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ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे:कोरोनाकाल में लोग दिन में 4-5 बार धो रहे हाथ, जेब में रख रहे सैनिटाइजर

महासमुंद8 महीने पहले
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हाथ धुलाई के प्रति जागरूक करने हर साल 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंडवाशिंग डे मनाया जाता है। इसे मनाने का उद्देश्य हाथ धोने के फायदे के बारे में लोगों को जागरूक करना है। कोरोना काल में इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

हर साल ग्लोबल हैंडवाशिंग डे की नई थीम होती है। इस साल ‘हैंड हाइजीन फॉर ऑल’ थीम के तहत इसे मनाया जा रहा है। इस थीम के तहत विशेष रूप से साबुन से हाथ धोने के महत्व को बढ़ावा देना है। आज जब से कोरोना वायरस का खतरा पूरी दुनिया में है। उसके बाद से लोगों को अपने हाथों की साफ रखने का महत्व समझ आ रहा है। कोरोना से बचाव के लिए हाथ धोना कितना जरूरी है, ये सभी जान चुके हैं। पहले, जो लोग हैंडवॉश को उतना महत्व नहीं देते थे या नहीं करते थे कोरोना काल में डर से ही लेकिन 24 घंटे में 4-5 बार हैंडवॉश कर रहे हैं। कोरोना के डर के कारण आज के समय में लोग हैंडवॉश करने के बाद ही खाना खाना, बच्चे को छूने से पहले हैंडवॉश जरूर कर रहे हैं।

कोरोना काल ने हैंडवॉश को जरूरी बना दिया
शहर के गंज पारा के रहने वाले पंकज देवांगन के घर में कोरोना काल से पहले हैंड वॉश को उतना महत्व नहीं दिया जाता था। 24 घंटे में एक या दोर बार भी हैंडवॉश कोई कर ले तो बहुत बड़ी बात थी। कोरोना के दौरान हैंडवॉश का महत्व जानने के बाद परिवार के लोग अब तो 24 घंटे में 5-6 बार हैंड वॉश कर रहे हैं। साथ ही सैनिटाइज का इस्तेमाल भी कर रहे हैं। घर से बाहर जाते समय सैनिटाइजर जरूर लेकर चलते हैं।
शहर के रमन टोला निवासी संदीप दिवान कोरोना काल से पहले हैंड वॉश सिर्फ जरूरी मौके पर ही किया करते थे। कोरोना काल में हैंड वॉश का महत्व समझने के बाद खुद तो कई बार हैंड वॉश और सैनिटाइज करते ही हैं साथ ही परिवार को भी करने के लिए हमेशा कहते हैं। घर के बच्चों की हाथ सफाई का खास ख्याल रखते हैं। संदीप ने कहा कि वाकई कोरोना ने जीने का तरीका ही बदल दिया है।

कब से मनाया जा रहा
साल 2008 में सबसे पहले ग्लोबल हैंडवाशिंग डे मनाया गया था। इस दिन पूरी दुनिया में लगभग 70 देशों में 1.20 करोड़ बच्चों ने एक साथ साबुन से हाथ धोने का रिकार्ड बनाया था। ग्लोबल हैंडवाशिंग डे की स्थापना लोगों में हाथ धोने की प्रवृति की आदत डालने के उद्देश्य से की थी।

हाथ धोने से बच सकते हैं इन बीमारियों से
डायरिया, गैस्ट्रोएंट्राइटिस, दस्त,हैजा, आंखों व त्वचा के संक्रमण, हेपेटाइटिस-ए और ई, स्वाइन फ्लू, और फ्लू, सर्दी-जुकाम, पीलिया और एच 1 एन 1, निमोनिया और अन्य रेस्पेरेट्री इंफेक्शन आदि।

सैनिटाइजर बेहतर या साबुन
जिला अस्पताल के सीएमएचओ डॉ. राकेश परदल ने कहा कि कोरोना का बाहरी परत फैट का बना होता है। साबुन फैट को अच्छी तरह से साफ करता है। लिहाजा अल्कोहल-बेस्ड हैंड सैनिटाइजर की अपेक्षा साबुन हाथ धोने के लिए बेहतर विकल्प है। सैनिटाइजर में भी 60% अल्कोहल होना चाहिए।

जितना हो सके हाथ धोते रहिए
चाइल्ड स्पेशलिटी डॉ. राकेश परदल ने कहा कि हाथ धोने की महत्ता को नजरअंदाज न करें। कोरोना काल में जितना हो सके हाथ धोते रहिए। कुछ भी चीजें छू रहे हैं तो उसके बाद साबुन से हाथ जरूर धोएं। हाथों की सफाई पर लगाए गए चंद सेकंड आपके और आपके बच्चे को डॉक्टर के पास लगने वाले कई चक्करों से बचा सकते हैं।

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