पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

शेष पंचायतों में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है:359 किसानों ने किया आवेदन पर लक्ष्य केवल 200 पंप लगाने का

महासमुंद6 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • बस्तर और सरगुजा में लक्ष्य बढ़ने से इस बार जिले को मिला है कम लक्ष्य

सौर सुजला योजना के तहत पंप लगाने के लिए पिछले चार महीने से इंतजार कर रहे 359 किसानों को इस बार इस योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। क्योंकि साल 2021-22 में सौर सुजला योजना के तहत लक्ष्य कम मिला है। लक्ष्य कम होने के कारण विभाग इन आवेदकों को योजना का लाभ नहीं दे पाएगा, क्योंकि इस साल मिले लक्ष्य का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण हुए गोठानों को दिया जाएगा।

गोठानों में इस साल करीब 200 पंप स्थापित किए जाएंगे। बताया जा रहा है कि इस साल सरगुजा व बस्तर क्षेत्र में लक्ष्य बढ़ने के कारण जिले में लक्ष्य कम कर दिया है। ज्ञात हो कि विभाग को हर साल 700 से 800 पंप स्थापित करने का लक्ष्य मिलता था, लेकिन इस बार मात्र 200 का लक्ष्य दिया गया है। इस संबंध में क्रेडा के इंजीनियर एनके गायकवाड ने बताया कि शासन ने इस वर्ष सौर सुजला योजना के तहत 200 सोलर पंप लगाने का लक्ष्य दिया है। यह भी केवल गौठानों के लिए है, जो पूर्व निर्धारित लक्ष्य में कटौती के बाद मिला है। वर्तमान में जिले में करीब साढ़े 359 आवेदन योजना के तहत लंबित है। इस बार बस्तर व सरगुजा में लक्ष्य को बढ़ा दिया गया है। यदि अन्य जिलों द्वारा लक्ष्य पूरा नहीं हो तो जिले का लक्ष्य बढ़ सकता है।

गोठान पर विशेष जोर, 98 का प्रस्ताव विभाग के पास पहुंचा
शासन ने इस बार जिले में 200 सोलर पंप लगाने का लक्ष्य विभाग को दिया है जो सभी जिले के गोठानों में लगाए जाएंगे। शासन नरुवा, गरुवा, घुरुवा और बारी योजना के तहत गोठानों और चारागाहों के निर्माण के साथ वहां रहने वाले पशुओं के पेयजल की सुविधा पर जोर दे रहा है। जिले में गोठानों की संख्या भी बढ़ती जा रही है जिसमें मूलभूत सुविधाओं को पूरा करने का कार्य चल रहा है। इंजीनियर ने बताया कि 551 गोठानों में पंप स्थापित किया जाना है। 129 गोठानों में पंप स्थापित कर लिया गया है। इस साल 98 गाेठान में पंप लगाने के लिए प्रस्ताव पंचायत से आ गया है। शेष पंचायतों में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

किसानों को अभी करना होगा इंतजार
इधर, विभाग का कहना है कि प्रदेश के अन्य जिलों को दिए गए लक्ष्य पूरा नहीं होने पर शासन इसे जिले को हस्तांरित कर सकता है, लेकिन यह आगामी अक्टूबर माह के बाद ही पता चलेगा। इस साल पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसानों के लिए यह योजना कारगर साबित हो रही है। ज्ञात हो कि शासन ने किसानों की आमदनी बढ़ाने और बिजली पर होने वाले खर्च से राहत देने के लिए यह योजना शुरु की है। जिससे किसानों को फायदा भी हो रहा है और खेती में सिंचाई की चिंता से राहत भी मिल रही है।

खबरें और भी हैं...