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सवालों में सिस्टम:7 माह बाद भी धान का उठाव जारी, 40% कम दाम में ले जा रहे हैं राइस मिलर्स

कवर्धा11 दिन पहले
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इस खरीदी केंद्र में प्रतिदिन धान का उठाव किया जा रहा है, यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण धान को नुकसान हुआ है। - Dainik Bhaskar
इस खरीदी केंद्र में प्रतिदिन धान का उठाव किया जा रहा है, यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण धान को नुकसान हुआ है।
  • कस्टम मिलिंग में धान का रंग लाल होने की संभावना, क्योंकि काले रंग के धान का हो रहा उठाव

जिले में धान खरीदी बंद हुए 7 माह हो गए है, लेकिन अभी तक धान का उठाव पूरा नहीं किया जा सका है। अभी भी खरीदी केन्द्रों में धान का उठाव जारी है। हालत ऐसी है कि देरी से उठाव के कारण धान का रंग काला हो गया है, कई केन्द्रों में तो धान भूसा बन गया है। यह स्थिति बाघामुड़ा खरीदी केन्द्र का है।

जानकारी अनुसार इस खरीदी केन्द्र में ग्राम सावंतपुर, डोमनपुर, कापादाह, बाघामुडा, करपी समेत अन्य गांव आते है। इसी गांव के किसानों ने अपना धान बेचा है। केन्द्र में अभी भी धान का उठाव शेष है। खरीदी केन्द्र से मिली जानकारी अनुसार वर्तमान में राइस मिलर्स द्वारा उठाव किया जा रहा है। इन धान को 40 प्रतिशत कम दाम में उठाव किया जा रहा। यानि 2500 रुपए प्रति क्विंटल में धान खरीदी के बाद करीब 1500 रुपए में उठाव कर रहे है। लेकिन समस्या यह है कि आने वाले समय में इसी धान को कस्टम मिलिंग के बाद चावल का रंग लाल हो जाएगा। ऐसे में यह खाने योग्य भी नहीं होगा। क्योंकि अब तक कस्टम मिलिंग के तहत सफेद रंग के चावल को पीडीएस अंतर्गत सभी राशन दुकानों में सप्लाई की जाती है।

प्रतिदिन 4 से 5 ट्रक कर रहे परिवहन
ग्राम बाघामुड़ा के खरीदी केन्द्र में दो अलग-अलग जगह धान काे रखा गया है। इस वर्ष बेमौसम बारिश के कारण धान की सुरक्षा को लेकर ध्यान नहीं दिया गया। यहीं कारण है कि धान खराब हो गया। भीषण गर्मी में भी काफी नुकसान हुआ। केन्द्र में प्रतिदिन 4 से 5 ट्रक के माध्यम से उठाव किया जा रहा है। अफसरों का कहना है कि अप्रैल से जून माह तक कोरोना के कारण उठाव में सबसे ज्यादा देरी हुई है। इस कारण नुकसान हुआ है।वर्तमान में करीब 50 हजार क्विंटल धान खराब होने का अनुमान है। लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि इस माह के बाद बनाए गए रिपोर्ट में होगा। फिलहाल उठाव पर ध्यान दे रहे है।

धान की खरीदी से संबंधित जानकारी

  • 94 कुल धान खरीदी केंद्र जिले में
  • 95,929 किसानों से की धान खरीदी
  • 39.34 लाख क्विंटल धान खरीदी

अब भी खरीदी केंद्रों में पड़ा है 40 हजार क्विंटल धान
बीते धान खरीदी के दौरान जिले में 39 लाख क्विंटल धान खरीदी की गई। शुरुआत में खरीदी के दौरान बारदाना के कमी से दिक्कत हुई। इस कारण उठाव में देरी हुई। फिर शासन ने प्लास्टिक की बोरी से धान खरीदी करने का निर्णय लिया। इसके बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। सबसे राहत की बात रहीं कि इस बार धान खरीदी काे लेकर ज्यादा समय भी नहीं बढ़ाया गया, जिले में 70-30 अनुपात में धान खरीदी के कारण जल्द खरीदी कर ली गई थी। वहीं उठाव को लेकर स्थिति ऐसी रहीं कि जुलाई माह में करीब दो लाख क्विंटल धान का उठाव नहीं कर सके। प्रशासन का दावा है कि जिले में 40 हजार क्विंटल धान का उठाव शेष है।

अभी भी बारदाने की कमी
इधर नए धान खरीदी सीजन को लेकर राज्य सरकार ने तैयारी को लेकर निर्देश दिए है। इस बार बारदाना के कमी को दूर करने सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। लेकिन अभी भी बारदाना की कमी बरकरार है। बताया जा रहा है कि इस वर्ष भी जूट कारखाना में कम संख्या में बारदाना तैयार की गई है। इस कारण बारदाने की समस्या हो सकती है। श्रमिकों की कमी के कारण कम संख्या में बारदाने बने है। छत्तीसगढ़ में बारदाने की सप्लाई दक्षिण भारत व कलकत्ता से की जाती है।

लाल रंग के चावल नहीं लेंगे: खाद्य अधिकारी
जिले के खाद्य अधिकारी अरुण मेश्राम ने बताया कि वर्तमान में सभी खरीदी केन्द्र का डीओ कट गया है। 15 दिन के भीतर उठाव पूरा कर लेंगे। देरी से उठाव के कारण धान का रंग काला हो गया है, ऐसे में चावल लाल रंग का हो सकता है। लेकिन हम लाल रंग के चावल नहीं लेंगे। मिलर्स अपने अनुसार धान को दूसरे जगह सप्लाई कर सकता है। वर्तमान में दुर्ग जिले के ही मिलर्स उठाव कर रहे है।

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