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मौसम का झटका:10 दिन में 290 बार ट्रिपिंग से 97 घंटे बिजली गुल, तेज हवा चलने और बारिश होने पर बंद हो जाती है सप्लाई

कवर्धा13 दिन पहले
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  • कंपनी के अफसर कह रहे बिना रुकावट के 24 घंटे बिजली की सप्लाई जारी, इधर सच्चाई ऐसी

गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की समस्या भी बढ़ती जा रही है। इससे लोग परेशान हैं। कंपनी के अफसरों का दावा है कि जिले में बिना रुकावट 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि 196 शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के फीडरों में बीते 10 दिन में 290 बार ट्रिपिंग हो चुकी है।

एक फीडर में एक बार ट्रिपिंग सुधारने में 15 से 20 मिनट लगते हैं। यानी औसतन 20 मिनट के हिसाब से 10 दिन में हुई ट्रिपिंग को सही करने में करीब 5800 मिनट लगे होंगे। इसके कारण 97 घंटे बिजली बंद रहने से लोगों का परेशान होना स्वभाविक है। शहरी क्षेत्र में तो फिर भी फॉल्ट जल्दी सुधार लिया जाता है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में एक बार बिजली ट्रिपिंग हुई, तो सुधारने में एक घंटे तक लग जाते हैं। अगर रात के वक्त लाइनों में फाल्ट आ गया, तो सुधार नहीं होता। रातभर सप्लाई बंद रहने से परेशानी होती है। उल्लेखनीय है कि मेंटेनेंस के नाम पर हर साल विभाग द्वारा बड़ी राशि खर्च की जाती है फिर भी समस्या बनी रहती है।

सोमवार को पूरी रात बंद रही बिजली, मंगलवार को 9 बार ट्रिपिंग
कवर्धा संभाग के राजानवागांव सब-स्टेशन की बात करें, तो यहां से करीब 20 गांवों में बिजली सप्लाई होती है। सब-स्टेशन से बिजली आपूर्ति सिस्टम गड़बड़ाया हुआ है। दिन में 10 से अधिक बार बिजली बंद होती है। इसकी वजह से लोग परेशान होते रहे। सोमवार रात करीब ढाई बजे बिजली बंद हुई, जो मंगलवार सुबह 6 बजे आई। फिर दिन में भी 9 से अधिक बार ट्रिपिंग हुई। लगभग यही स्थिति बोड़ला और पोंडी सब- स्टेशन का भी रहा। बिजली कंपनी के ईई एएल उइके का कहना है कि लाइनों में फॉल्ट आने पर बिजली ट्रिप होती है। हालांकि, यह ज्यादा देर के लिए नहीं रहता।

ये तीन बड़े कारण, जिसके चलते हो रही ट्रिपिंग

1. एक ट्रांसफार्मर पर 65% लोड ही सही, यहां 80% भार, इसलिए ब्रेकडाउन: ग्रामीण क्षेत्रों में जो ट्रांसफार्मर लगे हैं, उन पर क्षमता से ज्यादा लोड (भार) है। इस कारण ऐसी समस्या आ रही है। नियमत: एक ट्रांसफार्मर पर 65% तक लोड देना है, लेकिन यहां 80% भार दिया जा रहा है। इसके कारण बिजली ट्रिपिंग बढ़ी है। ट्रांसफार्मर की क्षमता तत्काल बढ़ाने की जरूरत है।

2. बिजली चोरी व लाइनों में फॉल्ट से लाइन लॉस: बिजली चोरी और लाइनों में आने वाले फॉल्ट के कारण लाइन लॉस बढ़ गया है। कवर्धा डिवीजन की बात करें, तो यहां 2 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। एक साल पहले तक 22 प्रतिशत तक लाइन लॉस होता था, जो अब 3 प्रतिशत बढ़कर 25 प्रतिशत हो गया है। जबकि यह आंकड़ा अधिकतम 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

3. घरेलू कनेक्शन के फीडर से कृषि पंपों की लाइन अलग नहीं की: बिजली ट्रिपिंग व लो-वोल्टेज के लिए बिजली कंपनी के अफसर ही दोषी हैं क्योंकि घरेलू कनेक्शन के लिए लगे फीडर में कृषि पंप चलने से ये दिक्कत हो रही है। हाई वोल्टेज डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (एचवीडीएस) योजना में जिले के 32 फीडरों से कृषि पंप की लाइन को अलग करना था। वर्ष 2011 में ठेका हुआ। 32 में से सिर्फ 14 फीडरों को ही अलग किया।

मंगलवार को तेज हवा के साथ एक घंटे हुई बारिश बिजली सप्लाई बंद रहने से लोग परेशान, राहत नहीं
मंगलवार दोपहर 2 बजे तेज हवा के साथ करीब 1 घंटे तक बारिश हुई, जिसके चलते बिजली सप्लाई बंद रही। बारिश से जहां गर्मी से लोगाें ने राहत महसूस की, लेकिन बिजली बंद रहने से परेशान भी हुए। ग्रामीण क्षेत्र में मंगलवार को दिनभर में 9 बार बिजली बंद से लोग परेशान रहे। रायपुर के मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा ने बताया कि एक द्रोणिका विदर्भ से केरल तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है। दूसरा द्रोणिका पश्चिम उत्तर प्रदेश से असम तक पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के ऊपर 0.9 किलोमीटर ऊंचाई पर स्थित है। इसके असर से 5 मई को भी एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा अथवा गरज चमक के साथ छींटे पड़ने की संभावना है। प्रदेश में एक-दो स्थानों पर बिजली गिरने और अंधड़ चलने की संभावना है। प्रदेश में अधिकतम तापमान में मामूली वृद्धि होगी।

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