण करने वालों समेत 6 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। घोठिया रोड पर किसान भरत- अजय पिता प्रभु के खसरा नंबर 505/2 में 0.809 हेक्टेयर एरिया में अवैध प्लाटिंग व कॉलोनी विकसित करने के इरादे से सड़क, बाउंड्रीवॉल और पक्का निर्माण कर लिया गया था। बिल्डर ने यहां बाकायदा बाउंड्रीवाल और सड़क बनवा दिया था। यही नहीं, डीलर ऑफिस भी खोल दिए थे। दलालों तक नहीं पहुंच पाते हाथ: शहर के आउटर में खेती जमीन पर अवैध प्लाटिंग का गोरखधंधा जोरों से चल रहा है। किसानों को एकड़ के हिसाब से खेती जमीन लेकर दलाल उसे डायवर्शन (आवासीय भूमि में परिवर्तित) कराए बिना कालोनाइजरों की तरह सीधे प्लाटिंग कर रहे हैं। इस खेल में दलाल बेहद सावधानी से काम करते हैं। किसानों की जमीन का सौदा कर उसे टुकड़े में लोगों को बेच देते हैं। यानी हर रजिस्ट्री में किसानों को खड़ा कर देते हैं, ताकि कानूनी पेंच फंसे तो किसान के सिर ठीकरा फूटे। ऐसा कर वे लाखों रुपए तो कमा रहे हैं और आयकर के रूप में फूटी कौड़ी भी नहीं दे रहे।

कवर्धा नगरीय क्षेत्र में 12 साल में 8-9 कॉलोनियां बनीं, सभी अवैध, सिर्फ 2 का नियमितीकरण हुआ
नगरीय क्षेत्र कवर्धा में पिछले 12 साल में 8 से 9 कॉलोनियां विकसित हुई हैं, ये सभी अवैध हैं। अवैध प्लाटिंग कर विकसित हुई इन कॉलोनियों के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमति नहीं ली गई है। वर्ष 2008- 09 में सिर्फ शांतिदीप कॉलोनी और आनंद विहार कॉलोनी के पीछे का कुछ हिस्सा नियमितीकरण हुआ था। बाकी कॉलोनियों का नियमितीकरण नहीं हो पाया है। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोग पक्की नाली और सड़क के लिए तरस रहे हैं। हालांकि नपा ने राहत देते हुए इन कॉलोनियों में अधिकांश जगहों पर सीसी रोड व छोटी नालियां बनवा दी है।

इन पर भी की गई कार्रवाई
कुल 6 स्थानों पर कार्रवाई हुई। रायपुर- बिलासपुर बायपास रोड पर किसान कली राम पिता निहारा के नाम पर खसरा नंबर- 394 में 0.745 हेक्टेयर रकबा दर्ज है। उक्त रकबे की जमीन पर अवैध प्लाटिंग की गई थी। नांदगांव रोड स्थित साईं मंदिर के पीछे खसरा नं. 271/1 भू-स्वामी गुरमुख पिता अमरीक के 0.064 हेक्टेयर, राजनांदगांव रोड पर ही खसरा नं.- 275/5 में भू- स्वामी मानिक पिता बोरे लाल की 0.441 हेक्टेयर और खुंटू रोड में प्रेम पिता श्यामलाल के खसरा नं.- 1008/4 में 0.312 हेक्टेयर व 1010/ 1 में 0.405 हेक्टेयर रकबे में अवैध प्लाटिंग की गई थी।

100 दिन में कॉलोनी विकास की अनुमति
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सीजी आवास नाम से शासन की स्कीम है। स्कीम के जरिए 100 दिन में कॉलोनी विकास की वैध अनुमति दी जाती है। इसमें कॉलोनी का ले- आउट पास होना, जमीन का डायवर्शन, कॉलोनी विकास की अनुमति मिल जाती है। यह सब ऑनलाइन है। इसमें संबंधितों को कॉलोनी विकास की अनुमति के लिए विभागों के चक्कर लगाने की भी जरुरी नहीं है।

टाउन प्लानिंग से ले-आउट पास करवाना जरूरी
नियमों के अनुसार किसी जमीन के 4 या उससे अधिक प्लाट बनाकर बेचने पर टाउन प्लानिंग से ले- आउट पास करवाना जरूरी होता है। ले- आउट में ही दर्शाया जाता है कि सड़क कहां- कितनी चौड़ी होगी, बिजली खंभे और सीवरेज सिस्टम कैसे बनेगा?

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