टूटी आस:चिटफंड के लिए किसी ने खेत बेचा तो किसी ने झोंक दी जिंदगीभर की कमाई

महासमुंद/ बागबाहरा/ पिथौरा2 महीने पहले
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महासमुंद। पिथौरा तहसील कार्यालय में आवेदन जमा करने आए निवेशक। - Dainik Bhaskar
महासमुंद। पिथौरा तहसील कार्यालय में आवेदन जमा करने आए निवेशक।
  • एक किसान ने ली थी 14 लाख की 86 पॉलिसी, अब पैसे वापसी का इंतजार

विभिन्न चिटफंड कंपनियों में अपनी गाढ़ी कमाई जमा कराने वाले निवेशकों का दर्द बहुत भारी है। किसी ने अपनी जमीन बेचकर चिटफंड कंपनियों के आकर्षक स्कीम के जाल में फंसकर लाखों की पॉलिसी ली, तो किसी ने हर बार फसल को बेचकर पॉलिसी की किस्त जमा की। ये निवेशक सालों से चिटफंड कंपनियों के दिए दर्द को झेल रहे थे। अब सरकार ने निवेशकों को चिटफंड कंपनियों के पास उनकी जमा राशि को वापस दिलाने के लिए पहल कर रही है, तो निवेशकों को काफी उम्मीदें बंध गई हैं।

निवेशकों का कहना है कि जिस फायदे की आस में हमने पैसे जमा किया है उसका फायदा न सही हमारी मूल राशि ही हमें मिल जाए, तो काफी सहूलियत होगी। गौरतलब है कि जिले में लगभग 2.40 लाख निवेशकों की राशि विभिन्न चिटफंड कंपनियों के पास फंसी है, जिसमें कम राशि से लेकर बड़ी राशियों वाले लोग भी शामिल हैं।

हर बार फसल बेचकर जमा की पॉलिसी की किस्त
पचेड़ा निवासी संतोष कुमार साहू ने परिजनों के नाम पर 6 लाख 78 हजार की विभिन्न स्कीम की पॉलिसी ली है। संतोष कुमार बताते हैं कि मैंने साईं प्रसाद कंपनी में 2009 में पहली पॉलिसी ली थी। इसके बाद लगातार अपनी माता, पिता, भाई व पत्नी के नाम पर अलग-अलग तिथियों में पॉलिसी ली। इन पॉलिसी की मेच्योरिटी डेट 2017-18 में पूरी हो गई है। इसका लाभ लेने के लिए जब हम रायपुर स्थित ऑफिस पहुंचे तो ऑफिस बंद और कर्मचारियों के नंबर भी बंद हो गए।

2 एकड़ जमीन बेचकर परिजनों के नाम पर ली थी पॉलिसी
पिथौरा ब्लॉक के लाखागढ़ निवासी किसान रामलाल साहू ने आरोग्य धनवर्षा डेवलपर्स एंड एलाइट लिमिटेड में अपनी 2 एकड़ की जमीन बेचकर 14 लाख 27 हजार का विभिन्न स्कीम के तहत परिजनों के नाम पर कुल 86 पॉलिसी खरीदा। पॉलिसी 2011 से 2015 तक खरीदा। रामलाल साहू बताते हैं कि अपने परिचितों के माध्यम से मैं महासमुंद स्थित कंपनी के ऑफिस गया, कंपनी के संचालक मंडल ने लाभ का जाल फैलाया कि मैंने एक पॉलिसी ले ली।

चिटफंड में निवेश किए 9 लाख फंसे
बागबाहरा के ग्राम सम्हर की बुजुर्ग महिला थनवरिन बाई साहू ने अपनी संपत्ति बेचकर अपने व अपने पुत्र के नाम पर चिटफंड कंपनी में 9 लाख रुपए का निवेश किया। थनवरिन बाई कहती हैं कि निवेश के लिए बड़ोदरा की एचवीएन रियलिटी एंड इंटरप्राइजेस इंडिया लिमिटेड के एजेंट्स ने ऐसे लाभ का सपना दिखाया कि हम उसके झांसे में आ गए और संपत्ति के साथ पैसे को भी खो दिया।

अब जमीन बेचकर मिले राशि से पॉलिसी के लिए इतनी बड़ी राशि दे दी कि वर्तमान में हमारी आर्थिक हालत बहुत खराब हो गई है। रकम दोगुना होने के झांसे में आकर मैंने अपने नाम पर रुपए 5 लाख रुपए व अपने पुत्र के नाम पर 4 लाख रुपए की एफडी स्कीम ले ली। इस राशि को 5 मार्च 2013 को जमा किया था, जिसकी निकासी तिथि मार्च 2021 में है। कंपनी पैसे लेने के बाद ऐसे भागे की कुछ पता ही नहीं चला।

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