समर्थन मूल्य खरीदी / 1030 किसानों से धान खरीदी नहीं

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  • शुक्रवार देर रात तक खरीदी हुई, अफसर मान रहे कि बचे किसान मंडी में बेच दिए होंगे धान

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

कवर्धा. बीते 20 से 22 मई तक तीसरी बार धान खरीदी हुई। शुक्रवार को जिले के 86 में से 16 केन्द्रों में देर रात तक खरीदी जारी रही। शनिवार को खाद्य विभाग ने फाइनल रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार तीसरे बार के खरीदी में एक हजार 30 टोकनधारी किसानों से करीब 38 हजार 813 क्विंटल धान खरीदी नहीं हो सकी है। 
जिला खाद्य अधिकारी अरुण मेश्राम ने बताया कि तीसरी बार की खरीदी में 5061 टोकनधारी किसानों से एक लाख 97 हजार 813 क्विंटल की खरीदी होनी थी। इसमें से शुक्रवार देर रात तक 1 लाख 59 हजार क्विंटल धान खरीदी हुई है। इन तीन दिनों में टोकनधारी 4031 किसान 86 खरीदी केन्द्र पहुंचे। खरीदी के बाद अब उठाव भी शुरू हो गया है। शनिवार व रविवार को पूर्ण लॉकडाउन होने के चलते उठाव के लिए श्रमिक नहीं मिले। सोमवार को सभी केन्द्रों में उठाव का काम पूरा कर लिया जाएगा।
पूरे राज्य में कबीरधाम में सबसे ज्यादा समस्या रही: खरीदी को लेकर पूरे राज्य में सबसे ज्यादा विवाद कबीरधाम जिले में हुआ है। स्थिति ऐसी रही कि किसानों ने नेशनल हाईव, स्टेट हाईवे समेत छोटे-छोटे सड़कों पर चक्काजाम किया। करीब 100 से अधिक किसानों के खिलाफ कवर्धा, पांडातराई, सहसपुर लोहारा समेत अन्य थाना में बलवा, शासकीय कार्य में बाधा का मामला बनाकर एफआईआर दर्ज किया गया। वहीं तीसरे चरण के खरीदी के मामले में भी कबीरधाम जिला पूरे 27 जिलों में पहले स्थान पर रहा है। पांचवें स्थान पर बेमेतरा जिला रहा है। 
इस खरीदी सीजन में सबसे ज्यादा विवाद 
इस बार के धान खरीदी को लेकर शुरू से विवाद चला आ रहा था। राज्य सरकार ने दिसंबर माह से खरीदी शुरू की। 2500 रुपए प्रति क्विंटल रेट होने से जिले में धान का रकबा एकाएक बढ़ा। लेकिन रकबा बढ़ने के साथ ही खरीदी लक्ष्य कम रख गया। ऐसे में शुरुआती दौर में टोकन की समस्या ज्यादा थी। वहीं जनवरी में बारदाना की कमी व इसी माह से लेकर फरवरी में बेमौसम बारिश के कारण धान खरीदी प्रभावित हुई। तब कई किसान अपने धान को नहीं बेच सके। जिले भर में विरोध प्रदर्शन हुआ। मार्च में फिर से खरीदी की गई। इसके बाद भी 5 हजार किसान बच गए। अब इन्हीं किसानों से तीसरे चरण में खरीदी की गई। इसमें भी 1030 किसान फिर से छूट गए। ऐसे में अफसर मान रहे हैं कि ये किसान अपने धान को मंडी या किसी अन्य व्यापारी के पास बेच दिए होंगे।ं

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