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त्योहार माहौल भी बेअसर:35 सीटर बस में 4-5 सवारी, संचालकों रोज उठाना पड़ रहा 2200 तक घाटा

महासमुंद13 दिन पहले
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  • नवरात्र होने के बावजूद बसों में यात्री करने वाले सवारियों की संख्या लॉकडाउन के समय की तरह ही है, बसें खाली ही जा रही हैं

नवरात्रि में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी की आस लगाए बस मालिकों (संचालकों) को फिर से मायूसी हाथ लगी है। नवरात्र होने के बावजूद बसों में यात्री करने वाले सवारियों की संख्या लॉकडाउन की तरह ही है। महासमुंद से रायपुर की ओर चलने वाली 35 सीटर बसों में अब भी 4-5 यात्री ही हर दिन सफर कर रहे हैं। एक बस दिन भर में चार फेरा लगाती है। इस पर संचालकों को 4200 रुपए खर्च होते हैं। वहीं आमदनी सिर्फ 2000-3000 हजार रुपए तक होती है। इस तरह एक बस पर 1200 से 2200 रुपए का घाटा हो रहा है। वर्तमान में महासमुंद से 12 बसें रायपुर के लिए चलती है। लॉकडाउन ने छोटे बस संचालकों की कमर पहले ही तोड़ कर रख दी है। बसों के बंद होने से काफी हानि हुई है। सरकार से भी अपेक्षित मदद नहीं मिली। अब बस संचालकों में उतनी हिम्मत नहीं बची कि ये घाटा सहकर सभी बसों का परिवहण कर सके। लिहाजा आमदनी नहीं होने के कारण बस संचालकों ने फिलहाल 7 बसें चलाने का निर्णय लिया है। 7 बसें चलने के बावजूद बसें घंटों सवारी के इंतजार में खड़ी रहती है।

बसों को सैनिटाइज कराने का काम संचालकों का
परिवहन अधिकारी मोहन साहू ने कहा कि बसों को सैनिटाइज करने का काम संचालकों और मालिकों का है। प्रशासन इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। न ही ऊपर विभाग की तरफ से ऐसा कोई आदेश आया है।

खल्लारी-चंडी माता का द्वार भी बंद, तभी भीड़ नहीं
खल्लारी माता मंदिर और चंडी माता मंदिर में नवरात्रि के दिनों में हर साल लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंचते थे। कोरोना काल के कारण प्रशासन ने इस बार माता का द्वार भक्तों के लिए बंद कर दिया है। कोई भी भक्त मंदिर में पूजा नहीं कर सकता। लिहाजा बसों को यात्री नहीं मिल पा रहे हैं। इससे पहले नवरात्रि में रायपुर, दुर्ग, ओडिशा के कई जिलों, कवर्धा समेत अन्य जिलों से हर साल लाखों की संख्या में माता के भक्त दर्शन करने पहुंचते थे।

बस संचालक बोले- इस घाटे में कैसे चलाएं बस
बस संचालक धीरज सरफराज ने कहा कि एक दिन में एक बस चार फेरा लगाती है। इस पर 4200 रुपए खर्च होते हैं। वहीं आमदनी अलग-अलग बस के हिसाब से आमदनी एक दिन में सिर्फ 2000-3000 रुपए होती है। लॉकडाउन ने पहले ही हमारी कमर तोड़ कर रख दी है। अब भी वही हालात है। बस संचालन में बहुत दिक्कत हो रही हैं। ऊपर से बसों को भी खुद के खर्चे पर सैनिटाइज करा रहे हैं। प्रशासन से कोई मदद नहीं मिल रही है।

दो महीने से बसों को सैनिटाइज भी नहीं किया
अनलॉक-4.0 में प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिलों में बस परिवहन की सुविधा शुरू की गई थी। उसी समय परिवहन विभाग ने जिले से संचालित होने वाली बसों को सैनिटाइज कराया था। दो महीने से किसी भी बस को परिवहन विभाग सैनिटाइज नहीं करा रहा है। यात्रियों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। प्रशासन या परिवहन विभाग को बसों को हर दिन सैनिटाइज करवाना है। वहीं विभाग में बैठे नुमाइनदों को इससे कोई लेना देना नहीं।

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