चैंबर नाराज:नपा को मूल किराया राशि से ही जीएसटी भरना चाहिए, ज्यादातर किराएदार जीएसटी के दायरे से बाहर या कंपोजीशन स्कीम में दुकानों के किराए पर 18% जीएसटी

कवर्धा2 महीने पहले
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नगर पालिका में चैंबर के सदस्यों ने बताई समस्या। - Dainik Bhaskar
नगर पालिका में चैंबर के सदस्यों ने बताई समस्या।

नगर पालिका कवर्धा अपनी दुकानों के किराए के साथ 18 फीसदी जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) वसूल रही है। इसे लेकर चैंबर ऑफ कॉमर्स में नाराजगी है। चैंबर के पदाधिकारियों का तर्क है कि नपा को मूल किराया राशि से ही जीएसटी भरना चाहिए। क्योंकि ज्यादातर किराएदार जीएसटी के दायरे से बाहर हैं या कंपोजीशन स्कीम में है। इससे उन्हें जीएसटी का कोई इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिल पाएगा।

चैंबर का कहना है कि कोरोना के दौरान जब लॉकडाउन लगा था, तब लंबे समय तक दुकानें बंद थी। तब भी दुकानों का किराया, बिजली का औसत बिल समेत सभी खर्च लगातार जुड़ते ही रहे हैं। व्यापारियों को किसी तरह से कोई राहत मिली नहीं है। इस पर अब जीएसटी टैक्स लेना दोहरी मार जैसी है। इसे लेकर चैंबर सभी उपायों पर चर्चा कर रही है। इसे बेहतर तरीके से समझने समाधान निकालने की जरूरत हैै।

दुकान किराए से नपा को मिलता है सालाना 1.50 करोड़ रुपए: नगर पालिका कवर्धा क्षेत्र में करीब 1600 दुकानें हैं। इनमें से 500 दुकानें बंद हैं। शेष 1100 दुकानें नियमित रूप से खुल रही है। जगह के हिसाब से दुकानों का किराया राशि तय है। दुकानों के किराए से नगर पालिका को सालाना 1.50 करोड़ रुपए राजस्व मिलता है।

20 लाख रुपए से ज्यादा की आमदनी पर जीएसटी

नगर पालिका के सीएमओ नरेश कुमार वर्मा बताते हैं कि व्यवसायिक दुकानों पर 18 फीसदी जीएसटी वर्ष 2017 से चालू है। यह भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित है। 20 लाख से ज्यादा आमदनी पर जीएसटी का प्रावधान किया गया है। चूंकि कवर्धा नगर पालिका क्षेत्र में में दुकानें ज्यादा हैं, इसलिए जीएसटी के दायरे में हैं।

नपा सीएमओ से हुई चर्चा

छग चैंबर ऑफ कॉमर्स ने सोमवार को नपा सीएमओ नरेश वर्मा के साथ बैठक की। परिषद की दुकानों के किराए के साथ लिए जा रहे जीएसटी टैक्स को लेकर किरायदारों की शंका के संबंध में जरूरी चर्चा हुई। चैंबर के जिलाध्यक्ष आकाश आहूजा ने बताया कि नगर पालिका क्षेत्र में हजारों की संख्या में दुकान हैं, जिसे पालिका ने किराए पर दिया हुआ है। वर्तमान में पालिका उक्त किराए के साथ जीएसटी को जोड़कर लेने को लेकर व्यापारियों के बीच दुविधा और शंका के साथ आपत्ति भी है।

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