मिलेगा रोजगार:वन प्रोडक्ट योजना के लिए ​​​​​​​कबीरधाम में गन्ने का चयन, छोटे उद्योगों को मजबूत करने कबीरधाम जिले में गन्ने पर होगा बड़ा काम

कवर्धाएक महीने पहले
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इस बार हुए सर्वे में यह सामने आया है कि किसानों ने धान के रकबे को कम कर गन्ना बोया है। इसकी खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। - Dainik Bhaskar
इस बार हुए सर्वे में यह सामने आया है कि किसानों ने धान के रकबे को कम कर गन्ना बोया है। इसकी खेती के प्रति रुझान बढ़ा है।
  • केन्द्र के लघु, कुटीर व मध्यम उपक्रम मंत्रालय ने शुरू की योजना, गन्ने से जुड़े प्रोडक्ट,उद्योगों को देंगे बढ़ावा

कबीरधाम जिला पूरे प्रदेश में भोरमदेव मंदिर के साथ अब शक्कर उत्पादन के लिए अपनी पहचान बना चुका है। यह शक्कर गन्ने के रस से बनता है और गन्ने का उत्पादन कबीरधाम में बढ़ता जा रहा है। ऐसे में अब केन्द्र सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना के लिए भी कबीरधाम जिले के लिए गन्ने को ही चुना गया है।

गन्ने से जुड़े प्रोडक्ट व उद्योगों के विकास के लिए इस पर विस्तृत योजना बनाकर काम किया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। कबीरधाम जिले में इस बार लगभग 24 हजार हेक्टेयर से भी ज्यादा के रकबे में गन्ने की खेती हो रही है। ये गन्ने जिले में न सिर्फ दो शक्कर कारखानों तक पहुंचता है, बल्कि जिले के 200 से भी ज्यादा गुड़ फैक्ट्रियों को भी इन्हीं खेतों से गन्ने की सप्लाई होती है। अब गन्ने से जुड़े उत्पादों को बढ़ाने के लिए जिले में इससे जुड़े छोटे-मझोले उद्योगों बढ़ावा देने की दिशा में काम शुरू होगा।

एक दौर की बैठक हो चुकी है: कृषि विभाग कबीरधाम के अधिकारी मोरध्वज डड़सेना बताते हैं कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत एक दौर की बैठक हो चुकी है। कबीरधाम जिले के लिए गन्ने को इस योजना के तहत चुना गया है। गन्ने से बनने वाले प्रोडक्ट और इससे जुड़े छोटे-मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए इस पर काम किया जाना है। हालांकि, इस योजना पर काम कैसे किया जाना है इसे लेकर पक्का रोडमैप नहीं मिला है, ऐसे में इसके काम की शुरुआत नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि जिले में रोजगार के लिए हर साल ग्रामीण क्षेत्र से लोग पलायन कर बड़े शहरों में जाते हैं। गन्ने पर आधारित उद्योग स्थापित होने से इन्हें रोजगार मिलेगा।

पलायन रुके, ज्यादा लोगों को काम मिले
देश में एमएसएमई उद्योग यानी मिनिस्ट्री ऑफ माइक्रो, स्माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेस (लघु, कुटीर व मध्यम उपक्रम मंत्रालय) द्वारा स्माल बिजनेस को सभी स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। केन्द्र और प्रदेश सरकारों दोनों का लक्ष्य है कि देश में अधिक से अधिक संख्या में स्माल बिजनेस शुरू हो। जो पहले से चल रहे हो, उनका विस्तार किया जाए। इसका उद्देश्य नौकरी से अधिक स्वरोजगार को बढ़ावा देना है, ताकि लोगों को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मिल सके।

स्पेशल प्रोडक्ट से जिले की पहचान बनाएंगे
जिले के स्तर पर हो रहे कारोबार को अधिक महत्व और पहचान नहीं मिल पाती, इसी को खत्म करने के लिए उत्तर प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना शुरू हो गई है। वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट स्कीम से राज्य के छोटे से छोटे गांव का नाम प्रदेश व देश में प्रसिद्ध होगा। राज्य ने ऐसी व्यवस्था की है, जिसके द्वारा सभी जिलों का अपना एक प्रोडक्ट होगा, जो उस जिले की पहचान बनेगा। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में कमेटी काम करेगी।

1979 में जापान ने किया था यह प्रयोग

  • वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट की योजना को पहली बार जापान के ओइटा के गवर्नर मोरिहिको हिरामात्सु ने 1979 में शुरू किया था।
  • 2001-2006 में बीच थाइलैंड के पीएम थैक्सिन सुआमात्रा ने योजना को वन तैम्बोन वन प्रोडक्ट के तौर पर शुरुआत की थी।
  • इसके अलावा फिलीपीन्स, मलेशिया, चीन आदि देशों में भी इस योजना को लागू किया जा चुका है।
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