गर्भ में ही बच्चे की मौत:तड़पती रही गर्भवती, अस्पताल में नर्स थी न डॉक्टर

कवर्धा3 दिन पहले
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  • परिजन के कॉल करने पर बोली नर्स }आओ... मेरे घर में झाड़ू-पोछा करना, फिर आपके पेशेंट का इलाज करुंगी, बड़ी लापरवाही- सीएमएचओ ने दिए जांच के आदेश, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिल्फी का मामला

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिल्फी में प्रसव के दौरान नाल फंसने से गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई। घटना को लेकर पीड़ित परिजन ने यहां पदस्थ डॉक्टर और नर्स पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही गर्भवती महिला को लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां डॉक्टर व नर्स नदारद थे। यही नहीं, प्रसव कराने परिजन ने मोबाइल पर कॉल किया, तो नर्स झिड़कते हुए बोलीं कि आ जाओ.. मेरे घर में झाडू- पोंछा करना, फिर आपके पेशेंट का इलाज करुंगी। मामले में सीएमएचओ डॉ. एसके मंडल ने जांच के आदेश दिए हैं। मिली जानकारी के मुताबिक घटना बुधवार रात 12 बजे की बताई जा रही है। चिल्फी निवासी सोना पिता संतोष मरकाम को रात में तेज प्रसव पीड़ा हुई। इस पर उसे रात में ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, लेकिन ड्यूटी पर कोई नहीं था।

दो बार कॉल करने के करीब एक घंटे बाद नर्स आईं और जांच कर वापस चली गई। दर्द बढ़ने पर गुरुवार सुबह 6 बजे फिर कॉल किया, तो नर्स ने झिड़कीं। अस्पताल पहुंचने पर प्रसव के दौरान बच्चे की मौत हो गई। उल्लेखनीय है कि जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए कहा जाता है। इधर पीएचसी में ऐसा हाल है।
गर्भ में नाल फंसने से हुई बच्चे की मौत: राठौर
स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी व आरएमए राकेश राठौर का कहना है कि गर्भ में नाल फंसी थी, जिससे बच्चे की मौत हुई। कॉल करने पर नर्स रात में अस्पताल आई थी, चेक की थी। परिजन ने गर्भवती महिला की सोनोग्राफी जांच नहीं कराई थी, जिससेे यह पता नहीं चल पाया कि गर्भ में बच्चे की पोजिशन क्या थी।

दो बड़ी वजह, यहां 24 घंटे सेवाओं की बात बेमानी

1. एक तिहाई स्टॉफ से चल रहा काम, नर्स भी अटैचमेंट में: पीएचसी चिल्फी में मरीजों को 24 घंटे सेवा दिया जाना है। लेकिन यहां स्वीकृति का एक तिहाई स्टॉफ ही पदस्थ है। वर्तमान में यहां 1- 1 महिला व पुरुष आरएमए समेत 7 कर्मचारियों का स्टाफ है। एक नर्स है, वो भी उप-स्वास्थ्य केंद्र से यहां अटैच की गई है।

2. अस्पताल से दूर किराए के कमरे में रहते हैं स्टाफ: पीएचसी में कार्यरत आरएमए व सपोर्टिंग स्टॉफ के लिए ट्रांजिट हॉस्टल नहीं है। कर्मचारी व उनका परिवार अस्पताल से दूर बाजार पारा में किराए का कमरा लेकर रह रहा रहा। ऐसे में रात में इमरजेंसी मरीजों के इलाज के लिए परिजन को कॉल करना पड़ता है।

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