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आत्मनिर्भर किसान:4 गाय से शुरू किया था डेयरी व्यवसाय, इस साल मंदी में भी कमाए 3 लाख रुपए

कुरूद8 महीने पहले
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गणेश साहू | लाॅकडाउन में हर तरफ मंदी है। लगभग सभी व्यवसाय ठप हैं लेकिन बंजारी भाठागांव के रामलाल साहू इस मंदी में भी राेज तीन हजार रुपए कमा रहे हैं। देश में ऐतिहासिक मंदी होने के बावजूद इस साल गाय बछड़े बेचकर अब तक करीब 3 लाख रुपए कमाए हैं। इनका डेयरी व्यवसाय लगातार चल रहा है। इन्होंने अपने काम की शुरुआात करीब 26 साल में चार गायाें के साथ की थी। अभी इनके पास करीब 30 दुधारू गाय भैंस हैं। दूध उत्पादन के साथ ही सब्जी की खेती भी कर रहे हैं। ग्राम बंजारी भाठागांव के निवासी रामलाल साहू ने बताया कि 26 साल की उम्र में चार गायाें के साथ गाेपालन शुरू किया था। करीब 40 साल हाे गए हैं। अब करीब 80 गाय, बछड़ा, भैंस हैं। गाे पालन के साथ साथ सब्जी खेती भी हाे रही है। इससे अच्छी आमदनी हाे रही है।
उन्हाेंने बताया कि शुरूआत में 4-5 गायों काे रखा। निकलने वाले दूध से खोवा बनाकर बाजार में बेचा। इसके बाद धीरे-धीरे गाय बढ़ती गईं। व्यवसाय भी बढ़ता गया। हरा चारा की भी खेती कर रहे है। यह डेयरी में रहने वाले पशुुओं खिलाया जाता है। पशुओं की खाना दाना की औसतन लागत 3 हजार रुपए राेज की है।राेज 60-65 लीटर दूध मिल रहा है।

डेयरी में कई प्रजाति
साहीवाल, गिर, थारपारकर, एचएफ, अंगोल, रेड सिंघी नस्ल की गाय हैं। इनकी सफाई दुहाई, चारा व्यवस्था के लिए रोज 2 मजदूर काम करते है। दूध रायपुर में बेच रहे थे। फिलहाल स्थानीय स्तर पर बेच रहे हैं।

3 लाख के मवेशी बेचे
रामलाल साहू ने भास्कर को बताया कि डेयरी में दूध से होने वाली आय व खर्च लगभग बराबर है। इसकी मुख्य आमदनी गाय, बछड़ा बेचने पर होती है। इस साल 30 नग गाय बछड़ा बेचकर करीब 3 लाख की आमदनी हुई है।

मिल चुके हैं सम्मान
2004 में हार्टिकल्चर सोसायटी से उन्नत कृषक, 2015-16 में उद्यानिकी विभाग से उन्नत कृषक पुरस्कार मिल चुका है। पशु मेला उत्सव 2016-17 में पशुधन विभाग द्वारा गिर, मुर्रा नस्ल के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित हो चुके हैं।

किसानों को करना चाहिए गो-पालन
रामलाल साहू ने किसानों से कहा कि सभी घरों में 2-4 गाय का पालन करना चाहिए। शास्त्रों के बताए अनुसार गाय की सेवा भी हो जाती है। आमदनी भी होती रही है। गोबर व गोमूत्र का उपयोग खेती में करके उसे बेहतर किया जा सकता है। जीवन सुखमय और उत्साह से भरा रहता है।​​​​​​​

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