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12 महीने साफ पानी भरा रहता है:गड्‌ढे में रहता है बारहों माह पानी, सिंचाई के लिए मांगने पर नियम बता रहे अफसर

महासमुंद15 दिन पहले
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महासमुंद। बीएसपीएल कंपनी द्वारा खोदे गए गड्‌ढे में भरा लबालब पानी। - Dainik Bhaskar
महासमुंद। बीएसपीएल कंपनी द्वारा खोदे गए गड्‌ढे में भरा लबालब पानी।
  • अधिकारी बोले- नई नहर नहीं बना सकते, लिफ्ट एरीगेशन योजना भी अब बंद हो चुकी

महानदी के तट पर स्थित ग्राम घोड़ारी में एक ऐसा गड्‌ढा है, जिसकी गहराई और चौड़ाई करीब 300 फीट है। यही नहीं ये करीब 1 हजार फीट लंबा है। इसमें 12 महीने साफ पानी भरा रहता है। खोदाई के वक्त इतना गहरा हो गया कि इस दौरान पानी का श्रोत निकल आया, इसकी वजह से हमेशा गड्‌ढे में पानी भरा रहता है। इस गड्‌ढे के पानी को सिंचाई और पेजयल के उपयोग में लाया जा सकता है, जिससे आसपास के करीब 4 से 5 गांवों को आसानी से सप्लाई की जा सकती है। खास बात यह है कि इस गड्‌ढे में गर्मी के दिनों में भी 300 फीट पानी भरा रहता है।

गर्मी के दिनों में यदि इस गड्‌ढे के पानी को पेयजल के रुप में आसपास के गांवों में सप्लाई करें तो ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी। ग्रामीण लगातार इसकी मांग मुख्यमंत्री, विधायकों व कलेक्टरों से करते रहे, लेकिन इस दिशा में काम नहीं हो पाया है। एक बार फिर ग्राम घोड़ारी सरपंच के प्रतिनिधि जोगी निषाद ने मुख्यमंत्री, विधायक व कलेक्टर से सिंचाई के लिए विकल्प को बेहतर बताते हुए इस नई योजना बनाने की मांग की है। उन्होंने समोदा व निसदा बैराद से भी ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी देने की मांग की है। उन्होंने बताया कि निसदा, समोंदा बांध से आसपास के 50 किलोमीटर दूर के गांवों को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है जबकि नजदीक लगे गांव मुढ़ैना, नांदगाव, घोड़ारी, बेलसोंडा, बरबसपुर, अछरीडीह व नयापारा के ग्रामीणों को पानी नहीं दिया जाता है।

पट रहा गड्‌ढा, नहीं दे रहे जनप्रतिनिध व प्रशासन ध्यान
सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि इस गड्‌ढे को आरंग से सरायपाली तक फोरलेन निर्माण करने वाली कंपनी के द्वारा खोदा गया था। इसमें 12 महीने पानी भरा रहता है। धीरे-धीरे इस गड्‌ढे को पाटा जा रहा है। सिंचाई व पेजयल के लिए बेहतर विकल्प होने के बावजूद प्रशासन व जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

इस पेंच के कारण नहीं बना पाया सिंचाई के लिए प्लान
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता जेके चंद्राकर ने बताया कि दो-तीन साल पूर्व बीएसपीएल कंपनी के दफ्तर के पीछे स्थित गढ्डे के पानी के उपयोग के लिए जल संसाधन की टीम ने निरीक्षण किया था। साथ ही आसपास के गांवों में सिंचाई योजना की जानकारी ली, लेकिन दो पेंच फंसे हुए हैं, इसके चलते प्लान तैयार नहीं हो पाया। ये पेंच इस प्रकार है....

  • पहला पेंच – घोड़ारी सहित आसपास के गांवाें में सिंचाई व निस्तारी के लिए कोडार कमांड से पानी दिया जाता है, इसलिए क्षेत्र में नया कमांड तैयार नहीं किया जा सकता है।
  • दूसरा पेंच - दूसरी बड़ी समस्या 2003 में लिफ्ट इरीगेशन के माध्यम से सिंचाई की योजना बंद हो गई है। इसलिए भी प्लान ठंडे बस्ते में चला गया है।
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