पैसे मिलने की आस:ज्यादातर चिटफंड कंपनियों की भूमि जिले में नहीं, इस कारण कुर्की करने में परेशानी,  निवेशकों ने 60.72 करोड़ रुपए का क्लेम किया

कवर्धा8 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
चिटफंड संबंधित कंपनियों की सूची तैयार की जा रही है। - Dainik Bhaskar
चिटफंड संबंधित कंपनियों की सूची तैयार की जा रही है।

जिले में चिटफंड कंपनियों में डूबे पैसे मिलने की आस में 30 हजार 527 से ज्यादा आवेदन जमा किए गए हैं। वर्तमान में ये सभी आवेदन तहसील दफ्तर में रखे गए हैं। इन लोगों ने करीब 60 करोड़ 72 लाख 61 हजार 785 रुपए से भी ज्यादा का क्लेम किया है। लेकिन इन्हें राशि मिलने की उम्मीद कम ही दिखाई दे रहीं है।

दरअसल आवेदन लेने के बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच कराई गई। ज्यादातर कंपनियों की भूमि कबीरधाम जिले में नहीं है। ऐसे में जिला स्तर पर कुर्की की कार्रवाई हो पाना अब संभव नहीं है। इसके अलावा कई कंपनियां तो दूसरे प्रदेश की है। जिले में ऐसे कई आवेदन आए हैं। जानकारी के अनुसार जिले के बॉर्डर क्षेत्र जंगल रेंगाखार व चिल्फीघाटी में लोगों ने एमपी के बालाघाट व मंडला जिले के चिटफंड कंपनियों के पास राशि जमा कराई है। दूसरे राज्य होने के कारण कार्रवाई कर पाना मुश्किल है। क्योंकि दूसरे प्रदेश में कार्रवाई को लेकर वहां का नियम लागू होगा। साथ ही राज्य सरकार को दूसरे प्रदेश के सरकार से कार्रवाई करने अनुमति की जरूरत होगी। नियमों के फेर में कार्रवाई में देरी होना तय है। इस कारण निवेशकों को अपने पैसे लेने इंतजार करना पड़ेगा।

ग्रामीण क्षेत्र में चालीस करोड़ रुपए की ठगी
चिटफंड कंपनियों में ठगी का शिकार ग्रामीण क्षेत्र के लोग ज्यादा हुए हैं। कलेक्टोरेट से मिली जानकारी अनुसार जिले के बोड़ला, पंडरिया, सहसपुर लोहारा क्षेत्र में करीब 40 करोड़ रुपए की ठगी हुई है। इसी प्रकार कवर्धा तहसील में 20 करोड़ रुपए की ठगी हुई है। ज्यादातर आवेदन ऐसे हैं कि संबंधित चिटफंड कंपनियों द्वारा एक-दो वर्ष में जमा राशि डबल करने का दावा किया गया। इसके बाद राशि देने के समय कंपनी फरार हो गई। अब राशि फिर से मिलने की उम्मीद ने लोगों ने आवेदन किया है।

निवेशकों से मिले इन आवेदनों की ऑनलाइन एंट्री की गई है।
निवेशकों से मिले इन आवेदनों की ऑनलाइन एंट्री की गई है।

पुलिस व प्रशासन के दफ्तर में चल रही प्रक्रिया
लोगों को राशि वापस दिलाए जाने काे लेकर वर्तमान में केवल पुलिस व प्रशासन के बीच फाइल एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर में भेजी जा रही है। बताया जा रहा है कि आवेदन की जांच के बाद एफआईआर की जाएगी। इसे लेकर पुलिस द्वारा जांच की जाएगी। वहीं भूमि कुर्की की कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा किया जाना है। दोनों विभाग भी केवल जांच तक ही सीमित है। इधर आवेदन जमा करने के बाद निवेशक तहसील कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं। निवेशक जयकिशन देवांगन ने बताया कि तहसील कार्यालय में आवेदन जमा किए थे। तीन माह से ज्यादा हो चुके है। दूसरे जिले में कार्रवाई शुरू हो गई है। कई लोगों को रुपए भी मिल गए हैं। कबीरधाम जिले में अभी तक राशि वापस दिलाने ध्यान नहीं दे रहे हैं।

डायरेक्टर पकड़ से दूर, एजेंटों से पूछताछ
जिले में रकम डबल के झांसे में आए स्थानीय युवा ही इन कंपनियों के एजेंट बन गए। फिर ये और निवेशकों का पैसा जमा कराए। इस बीच किसी ने शिकायत नहीं की, तो पुलिस ने भी ध्यान नहीं दिया। जब मैच्योरिटी के बाद पैसा दोगुना नहीं मिला, तो 2015 में शिकायतें आने लगी। जब तक पुलिस कार्रवाई करती, कंपनी के डायरेक्टर फरार हो चुके थे। पीएसीएल लि. व रोजवेली ग्रुप समेत 3 चिटफंड कंपनियों पर जिले के थानों में 420 का जुर्म दर्ज हुआ है। 2014,2015 में पुलिस ने शहर के कई चिटफंड कंपनी दफ्तर में छापा भी मारा था। अब मामला कोर्ट में चल रहा है।

आवेदन की जांच कर रहे हैं- अपर कलेक्टर
अपर कलेक्टर बीएस उइके ने बताया कि सभी आवेदन का जांच कर रहे है। ज्यादातर कंपनी की भूमि जिले में नहीं है। ऐसे में दूसरे जिले में भूमि का पता लगवाएंगे। कुछ मामले दूसरे प्रदेश के भी है। इससे राज्य सरकार को अवगत कराएंगे। अभी नए आवेदन पर एफआईआर दर्ज नहीं किए हैं।

3 कंपनियों के खिलाफ थानों में है अपराध दर्ज
चिटफंड के निवेशकों द्वारा वर्ष 2016 में प्रदर्शन किया गया था। उस दौर में जिले में करीब 10 हजार से ज्यादा लोगों से 7 करोड़ रुपए की ठगी की है। ये कंपनियां उन लोगों की जमा रकम बटोरकर फरार हो गई है, जिनमें से कई ने अपनी बेटी की शादी और बुजुर्ग माता-पिता के इलाज के लिए पैसा जमा कराया था। इसे लेकर निवेशकों ने प्रदर्शन किया था। निवेशकों के मानें तो पीएसीएल लिमिटेड और रोजवेली ग्रुप समेत 3 कंपनियों के खिलाफ विभिन्न पुलिस थानों में 420 का जुर्म दर्ज है। ये सभी कंपनियां अपना कारोबार समेटकर भाग गई है। अभी भी इन दोनों कंपनी में ठगी के शिकार हुए लोग राशि वापसी के उम्मीद में आवेदन किए हैं।

खबरें और भी हैं...