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संघर्ष जारी:झाम सिंह के परिजनों से मिलने पहुंचे मंत्री अकबर ने कहा- अभी सिर्फ 302 लगाया, न्याय नहीं हुआ

कवर्धा3 महीने पहले
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  • आदिवासी झाम सिंह की कथित नक्सल मुठभेड़ में मौत का मामला, एमपी सरकार ने दिए एक लाख रुपए

बोड़ला के शीतलपानी पंचायत के बालसमुंद के आदिवासी झाम सिंह की कथित नक्सली मुठभेड़ में हुई मौत के मामले को लेकर छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सरकार आमने-सामने थी। अब इस मामले में मध्यप्रदेश सरकार बैकफुट पर आई है। चौतरफा दबाव के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने न सिर्फ मामला जांच के लिए सीआईडी को सौंप दिया है, बल्कि एक लाख रुपए की सहायता राशि का भी ऐलान किया है। पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की भी सिफारिश की गई है। गुरुवार को झाम सिंह के गांव बालसमुंद पहुंचे छत्तीसगढ़ के कैबिनेट मंत्री मो. अकबर ने भी एमपी सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर कहा कि अभी सिर्फ 302 का मामला दर्ज हुआ है। झाम सिंह के साथ न्याय होना बाकी है। हम आखिर तक इस पर लड़ेंगे। मंत्री मोहम्मद अकबर गुरुवार की दोपहर लगभग 3 बजे झाम सिंह के गांव बालसमुंद पहुंचे। उनके साथ जिला कांग्रेस अध्यक्ष नीलकंठ चंद्रवंशी, वरिष्ठ नेता प्रभाती मरकाम, कन्हैया अग्रवाल, कलीम खान समेत कलेक्टर रमेश कुमार शर्मा, एसपी केएल ध्रुव, डीएफओ दिलराज प्रभाकर व सीईओ जिपं विजय दयाराम के भी मौजूद रहे।

मंत्री ने मृतक की पत्नी को एक लाख रुपए दिए
मंत्री अकबर ने पहले झाम सिंह को श्रद्धांजलि दी, फिर मृतक के दोनों पुत्र, पुत्री, भाई मान सिंह व घटना के चश्मदीद नेम सिंह से मुलाकात की। उन्होंने मृतक की पत्नी को रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से एक लाख रुपए की सहायता दी। साथ ही हर संभव मदद का आश्वासन दिया। परिजनों ने उनसे एक सदस्य को नौकरी देने की मांग भी की।

वन मंत्री व राज्यपाल ने भी लिखी थी चिट्ठी
इस मामले में प्रदेश के वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को दो बार चिट्ठी लिखकर कार्रवाई करने की बात कही थी। उन्होंने एमपी के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को भी दो बार चिट्ठी लिखी थी। इसके अलावा राज्यपाल अनुसुइया उइके ने भी सीएम शिवराज सिंह को पत्र लिखा था।

अजजा आयोग के सदस्य ने अध्यक्ष को सौंपी रिपोर्ट
झाम सिंह की मौत के मामले में सबसे पहले अजजा आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने जांच की और रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंपी। बोड़ला एसडीएम की जांच रिपोर्ट में वही तथ्य आए, जो भास्कर ने सामने रखे थे। चौतरफा दबाव के बीच मध्यप्रदेश सरकार ने पुलिस एनकाउंटर में हत्या के मामले में अब सीआईडी को जांच की जिम्मेदारी सौंप दी है।

मानवाधिकार आयोग ने भी जवाब मांगा
इस मामले को मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन ने मध्यप्रदेश डीजीपी, आईजी जबलपुर, बालाघाट एसपी को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के भीतर इस मामले में विस्तृत प्रतिवेदन मांगा है। बालाघाट कलेक्टर ने भी मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।


मो. अकबर, कैबिनेट मंत्री, छत्तीसगढ़

सवाल - आपने मृतक के परिवार से भेंट की है, उनकी क्या मांगें हैं?
- परिवार के लोगों से मुलाकात हुई है, उन्हें आश्वस्त किया गया है कि चिंता करने की जरूरत नहीं है। पूरा आदिवासी समाज एकजुट हुआ, सभी के सहयोग से 302 का मुकदमा दर्ज हुआ। मैंने दो बार मध्यप्रदेश के सीएम व गृहमंत्री को पत्र लिखा। कोई जवाब नहीं आने पर राज्यपाल छत्तीसगढ़ से फोन पर बात की, वे छिंदवाड़ा में थीं। बोड़ला एसडीएम ने जो रिपोर्ट दी थी, वह भी मैंने उन्हें भेजी। राज्यपाल ने आश्वासन दिया था कि वे एमपी के राज्यपाल से बात करेंगी। उन्होंने भी पत्र लिखा।
सवाल - एक लाख रुपए की मदद दी गई है, क्या सिर्फ इतनी ही मदद दी जाएगी?
- इस इलाके का यह पहला मामला है, जिसे फर्जी एनकाउंटर बनाने का प्रयास किया जा रहा था, जो सफल नहीं हो पाया। जान की कोई कीमत नहीं होती। हमने जो राशि दी है, वह रेडक्रॉस सोसायटी द्वारा तात्कालिक मदद स्वरूप दी है। अभी आगे भी एमपी सरकार क्या करने जा रही है, उसका इंतजार है।
सवाल - स्थानीय प्रशासन ने आपको जांच रिपोर्ट दी, वह रिपोर्ट क्या कहती है?
- जो समाचार पत्रों के जरिए जो निकलकर आया, वहीं जांच रिपोर्ट में भी है। कि वे मछली मारने गए थे, लौट के आ रहे थे, उन्हें दो वर्दीधारियों ने रोकने की कोशिश की, वे डर के मारे दौड़ने लगे, एक को गोली लग गई, एक घर आ गया। जांच रिपोर्ट में भी वही बातें ही सामने आई हैं।
सवाल - 302 के तहत मुकदमा दर्ज होने से क्या झाम सिंह के साथ न्याय हो गया?
-अभी न्याय नहीं हुआ है, क्योंकि किसी को सजा नहीं मिली है। अभी तो केवल मामला दर्ज हुआ है। प्रारंभिक मांग थी कि मुकदमा दर्ज करो। वे तो बोल रहे थे कि एनकाउंटर हो गया। जब हमने रिकार्ड निकालकर देखा कि इसका तो कोई आपराधिक रिकार्ड ही नहीं है। किसी गतिविधि में संलिप्तता नहीं रही, तो एनकाउंटर कैसे हो गया।
सवाल - अब आगे छत्तीसगढ़ सरकार क्या करेगी?
- फिलहाल मध्यप्रदेश सरकार के कदम का ही इंतजार है कि वे क्या करने जा रहे हैं। उसके बाद हम प्रदेश सरकार की ओर से कदम उठाएंगे।

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