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रेडियो कॉलर पहनाने की तैयारी शुरू:एमई-1 दंतैल बना खतरा, पहनाया जाएगा रेडियो कॉलर ताकि मिल सके उसका लोकेशन, रात में झाड़ियों के पीछे छुपे हाथी का पता नहीं चलता

महासमुंद10 दिन पहलेलेखक: मनीष पाण्डेय
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वर्तमान में महासमुंद जिले में बार दल के दो टस्कर मौजूद हैं। इसी तरह बीच-बीच में रोहांसी दल के हाथी भी महामसुंद के सिरपुर क्षेत्र में आते हैं। - Dainik Bhaskar
वर्तमान में महासमुंद जिले में बार दल के दो टस्कर मौजूद हैं। इसी तरह बीच-बीच में रोहांसी दल के हाथी भी महामसुंद के सिरपुर क्षेत्र में आते हैं।
  • 3 साल पहले ही चंदा हाथिनी के बाद दंतैल को पहनाना था रेडियो कॉलर

दंतैल का लोकेशन नहीं मिलने और इसके चलते हो रही जनहानि को देखते हुए जल्द ही एमई-1 टस्कर को रेडियो कॉलर पहनाया जाएगा। रविवार को दंतैल के हमले से दो लोगों की मौत के बाद वन विभाग ने टस्कर को रेडियो कॉलर पहनाने की तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि इसमें थोड़ा वक्त लगेगा। अगले महीने अक्टूबर में एमई-1 को रेडियो कॉलर पहनाने का अभियान शुरू किया जाएगा।

अभी बारिश के कारण यह काम चुनौतीपूर्ण होता है। डीएफओ पंकज राजपूत ने बताया कि एमई-1 टस्कर को रेडियो कॉलर पहनाने के लिए इस साल की शुरुआत में तैयारी की जा चुकी थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण ये काम प्रभावित हुआ।

अब फिर से शुरुआत कर रहे हैं। हाथी को रेडियो कॉलर पहनाने से पहले कई तरह की तैयारियां की जाती हैं, जो विभागीय स्तर पर शुरू कर दी गई हैं।

ज्ञात हो कि दो दिन पहले ही रविवार की रात को एमई-1 टस्कर ने गौरखेड़ा के पास महासमुंद निवासी राजू विश्वकर्मा और झालखम्हरिया में परमेश्वर कमार नामक व्यक्ति को मारा था। महासमुंद जिले में ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक ही दिन में हाथी के कुचलने से दो लोगों की मौत हुई है। वर्तमान में महासमुंद जिले में बार दल के दो टस्कर मौजूद हैं। इसी तरह बीच-बीच में रोहांसी दल के हाथी भी महामसुंद के सिरपुर क्षेत्र में आते हैं।

लोकेशन नहीं मिलना, अभी यही सबसे बड़ी चुनौती

हाथियों का लोकेशन नहीं मिलना ही सबसे बड़ी चुनौती है। रात में हाथियों के मूवमेंट की कोई खास जानकारी नहीं मिल पाती। रविवार को जिले में हुई जनहानि में लोकेशन नहीं मिलना ही सबसे बड़ा कारण था। एमई-1 टस्कर का लोकेशन दोपहर तक मोहंदी के जंगल में देखा गया था, लेकिन वह कब गौरखेड़ा पहुंचा किसी को खबर तक नहीं लगी। यही नहीं यहां जनहानि के दो घंटे बाद ही एमई-1 झालखम्हरिया पहुंच चुका था। वहां भी एक की मौत के बाद दंतैल के आने की खबर मिली।

2018 में चंदा हाथिनी को पहनाया था रेडियो कॉलर

साल 2018 में 22 सितंबर को उस समय जिले में विचरण करने वाले बार दल में से चंदा हाथिनी को रेडियो कॉलर पहनाया गया था। वन विभाग की टीम ने वाइल्ड लाइफ एसओएस के साथ मिलकर चंदा हाथिनी को पांच घंटे में रेडियो कॉलर पहनाया था। उसी दौरान ही बार दल के 3 दंतैल को भी रेडियो कॉलर पहनाया जाना था। किन्हीं कारणों से ऐसा नहीं हो पाया था। साल 2020 में चंदा हाथिनी बार दल के साथ गरियाबंद होते हुए धमतरी चली गई थी। अब य दल धमतरी, कांकेर, गरियाबंद में घूम रहा है।

प्रदेश में कुल 8 हाथियों पर लगा था रेडियो कॉलर

​​​​​​​रेडियो कॉलर लगाने की शुरुआत 12 मई 2018 को सरगुजा रेंज से की गई। बहरादेव नामक नर हाथी को पहला रेडियो कॉलर पहनाया गया था। 15 जून 2018 को इसी रेंज के मैनपाट क्षेत्र में 9 हाथियों के दल में से एक मादा हाथी को रेडियो कॉलर पहनाया गया था। महासमुंद में चंदा हाथिनी (एमई-4) को 22 सितंबर 2018 को रेडियो कॉलर पहनाया गया था। अब तक छत्तीसगढ़ में आठ जंगली हाथियों को रेडियो कॉलर पहनाया था। इनमें से कई हाथियों के रेडियो कॉलर या तो गिर गए हैं या फिर खराब हो गए हैं।

इस साल हाथियों के हमले में 7 की जा चुकी है जान

महासमुंद जिले में इस साल 7 लोगों की मौत हाथियों के हमले से हो चुकी है। रविवार को गौरखेड़ा और झालखम्हरिया में दंतैल ने दो लोगों को मारा था। वहीं 7 सितंबर को अचानकपुर निवासी एक व्यक्ति को दंतैल ने मारा था। इसके पहले 3 अगस्त को बागबाहरा के कुरुभाठा में एक व्यक्ति, जून महीने में बिजराडीह में एक महिला, मई महीने के 14 और 19 तारीख को दो व्यक्ति को दंतैल ने कुचलकर मार डाला था। साल 2015 से अब तक जिले में कुल 28 मौतें हाथी के हमले से हो चुकी है।

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