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तीन साल बाद भी बोर खनन नहीं, जलसंकट:20 गांव के लोग परेशान, विभाग ने कहा- वनांचल क्षेत्र होने के कारण बोर मशीन नहीं पहुंच पा रही

कुकदुर9 दिन पहले
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अब गर्मी को मौसम लगभग खत्म होने वाला है। आने वाले 10 दिन बाद मानसून की शुरुआत हो जाएगी, लेकिन इस साल गर्मी में जिले के वनांचल क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को पीने की पानी समस्या रही है। स्थिति ऐसी रही कि ग्रामीणों को पीने की पानी के लिए करीब 5 से 7 किलोमीटर जाना पड़ा। ये समस्या पंडरिया ब्लॉक के कुकदुर वनांचल क्षेत्र के ग्राम पंचायत आगरपानी, भेलकी, छिंदीडीह, सेंदूरखार, कांदावानी, बिरहुलडीह समेत अन्य गांव में हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि बोर खनन की मांग करते-करने तीन वर्ष बीत गए। इस साल भी क्षेत्र के ज्यादातर हैंडपंप सूख गए। ऐसे में ग्रामीण दूसरे गांव के हैंडपंप में पानी लेने जाते हैं। इसमें भी समस्या यह है कि जमीन के भीतर पानी का रिसाव होने तक रूकना पड़ता है। इस संबंध में कृषि विभाग के कृषि विस्तार अधिकारी एससी प्रसाद ने बताया कि सुदुर वनांचल क्षेत्र होने के कारण इस गांव में बोर मशीन नहीं पहुंचने के चलते बोर खनन नहीं हो पा रहा है।

बारिश व ठंड के मौसम में नहीं होती परेशानी: ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र के करीब 20 से अधिक गांव में हर साल अप्रैल के अंतिम हफ्ते से लेकर जून के अंतिम हफ्ते तक समस्या होती है। जुलाई में बारिश होने के कारण उनके गांव के हैंडपंप का जलस्तर बढ़ जाता है। ऐसे में जुलाई से लेकर अप्रैल तक दिक्कत नहीं होती। क्षेत्र के किसानों को केंद्रीय क्षेत्रीय बैगा विकास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शासन के नियमानुसार जिस किसान के पास ढाई एकड़ का एक चक और एक से दूसरे ट्यूबेल की दूरी 300 मीटर से अधिक है होती है तो इस विकास योजना के तहत किसान का बोर खनन स्वीकृत होता है। यदि वहां पर बिजली नहीं है और एक ट्यूबेल से दूसरे ट्यूबेल की दूरी 300 मीटर से कम नहीं है, ग्रामीण सुंदर मरावी ने बताया कि ग्राम पंचायत सेंदूरखार के आश्रित ग्राम बागर में केजू पिता झुलु, चाउर डोगरी के सोन सिंह पिता गोडू का 3 साल पूर्व केंद्रीय क्षेत्रीय बैगा विकास योजना के तहत बोर खनन का प्रकरण कृषि विभाग ने स्वीकृत किया है। वहां पर मशीन नहीं जाने के कारण बोर खनन नहीं हुआ। अागरपानी पंचायत के आश्रित झूमर में भी बोर खनन स्वीकृत है।

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