चार हिस्सों में बनेगा जंगल सफारी:पहले हिस्से में शाकाहारी, फिर टाइगर, भालू व लॉयन सफारी करेंगे डेवलप

कवर्धा4 दिन पहले
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रामचुवा-हरमो क्षेत्र में डेवलप होगा जंगल सफारी। इससे यहां पर पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। - Dainik Bhaskar
रामचुवा-हरमो क्षेत्र में डेवलप होगा जंगल सफारी। इससे यहां पर पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी।

नवा रायपुर के बाद छग में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा जंगल सफारी कबीरधाम जिले में विकसित किया जाएगा। यह जंगल सफारी करीब 200 हेक्टेयर क्षेत्रफल का होगा। वन्यप्राणियों की जीवनशैली के हिसाब से जंगल सफारी को 4 अलग- अलग हिस्सों में डेवलप करेंगे। इसे लेकर वन विभाग ने फाइनल प्रोजेक्टर रिपोर्ट तैयार कर ली है। यही नहीं, इसे छग शासन के वन मंत्रालय को भेज दी गई है।

वहां से इस प्रस्ताव को मंजूरी के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया को भेजा जाएगा। फाइनल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के बारे में डीएफओ चूड़ामणि सिंह बताते हैं कि कवर्धा में बनने वाला जंगल सफारी करीब 200 हेक्टेयर में विकसित होगा। वन्यप्राणियों की जीवनशैली के हिसाब से जंगल सफाई को 4 हिस्सों में विकसित किया जाएगा। पहले हिस्से में शाकाहारी सफारी होगा, जिसमें शाकाहारी वन्यजीवों काे रखा जाएगा। दूसरे हिस्से में टाइगर सफारी, तीसरे हिस्से में बीयर (भालू) सफारी और चौथे हिस्से में लॉयन सफारी डेवलप करेंगे।

इसमें शुरुआती 2 साल में खर्च होंगे 75 करोड़
जंगल सफारी विकसित करने में करीब 100 करोड़ रुपए लागत का अनुमान है। डीएफआे चूड़ामणि सिंह के मुताबिक शुरुआती 2 साल में 75 करोड़ रुपए खर्च कर सफारी डेवलप करेंगे। पहले साल 50 करोड़ रुपए और दूसरे साल में 25 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। जंगल सफारी में कितनी बिजली होगी? अभी कितना पानी उपलब्ध है डिटेल रिपोर्ट भेजे हैं।

अलग-अलग स्थानों से यहां लाएंगे 99 वन्यजीव
जंगल सफारी डेवलप होने के बाद यहां दीगर स्थानों से वन्यजीवों को लाएंगे। 99 वन्यजीवों को यहां रखने का प्रस्ताव है। इनमें हिरण, कोटरी, गौर, नीलगाय, शेर, भालू व अन्य वन्यप्राणी हैं। प्रबंधन क्षेत्र में शाकाहारी व मांसाहारी वन्यप्राणियों के भोजन व पानी की व्यवस्था अलग रहेगी।

पक्षियों के लिए भी प्लानिंग, छग में बर्ड सफारी नहीं है
जंगल सफारी के साथ ही पक्षियों के लिए भी प्लानिंग बनाई जा रही है। क्योंकि पूरे छग में बर्ड सफारी नहीं है। फॉरेस्ट विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक भोरमदेव अभयारण्य में पक्षियों की 102 तरह की प्रजातियां मौजूद है। इसमें 7 तरह के कटफोड़वा, 6 पड़की और 3 प्रकार के तीतर भी हैं। साथ ही बजवना, लावा, बटेर, बया, भुभुजंग, बुलबुल, चकवा, चाहा, चलोत्तरा, चील, छिपक, गाय बगूला, गंगा मैना, गौरेया, घुघु, गिद्ध, गिरीया, हरियल, हुड़हुड़ व अन्य पक्षी हैं।

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