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मन से त्यागें मृत्यु भोज:मुस्लिम समाज पहले दिन करता है भोजन की व्यवस्था

कवर्धा10 महीने पहले
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  • मृत्यु पर गम बांटिए..! सामाजिक बदलाव के लिए दैनिक भास्कर की समाज के साथ एक पहल

मुस्लिम समाज में भी मृत्युभोज कराए जाने का नियम है, जिसे चेहल्लुम (मृत्युभोज) कहा जाता है। यह किसी की मृत्यु होने के 40 दिन बाद समाज के गरीब वर्ग के लोगों को भोजन खिलाया जाता है। इस भोजन में केवल गरीबों का हक होता है, लेकिन इसे अमीर वर्ग के लोग भी खाया करते थे। जैसे-जैसे समाज में जागरूकता आई, इसे अब बंद कर दिया है। कवर्धा मुस्लिम समाज के नायब मुतवल्ली अब्दुल सईद खान ने बताया कि चेहल्लुम को लेकर पहले 40 दिन के बाद भोजन कराया जाता था। लगभग 10-12 वर्ष से यह प्रथा पूरे जिले में लगभग बंद हो गई।  मुतवल्ली के मुताबिक भोजन कराए जाने को लेकर समाज की ओर से कोई अनिवार्यता भी नहीं है। अब लोगों को भोजन न खिलाकर परिजन अपने घर में ही 40 दिन बाद चेहल्लुम का फातिहा(प्रार्थना) पढ़ते हैं। इस फातिहा में मरहूम (मृतक) के लिए दुआ करते है। वहीं दूसरी ओर समाज में किसी व्यक्ति की मौत होती है तो पहले दिन के भोजन की व्यवस्था खुद समाज या संबंधित मोहल्ले के लोगों द्वारा किया जाता है। खास बात है कि इस भोजन में केवल मृतक के अंतिम संस्कार में शामिल हुए उसके परिजन शामिल होते है। 

इस्लाम में चेहल्लुम का महत्व  
कवर्धा जामा मस्जिद के पेश ईमाम हाफिज रिजवान अशरफी ने बताया कि इस्लामी अकीदा (मान्यता) है कि अगर किसी नेक काम का सवाब (पुण्य) मरने वाले की रूह को पहुंचाया जाये तो वह जरूर पहुंचता हैं। ऐसे में चेहल्लुम का फातिहा किया जाता है। लेकिन इस फातिहा का खाना केवल गरीब ही खा सकते हैं। अमीर वर्ग के लिए यह खाना हराम करार दिया गया है। वहीं चेहल्लुम की फातिहा में यह अनिवार्य नहीं है कि ज्यादा से ज्यादा गरीबों को खाना खिलाए जाए। जिस व्यक्ति की जितनी इच्छा हो वह यह काम कर सकता है। अगर कोई गरीब वर्ग के यहां किसी की मृत्यु होती है तो वह केवल फातिहा दिला सकता है। यह नियम सभी के लिए है। इस्लाम में फिजूलखर्ची को नाजायज करार दिया गया है।

भोजन कराने युवा हर माह जमा करते हैं राशि
ग्राम पोंड़ी के मुस्लिम यंग कमेटी के युवा भी किसी घर में मृत्यु होने पर पहले दिन मदद करते हैं। कमेटी के अध्यक्ष जहीमुद्दीन कुरैशी ने बताया कि समाज के किसी भी घर में मृत्यु होने पर पहले दिन का भोजन कमेटी की ओर से किया जाता है। इसके लेकर करीब 20 से अधिक युवा से हर माह 100 रुपए चंदा लेते है। इस राशि का उपयोग भोजन बनाने के साथ-साथ कब्रिस्तान के काम में किया जाता है। वहीं भोजन बनाने का काम खुद कमेटी के युवा करते हैं, समाज के लोग सहयोग करते हंै।

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