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विरोध प्रदर्शन:126 एकड़ सरकारी कृषि जमीन पर 50 सालों से काबिज ग्रामीण बेदखल, मेड़ तक ध्वस्त कर दी

नवापारा राजिम3 महीने पहले
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नवापारा. आधा दर्जन जेसीबी लगाकर जमीन का समतलीकरण किया गया। - Dainik Bhaskar
नवापारा. आधा दर्जन जेसीबी लगाकर जमीन का समतलीकरण किया गया।
  • सोनेसिल्ली के 100 से अधिक ग्रामीणों ने विधायक धनेंद्र साहू के निवास के सामने की नारेबाजी, चक्काजाम भी किया

ग्राम सोनेसिल्ली में राजस्व और भारी पुलिस बल की उपस्थिति में मंगलवार को मुख्य मार्ग से लगी बेशकीमती 126 एकड़ सरकारी कृषि भूमि से ग्रामीणों को बेदखल किया गया। जेसीबी से सभी खेत की मेड़ को ध्वस्त कर जमीन समतल कर उस पर शासकीय भूमि का बोर्ड चस्पा कर दिया गया। बताया जा रहा कि इस जमीन को गोठान समेत अन्य उपयोग के लिए खाली कराया गया।

सोमवार को गांव वालों को इसकी भनक लग गई थी, जिसके बाद 100 से अधिक ग्रामीणों ने हालांकि ग्रामीणों ने उनकी गैरमौजूदगी में ही विधायक घर के सामने नारेबाजी कर प्रदर्शन किया, हालांकि वे घर पर नहीं थे। इधर मंगलवार को विधायक धनेंद्र साहू ने प्रदर्शन कर रहे लोगों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र भी लिखा है।

सामने खरीफ सीजन और जमीन को कब्जामुक्त करवाने पर आमादा अमले को रोकने की मांग को लेकर लगभग 100 ग्रामीण विधायक धनेंद्र साहू के गृहग्राम तोरला पहुंचे थे लेकिन विधायक नहीं मिले। विधायक निवास के सामने अनियंत्रित भीड़ के प्रदर्शन से प्रशासन और पुलिस अमला सकते में आ गया।

लोगों ने सड़क पर चक्काजाम भी किया। तहसीलदार कृष्ण कुमार साहू ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाकर शांत कराया। मौके पर एसडीएम निर्भय साहू, सीएसपी, रिजर्व पुलिस बल की टुकड़ी, नवापारा टीआई कृष्णचंद्र सिदार समेत राजस्व अमला पहुंचा था।

ग्रामीण बोले- दो दिन तक धमकाती रही पुलिस
पीड़ित ग्रामीण रामकुमार साहू, विजय यादव, बिसहत साहू, बृजलाल, भागवत, त्रिलोचन यादव, पंचूराम, हगरु राम, हीरालाल साहू, बेनीराम सोनकुवर, लक्ष्मी तारक, उमाबाई, ताराबाई, नीलबाई यादव, डोमेश्वरी साहू सहित सहित कई लोगों ने दो दिनों से पुलिस पर आतंकित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 50 सालों से जमीन पर काबिज हैं। हमारे पास जीवकोपार्जन का कोई साधन नहीं है। हम कब्जा नहीं छोड़ सकते।

1972 में मध्यप्रदेश सरकार ने दी थी जमीन

नवापारा. जमीन बेदखली से पीड़ित ग्राम सोनेसिल्ली के ग्रामवासी।
नवापारा. जमीन बेदखली से पीड़ित ग्राम सोनेसिल्ली के ग्रामवासी।

दरअसल सोनेसिल्ली गांव की इस जमीन पर गांव के भूमिहीन कृषकों का समूह पिछले 50 वर्षों से काबिज होकर कृषि कार्य कर अपना जीवन यापन कर रहा है। यह भूमि इन भूमिहीन किसानों को 1972 में तत्कालीन मप्र सरकार ने आबंटित की थी। उस समय 22 परिवारों के इस समूह की संख्या अब 250 हो गई है। तब से वे कई खसरा नंबर में बंटी 37,55 हेक्टेयर शासकीय जमीन पर खेती कर रहे हैं।

1992 में मप्र सरकार ने ही उक्त आबंटन निरस्त कर जमीन वापस सरकार को सौंपने का आदेश दिया था लेकिन वे फिर भी किसानी करते रहे। तहसीलदार ने बताया कि इस दौरान काबिज किसान न्यायालय तहसील, न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी में भी अपना कब्जा जायज सिद्ध नहीं कर सके।

छत्तीसगढ़ गठन के बाद समय-समय पर स्थानीय पंचायत स्तर पर विभिन्न योजनाओं के लिए जमीन की जरूरत पड़ने पर इस सरकारी जमीन की मांग की जाती रही। पिछले वर्ष फरवरी में एक बार फिर पंचायत की बैठक में इस जमीन की मांग की गई। 24 फरवरी 2021 को पंचायत में प्रस्ताव पारित कर गोठान के लिए जमीन की मांग की गई।

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