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1200 करोड़ रु. की फसल खड़ी:कोरोनाकाल में बाजार को ताकत देने के लिए जिले के किसानों की मेहनत रंग ला रही

कवर्धाएक महीने पहले
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  • धान का रकबा 1.21 लाख हे. व गन्ना 18 हजार हे. में लगाए हैं

पिछले 8 महीने से जारी कोरोना से जुड़ी समस्या, लॉकडाउन और इससे बाजार पर प्रतिकूल असर के बीच अब अच्छी खबर आई है। कृषि अर्थव्यवस्था पर टिके बाजार को ताकत देने के लिए किसानों की मेहनत रंग ला रही है। विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक कबीरधाम जिले में 1200 करोड़ रुपए की फसल खड़ी है, जो अच्छी स्थिति में हैं। कृषि वैज्ञानिक इस बार धान, गन्ना समेत उद्यानिकी फसलों की अच्छी आवक के संकेत दे चुके हैं। ऐसे में आने वाले समय में बाजार को फिर से मजबूत हो जाने के अच्छे आसार नजर आ रहे हैं। प्रशासन ने फसल मूल्यांकन का काम पूरा कर रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक इस बार बीते वर्ष की तुलना में धान व गन्ना का रकबा बढ़ा है। धान का रकबा इस वर्ष 1.21 लाख हेक्टेयर तो गन्ना का रकबा 18491 हेक्टेयर है। उद्यानिकी फसल का रकबा 8 हजार हेक्टेयर के आसपास है। इन तीन फसलों से आने वाले समय में करीब 1200 करोड़ रुपए आने के अनुमान कृषि अर्थशास्त्रियों को है। ऐसे में यह कोरोनाकाल में हुए लॉकडाउन में आर्थिक सुधार को लेकर संजीवनी बूटी का काम करेंगे। बीते साल की तुलना में धान का 282 व गन्ना का रकबा 1487 हेक्टेयर बढ़ा है।

धान, गन्ना, सब्जी उत्पादक किसानों की जेब में आएगी रकम, यही पहुंचेगा बाजार
धान पर 750 करोड़ का दांव:
जिले में धान की फसल 121120 हेक्टेयर में है। एक हेक्टेयर में औसतन 35 क्विंटल धान उत्पादन के हिसाब से देखें तो पूरे जिले में इस वर्ष 42 लाख क्विंटल से भी ज्यादा उत्पादन के अनुमान है। बीते वर्ष शासन ने जिले में 29 लाख क्विंटल धान खरीदी की थी। इस वर्ष धान खरीदी का लक्ष्य 30 लाख क्विंटल तक जाएगा। इस स्थिति में 2500 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से करीब 750 कराेड़ किसानों की जेब में आएंगे और किसानों के जरिए ये रुपए बाजार तक पहुंचेंगे।

गन्ने पर 350 करोड़ रुपए का दाव: गन्ने का रकबा जिले में बढ़कर 18491 हेक्टेयर पहुंच गया है, जो बीते वर्ष की तुलना में 1487 हेक्टेयर ज्यादा है। एक हेक्टेयर में औसतन 500 क्विंटल गन्ने का उत्पादन होता है। कारखाने में गन्ने की कीमत बोनस मिलाकर 350 रुपए प्रति क्विंटल है। गुड़ फैक्ट्रियों में भी ें इन्हें बेचा जाता है। ऐसे में करीब 350 करोड़ रुपए के गन्ना बिकने के अनुमान हैं। भोरमदेव शक्कर कारखाना के एमडी भूपेन्द्र ठाकुर बताते हैं कि बीते वर्ष करीब 150 करोड़ की गन्ना खरीदी हुई थी।

उद्यानिकी में नुकसान के बाद भी 100 करोड़ की फसल: उद्यानिकी विभाग के सहायक संचालक आरएन पांडेय बताते हैं कि इस वर्ष पूरे जिले के करीब आठ हजार हेक्टेयर में उद्यानिकी से संबंधित करीब 19 से अधिक फसल लगे हैं। जुलाई से अब तक लगातार बारिश होने से फसलों को नुकसान हुआ है। नुकसान का आंकलन किया जा रहा। फिर भी इस 100 करोड़ रुपए की फसल सही सलामत है। जो फसल आएगी, वह कवर्धा में ही खपत हो जाएगी, ऐसे में ज्यादा दिक्कत नहीं है। अन्य वर्षों की अपेक्षा इस बार फसल बेहतर होने की संभावना है।

उद्यानिकी को छोड़ किसी भी फसल को नुकसान नहीं
कृषि कॉलेज व अनुसंधान केन्द्र कवर्धा के डीन डॉ. आरके द्विवेदी के मुताबिक शुरुआती दिनों में बारिश नहीं होने के कारण नुकसान दिखाई दे रहा था। लेकिन बाद में अच्छी बारिश के कारण नुकसान की संभावना न के बराबर है। हाल में हुई बारिश से उद्यानिकी फसल को नुकसान हुआ है। धान व गन्ना दोनों फसल का बंपर उत्पादन होगा।

प्रवासी श्रमिक किसानी करने लगे, बढ़ा रकबा
कृषि अर्थशास्त्र विभाग कृ़षि विवि रायपुर के प्रोफेसर डॉ. वीके चौधरी ने बताया कि कबीरधाम की अर्थव्यवस्था कृषि पर ही निर्भर है। 1200 करोड़ की फसल हुई तो आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। रकबा भी बढ़ा है तो वह शुरुआती दिनों में लॉकडाउन के कारण बढ़ा है। प्रवासी मजदूर गांव लौटे व किसानी करने लगे, इसलिए रकबा बढ़ गया।

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