140 से अधिक महिलाएं जुटी हैं काम में:भाइयों की कलाई पर सजेंगी धान और बांस से बनी राखियां

महासमुंद2 महीने पहले
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जिले की महिला स्व-सहायता समूह द्वारा रक्षाबंधन पर्व के लिए हाथ से राखियां बनाई जा रही है, जो रक्षाबंधन के दिन भाइयों की कलाइयों पर बंधेगी। समूह की महिलाएं भाइयों के लिए बांस, धान, रखिया बीज, मोती, रुद्राक्ष व ऊन सूती के धागा से राखियां बना रही हैं। इस काम में जिले की 140 से अधिक महिलाएं जुटी हैं। इन राखियों को फोन के माध्यम से ऑर्डर किया जा रहा है। इन राखियों के लिए इच्छुक लोग इन नंबर्स पर 99814-06688, 96309-73097 संपर्क कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को आजीविका भी मिलेगी।

पड़ोसी जिलों में भी इनकी अच्छी मांग है: जिला पंचायत सीईओ आकाश छिकारा ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूह के उत्पादित सामग्रियों को सिरपुर के ब्रांड नाम से विक्रय किया जा रहा है। इसके लिए जिला मुख्यालय, ब्लॉक मुख्यालयों में इनके द्वारा निर्मित अलग-अलग सामग्री के बिक्री के लिए महिलाओं को स्टॉल भी उपलब्ध कराए गए हैं। स्थानीय हाट बाजार, राजधानी रायपुर के साथ पड़ोसी जिलों में भी इनकी मांग है।

10 से लेकर 50 रुपए तक की राखी
महिला स्व सहायता समूह द्वारा बनाई गई राखियों की कीमत 10 से लेकर 50 रुपए तक है। इन राखियों को राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत महासमुंद ब्लॉक के ग्राम पंचायत कछारडीह, रायतुम, मुनगाशेर, कांपा, कोमाखान, बिरकोनी में श्री कृष्णा, उगता सूरज, राधा कृष्णा, नवा बिहान, ओम महिला, स्वाभिमान, श्री शक्ति महिला, गीता महिला, बजरंग महिला, आदिवासी महालक्ष्मी, जयदुर्गा, जय मां अम्बे, जय बजरंग, अन्नपूर्णा, शारदा व गायत्री समूह की महिला सदस्य राखियां बना रही हैं।

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