योजना फेल:15 अगस्त को कलेक्टोरेट में शुरू हुआ गढ़कलेवा अब बंद

महासमुंद9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • रायपुर की तर्ज पर जिलेवासियों को छत्तीसगढ़ी व्यंजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने गढ़कलेवा की शुरूआत की थी

रायपुर की तर्ज पर महासमुंद जिलेवासियों को छत्तीसगढ़ी व्यंजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने गढ़कलेवा की शुरूआत की थी, लेकिन यह छह महीने में ही बंद हो गया। 15 अगस्त 2020 को जिला मुख्यालय के कलेक्टोरेट परिसर में इसकी शुरुआत की गई थी। साथ ही इसके संचालन का जिम्मा दिव्यांग महिला समूह को दिया गया था, लेकिन आमदनी तो दूर मजदूरी नहीं निकल पाने के कारण मजबूरन इसे पिछले महीने ही बंद करना पड़ा। वहीं प्रशासन से दिव्यांग महिला समूह को सहायता नहीं मिल पाई। यही वजह है कि गढ़कलेवा का संचालन बंद हो गया। प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप जिले में जिले में 15 अगस्त को गढ़कलेवा का शुभारंभ किया गया था। पिछले साल सरकार ने इसे बजट में शामिल भी किया था। लेकिन उचित देख रेख और प्रशासन की लापरवाही के कारण यह महज छह महीने में बंद हो गया। इसके बंद होने से अब शहरवासियों को छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद नहीं मिल पाएगा। शासन का गढ़कलेवा खोलने का उद्देश्य लोगों को छतीसगढ़ी व्यंजनों के करीब लाना था। सरकार छत्तीसगढ़ी व्यंजनों, लोक कलाओं और भाषा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के कई जिलों में गढ़कलेवा खोले गए हैं।

अपनी गलती छिपाने दिव्यांगों पर थोप रहा विभाग
इधर, विभाग अपनी गलती छिपाने के लिए दिव्यांगाें पर गढ़कलेवा बंद हाेने का कारणा थाेप रहा है। समाज कल्याण विभाग के उप संचालक धर्मेन्द्र साहू का कहना है कि प्रशासन स्तर पर व्यवस्था कर संचालन के लिए दिव्यांग समूह को दिया गया था, लेकिन बाद में उनके द्वारा सही ढंग से प्रचार-प्रसार नहीं किया गया, जिसके कारण गढ़कलेवा बंद हो गया।

प्रचार-प्रसार का अभाव जगह का चिह्नांकन गलत
गढ़कलेवा खोलने के लिए प्रशासन द्वारा गलत स्थान का चिह्नांकन किया गया था। गढ़कलेवा कलेक्टोरेट परिसर के पीछे खोला गया था। यही कारण है कि यहां तक आमजनों की पहुंच नहीं थी। वहीं प्रशासन स्तर पर गढ़कलेवा का प्रसार-प्रसार भी नहीं किया गया।
शहर के लोगों को गढ़कलेवा के बारे में जानकारी ही नहीं थी। जिसके कारण कर्मचारियों को छोड़ बाहर के लोग छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंच नहीं पाते थे।

अधिकारी-कर्मचारियों को होटल पसंद
जिला कार्यालय में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी गढ़कलेवा की बजाए आसपास कार्यालय परिसर स्थित होटलों में चाय नाश्ता करना अधिक पसंद करते थे। यही वजह है कि कार्यालय परिसर में होने वाली बैठकों और अन्य कार्यक्रमों में गढ़कलेवा की जगह बाहर के होटल से नाश्ता मंगाकर अधिकारी-कर्मचारियों को परोसा जाता है। कुछेक अधिकारी-कर्मचारी नियमित रुप से चाय-नास्ता करने आते थे, लेकिन इससे मजदूरी तक नहीं निकल पाती थी। इसलिए मजबूरन दिव्यांग स्व सहायता समूह की महिलाओं को बंद करना पड़ा।

खबरें और भी हैं...