किसानों का दर्द:प्रशासन ने कहा- सभी तहसीलों में सर्वे कराया, रिपोर्ट निरंक आई, किसान बोले- अफसर तो हमारे खेतों में झांकने तक नहीं आए

महासमुंद2 महीने पहले
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नवंबर के महीने में हुई बेमौसम बारिश से जिले के एक भी किसान को इतना नुकसान नहीं हुआ है कि मुआवजा दिया जाए। फसलें सामान्य तौर पर ठीक हंै। यह हम नहीं जिले के सभी तहसीलों से आई रिपोर्ट के बाद जिले के राजस्व और कृषि विभाग के अफसर कह रहे हैं। अधिकारियों ने कहा कि फसल के 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान पर ही मुआवजे का प्रावधान है। वहीं किसानों का कहना है कि नवंबर महीने में हुई तेज बारिश से धान की फसल को काफी नुकसान हुआ है।

बारिश से फसलें खेतों में जमीन पर गिर गई थी, इससे उत्पादन में कमी आई है। अफसरों ने सर्वे किया है तो कौन से किसान के खेत में वे गए थे हमें बताएं। हकीकत ये है कि वे झांकने तक नहीं आए। जिले के सभी तहसील में सर्वे किया गया और रिपोर्ट कलेक्टोरेट में भेज दी है। रिपोर्ट के आधार पर बारिश से मुआवजा देने लायक नुकसान नहीं होने का दावा किया जा रहा है। रिपोर्ट निरंक है। ऐसे में जिले के किसी भी धान फसल लिए किसानों को मुआवजा का लाभ नहीं मिलेगा।

राजस्व विभाग के डिप्टी कलेक्टर श्रवण टंडन एवं कृषि विभाग के प्रभारी उप संचालक अमित मोहंती ने बताया कि बारिश से फसल बर्बाद की रिपोर्ट तहसीलों से निरंक आई है। पिथौरा के एक किसान जिन्होंने रबि सीजन में गेंहू की फसल ली थी, उसकी चार एकड़ की फसल बर्बाद हो गई है। खरीफ सीजन में बर्बाद हुई फसलों के लिए राजस्व विभाग की ओर से आरबीसी-6(4) के तहत मुआवजा दिया जाता है। लेकिन सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किसी भी किसान को मुआवजा नहीं मिलेगा। अधिकारियों ने बताया कि राजस्व विभाग द्वारा सर्वे में 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर ही मुआवजा का लाभ मिलता है। अधिकतर गांव में 33 प्रतिशत से कम नुकसान हुआ है, इसलिए रिपोर्ट निरंक है।

धान को सुखाया तो आधा झड़ गया
इधर, सर्वे को लेकर भास्कर की टीम ने जिला मुख्यालय के आसपास सहित दूरस्थ इलाकाें के किसानों से चर्चा कर जानकारी ली तो किसानों ने बताया कि बारिश के बाद अधिकारी व कर्मचारी फसलों की जानकारी लेने तक नहीं पहुंचे थे। बारिश से पूरा करपा गीला हो गया था। किसान करपा को मेड़ में सुखाकर बचाने का प्रयास कर रहे थे। दो दिन बाद जब मौसम खुला तो धान सुखाया गया, लेकिन आधे से अधिक धान झड़ गया। किसानों ने बताया कि दो दिन हुई बारिश से प्रति एकड़ डेढ़ क्विंटल का नुकसान उत्पादन में हुआ है।

गीले धान को सुखाने के बाद भी पड़ गया काला
ग्राम बकमा के रहने वाले किसान घनश्याम चंद्राकर ने बताया कि खरीफ सीजन में उन्होंने 80 एकड़ में धान की फसल ली है। नवंबर महीने में दो बार बारिश होने से धान खराब हो गया। गीले धान को सुखाकर उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन काला पड़ गया। उन्होंने बताया कि उन्हें प्रति एकड़ में डेढ़ क्विंटल का नुकसान पहुंचा है। अधिकारी फलसों को देखने तक नहीं पहुंचे।

फसल का नुकसान हुआ कटाई में ज्यादा पैसे लगेंगे
बकमा के किसान परस राम ध्रुव, प्रकाश यादव ने बताया कि इस बार बारिश से धान की फसल तो बर्बाद हुई है, इसके साथ अब आर्थिक नुकसान भी होगा। फसल झुक गई है, कटाई के लिए परेशानी होगी। तीन से चार हजार रुपए झुकी हुई फसलों की कटाई के लिए हार्वेस्टर वाले ले रहे हैं। इसके साथ धान का दाना और टूटेगा। इससे अलग नुकसान होगा।

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