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विश्व पोलियो दिवस आज:17 साल पहले ही महासमुंद पोलियोमुक्त हो चुका, तब से नहीं मिला एक भी मरीज

महासमुंदएक महीने पहले
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  • इस साल विश्व पोलियो दिवस की थीम ‘प्रगति की कहानियां: अतीत और वर्तमान’

आज विश्व पोलियो दिवस है। हर साल 24 अक्तूबर को इसे जनजागरुकता के लिए मनाया जाता है। भारत में पोलियो के खिलाफ अभियान की शुरुआत 1995 में हुई थी। 80 के दशक में हर साल करीब 50 हजार से 1 लाख मरीज सामने आ रहे थे और इस अभियान की सफलता के बाद 2012 में यह आंकड़ा घटकर शून्य हो गया। देश में वाइल्ड पोलियो वायरस का आखिरी केस 2011 में रिपोर्ट हुआ था। महासमुंद की बात करें तो हमारा जिला 17 साल पहले ही पोलियो मुक्त हो चुका है। जिले में पोलियो का अंतिम मामला साल 2003 में मिला था। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में उसके बाद से पाेलियो का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इसके बाद भी एहतियात बरतते हुए हर साल बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। जिले में शून्य से 5 साल तक के एक लाख 30 हजार से अधिक बच्चों को पिछले साल पल्स पोलियो की खुराक पिलाई गई थी। कोरोना के कारण इस साल पोलिया दवा पिलाने पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। पोलिया को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन हर साल अगल-अलग थीम रखती है। इस साल विश्व पोलियो दिवस की थीम “प्रगति की कहानियां: अतीत और वर्तमान“है। यह पोलियो उन्मूलन के साथ-साथ प्रक्रिया में शामिल सभी लोगों के प्रयासों को पहचानने के संघर्ष में अब तक हुई प्रगति को स्वीकार करने के लिए चुना गया है।

इस तरह कर सकते हैं पोलियो की रोकथाम
पोलियो के लिए कोई उपचार उपलब्ध नहीं है। इस रोग को केवल टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है। पोलियो टीकाकरण निर्धारित अनुसूची के अनुसार कई बार दिया जा सकता है। यह जीवनभर बच्चे की रक्षा करता हैं। वैक्सीन दो प्रकार के होते हैं, जो कि पोलियो से रक्षा करते हैं-निष्क्रिय पोलियो वायरस वैक्सीन (आईपीवी) एवं जीवित-तनु वैक्सीन मौखिक पोलियो वायरस वैक्सीन (ओपीवी)। मौखिक वैक्सीन को मौखिक रूप से दिया जाता है तथा निष्क्रिय पोलियो वायरस वैक्सीन को रोगी की उम्र के आधार पर हाथ या पैर में लगाया जाता है।

जानिए... विश्व पोलियो दिवस मनाने का उद्देश्य
इस दिवस को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य पोलियो जैसी बीमारी के विषय में लोगों में जागरूकता फैलाना है। पोलियो एक संक्रामक बीमारी है, जो पूरे शरीर को प्रभावित करती है। इस बीमारी का शिकार अधिकांशत: बच्चे होते हैं। पोलियो को ‘पोलियोमाइलाइटिस’ या ‘शिशु अंगघात’ भी कहा जाता है। यह ऐसी बीमारी है, जिससे कई राष्ट्र बुरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। अभी भी विश्व के कई देशों से यह बीमारी जड़ से खत्म नहीं हो पाई है।

ये हैं पोलियो के लक्षण
पोलियो की बीमारी में मरीज़ की स्थिति वायरस की तीव्रता पर निर्भर करती है। अधिकतर स्थितियों में पोलियो के लक्षण ‘फ्लू’ जैसै ही होते हैं, लेकिन इसके कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार होते हैं-

  • पेट में दर्द होना।
  • उल्टियां आना।
  • गले में दर्द।
  • सिर में तेज़ दर्द।
  • तेज़ बुखार।
  • खाना निगलने में कठिनाई होना।
  • जटिल स्थितियों में हृदय की मांस-पेशियों में सूजन आ जाती है।
  • बाहों या पैरों में दर्द या ऐंठन।
  • गर्दन और पीठ में ऐंठन।

1235 बूथ के जरिए बच्चों को पिलाई गई थी दवा: पिछले साल जिले में बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाने शहर सहित ग्रामीण अंचल में 1235 बूथ बनाए गए थे।

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