रमजान का महीना / घरों में पढ़ी अंतिम जुमा की नमाज, मस्जिद में 5 को ही अनुमति

Last Zuma prayers in homes, only 5 allowed in mosque
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Last Zuma prayers in homes, only 5 allowed in mosque

  • मुस्लिम समुदाय के लोग घरों में पढ़ेंगे ईद की नमाज, शांति समिति की बैठक में पुलिस अफसरों ने दी समझाइश

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

महासमुंद. कोरोना वायरस संक्रमण के चलते इस बार ईद उल फितर का पर्व मुस्लिम समुदाय के लोग घरों में मनाएंगे। बरकतों का महीना रमजान शुरू होते ही समुदाय के लोग शासन के आदेशों का पालन करते घरों में नमाज अदा कर रहे हैं। अब रमजान का महीना समाप्त होने वाला है। शुक्रवार को रमजान महीने का अंतिम जुमा का नमाज भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने घर में ही पढ़ी। अब ईद कब मनाई जाएगी, इसकी घोषणा चांद की तस्दीक होने के बाद होगी। इस बार ईद की नमाज भी घरों में पढ़ी जाएगी। मस्जिद में केवल पांच लोग ही नमाज पढ़ेंगे।
जामा मस्जिद के अध्यक्ष एके खैरानी ने बताया कि रमजान के पहले शासन के निर्देश मिलते ही मस्जिदों में नमाज अदा न करने का ऐलान किया था। केवल मस्जिद में रहने वाले इमाम ही पांच वक्त की अजान व जरूरी ऐलान और नमाज अदा करेंगे। बाकी किसी को मस्जिद में नमाज व इफ्तार की अनुमति नहीं दी गई है। अरशी अनवर व एरिश अनवर ने बताया कि रमजान माह के पहले जुमे की नमाज घरों में पढ़ी गई और अंतिम नमाज भी घर में पढ़ी जाएगी। 
समाज के अध्यक्ष ने बताया कि मस्जिद में मुफ्ती पेश इमाम, नायब इमाम, सदर सहित दो अन्य पदाधिकारी ही नमाज पढ़ेंगे। पर्व को लेकर प्रशासन ने भी मुस्लिम समुदाय से अपील करते हुए लॉकडाउन के नियमों का पालन करने कहा है। वहीं पुलिस कंट्रोल रूम में शांति समिति की बैठक भी हुई, जिसमें ईद उल फितर को केंद्र व राज्य शासन से जारी आदेश व निर्देश के अनुरूप ही मनाने एवं अन्य विषयों पर चर्चा हुई। 
कोरोना के चलते उत्साह कम हुआ
कोरोना वायरस के चलते ईद के मौके पर उत्साह कम हो गया है। समाज के लोगों का कहना है कि अब एक दूसरे को मोबाइल से रमजान पर्व की बधाई देंगे। ज्ञात हो कि ईदगाहभाठा में प्रतिवर्ष समुदाय के लोग एकत्रित होकर शांति व अमन की नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे को गले मिलकर पर्व की बधाई देते थे। इस बार लॉकडाउन के चलते कोई रौनक नहीं रहेगा।
सेवईं की डिमांड कम, रेट बढ़ा 
लॉकडाउन ने सभी त्योहारों की रौनक को कम कर दी है। यही वजह है कि इन दिनों सभी पर्व सादगी से मनाए जा रहे हैं। मुस्लिम समाज का प्रमुख पर्व इदुल फितर भी इस बार सादगी से मनेगा। लाॅकडाउन के कारण इस बार डिमांड कम हाेने से अन्य स्थानों से सेवई नहीं मंगाई गई है। इसके चलते रेट ज्यादा है। प्रति किलो 30 से 40 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। फेनी सेवई 200 रुपए प्रति किलो, मशीन वाली सेवई 150 रुपए प्रति किलो, लंबी सेवई 100 रुपए प्रति किलो बिक रही है।

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