होली की तैयारी:गुलाब, गेंदा और भाजियों से महिलाएं तैयार कर रहीं हर्बल गुलाल

महासमुंद8 महीने पहले
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होली पर्व के मद्देनजर स्व सहायता समूह की महिलाएं इन दिनों कैमिकल युक्त गुलाल को टक्कर देने हर्बल गुलाल के निर्माण में व्यस्त हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत कई स्व सहायता समूह की महिलाएं हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। बताया जा रहा है कि समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे हर्बल गुलाल की खासियत यह है कि इसके लगाने से चेहरे पर कोई साइड इफैक्ट नहीं होता है। इधर, हर्बल गुलाल के निर्माण की खबर शहर सहित ग्रामीण अंचलों में फैल गई है।

समूह को लोकल मार्केट से हर्बल गुलाल की डिमांड आ रही है। करीब हजार किलो का डिमांड गुलाल ग्राम मालीडीह की महिला समूह को मिल गया है। इसी प्रकार अन्य स्व सहायता समूह की महिलाओं को भी डिमांड आ रही है। उसके आधार पर समूह की महिलाए निर्माण कर रही है। निदान संस्था के सुरेश शुक्ला ने बताया कि सभी जिलों में महिला स्व सहायता समूह के द्वारा इस बार हर्बल गुलाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी वजह से इसकी डिमांड केवल जिला स्तर पर ही है।

साग भाजी व टेसू के फूल से भी बना रहे हर्बल गुलाल
महासमुंद विकासखण्ड के ग्राम पंचायत बिरकोनी के माया महिला स्व सहायता समूह द्वारा इस वर्ष की होली के लिए जड़ी, बुटी व फूलों से हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रही है। संस्था से जुड़ी 10 ग्रामीण महिलाओं के द्वारा होली के लिए हर्बल गुलाल बना रही हैं।

समूह की डैडी इन्द्राणी कश्यप ने बताया कि केवल एक दिवसीय प्रशिक्षण पाकर महिलाओं के द्वारा प्राकृतिक साग-भाजी, टेसू फूल आदि से हाथों से हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। उन्होंने दावा किया है कि इस गुलाल का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। माया समूह की महिलाओं ने बताया कि अभी हाल फिलहाल पीला, संतरा, लाल एवं चंदन रंग के गुलाल का निर्माण किया जा रहा है।

आटा, अरारोट सहित दूसरे सामानों का कर रहे उपयोग
तुमगांव मालीडीह ग्रामीण आजीविका व्यापार केंद्र में कृषि विज्ञान केंद्र महासमुंद द्वारा स्वैच्छिक संगठन निदान से जुड़ी निर्मला, पूर्णिमा, संतोषी, चांदनी, गोपिका स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय उपलब्ध हर्बल उत्पाद का गुलाल बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है।

यहां की महिलाएं चावल आटा, अरारोट, पालक भाजी, गेंदा फूल, गुलाब फूल एवं नीम की पत्ती का उपयोग कर हर्बल गुलाल बना रही हैं। करीब एक हजार किलोग्राम गुलाल निर्माण की डिमांड आई है, जिसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। वर्तमान में कुछ और संस्थाओं ने गुलाल के लिए संपर्क किया है। गुलाल 150 रुपए प्रति किलाे की दर से बेचा जा रहा है।

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