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मौसम का कहर:मवेशियों को लेकर जंगल गए चरवाहे भाइयों पर गिरी बिजली, एक की मौत, दूसरा घायल

कवर्धा/ चिल्फी घाटीएक महीने पहले
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  • तेज गरज-चमक, आंधी के साथ बारिश, बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात का असर

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवात के असर से कबीरधाम जिले में पिछले दो दिन से बारिश हो रही है। शनिवार दोपहर में तेज अंधड़ के साथ बारिश हुई। दो जगहों पर हाइटेंशन लाइन पर पेड़ गिरने से कवर्धा में 5 घंटे तक बिजली बंद रही। इधर, चिल्फी थाना क्षेत्र के ग्राम बेंदा में चरवाहे भाइयों पर बिजली गिर गई। हादसे में एक की मौत हो गई।
मिली जानकारी के मुताबिक मृतक राजेन्द्र बैगा पिता इंदल सिंह (16) ग्राम पंचायत बेंदा का रहने वाला था। शनिवार को वह अपने बड़े भाई के साथ गायों को चराने जंगल की ओर गया था। तभी दोपहर करीब 2 बजे तेज बारिश हुई। बारिश से बचने के लिए दोनों भाई एक पेड़ के नीचे खड़े थे। तभी तेज गर्जना के साथ बिजली पेड पर गिरी, जिससे राजेन्द्र की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं बड़ा भाई बेहोश होकर गिर गया। घायल युवक को डॉयल 112 की मदद से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिल्फी लाया गया, जहां उसकी हालत ठीक बताई जा रही है।
विशालकाय पेड़ गिरा: शनिवार दोपहर तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। इससे जिला पंचायत भवन और पुलिस लाइन से होकर गुजरे 11केवी व 33केवी लाइव पर पेड़ गिरा, जिससे खंभा क्षतिग्रस्त हो गया और लाइन भी टूट गई। इससे पूरे शहर में बिजली सप्लाई बंद हो गई। शाम 5 बजे बिजली सप्लाई चालू की गई।

सीजन में 870.6 मिमी औसत बारिश हो चुकी
सीजन में अब तक कबीरधाम जिले में 870.6 मिमी औसत बारिश हो चुकी है, जो कि मौसम वैज्ञानिकों के वार्षिक अनुमान से 56.3 मिमी ज्यादा है। खास बात यह है कि पिछले सात में एेसा दूसरी बार है, जब वार्षिक अनुमान से ज्यादा बारिश हुई है। इससे पहले वर्ष 2014 में इस अवधि में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई थी। इस साल जिले में मानसून 12 जून को पहुंचा था। तब से बारिश का दौर ऐसा चला, जो अब भी जारी है। सावन महीने से किसानों को निराश जरूर किया, इसकी कमी भादो में पूरी हो गई। मानसून की विदाई 30 सितंबर को मानी जाती है।

इससे पहले वर्ष 2014 में टूटा था रिकॉर्ड
भू- अभिलेख से मिली जानकारी के मुताबिक इससे पहले वर्ष 2014 में अनुमान से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। तब वार्षिक अनुमान 837.8 मिमी औसत बारिश का था, लेकिन इस अवधि में 895.1 मिमी औसत बारिश हो चुकी थी। इसके बाद के वर्ष 2015 में 742.6 मिमी, वर्ष 2016 में 645.9 मिमी, वर्ष 2017 में 772.2 मिमी, वर्ष 2018 में 603.1 मिमी और वर्ष 2019 में 782.6 मिमी औसत बारिश रिकॉर्ड की गई । लेकिन अनुमान से कम वर्षा हुई थी। इधर इस बार अच्छी बारिश होने से किसान हर्षित हैं।

उड़द की फसल को बारिश से नुकसान
नफा:
जिले में 81 हजार हेक्टेयर में धान की फसल ली गई है। चालू सीजन में अच्छी बारिश से धान की फसलों को फायदा पहुंचा है। कृषि विभाग के उपसंचालक मोरध्वज डड़सेना बताते हैं कि बारिश से धान की फसल को नुकसान नहीं होगा।

नुकसान: कृषि उपसंचालक डड़सेना का कहना है कि इस बारिश से उड़द की फसलों को नुकसान हैं। जिले में 3.50 हजार हेक्टेयर में उड़द फसल ली गई है। लोहारा तहसील में उड़द की कटाई शुरु हो गई है। बारिश से कटी हुई फसलों को नुकसान पहुंचेगा।

आगे क्या... आज भी बारिश की संभावना
रायपुर के मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा बताते हैं कि एक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती घेरा पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी, उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिण पार्टी उड़ीसा के ऊपर 1.5 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है। एक चक्रीय चक्रवाती घेरा तेलंगाना और उससे लगे विदर्भ के ऊपर 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। एक द्रोणिका बिहार से दक्षिण अंदरुनी उड़ीसा तक 1.5 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है। जिसकी वजह से 20 सितंबर को भी कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

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