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मनमानी:जहां साल के 12 महीने पानी की है सुविधा, वहीं पर सिंचाई के लिए बना दिया 17.92 करोड़ का प्रोजेक्ट

महासमुंद8 महीने पहले
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  • दो साल में खर्च किए 11.12 करोड़, फिर भी दो साल से सिंचाई के लिए किसानों को नहीं मिला बूंदभर पानी

दिनेश पाटकर | शासकीय पैसे के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। जल संसाधन विभाग की ओर से सूक्ष्म सिंचाई योजना (माइक्रो इरीगेशन) का प्लान ऐसे गांव के लिए तैयार किया, जहां साल के 12 महीने भरपूर पानी होता है। सिंचाई के भरपूर साधन होने के बावजूद विभाग ने यहां 17.92 करोड़ रुपए का प्लान तैयार कर दिया। यही नहीं चार साल पहले शुरू हुए इस परियोजना के लिए 11.12 करोड़ रुपए खर्च भी हो चुका है। लेकिन दो साल में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को बूंदभर पानी नहीं मिल पाया है।
जल संसाधन विभाग रायपुर की ओर से महानदी पर हरदी एनीकट से सूक्ष्म सिंचाई योजना का प्लान बनाया। इसकी लागत 17.92 करोड़ रुपए है। योजना के तहत महामसुंद के ग्राम गढ़सिवनी और पीढ़ी गांव में 120-120 हेक्टेयर और रायपुर जिले के कागदेही ग्राम में 140 और हरदी में 120 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई की जानी थी। चार साल पहले 2 अगस्त 2016 को सूक्ष्म सिंचाई परियोजना के तहत कार्य आदेश जारी किया गया।

संसदीय सचिव ने की मुख्य सचिव से
शिकायत : इधर, इस परियोजना के संबंध में संसदीय सचिव विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने मुख्य सचिव से शिकायत की है। इसके पहले भी उन्होंने जल संसाधन विभाग के सचिव से मामले की शिकायत की थी। मामला विधानसभा में भी उठा, लेकिन अब तक मामले की जांच नहीं हुई। संसदीय सचिव ने बताया कि दोनों गांव में भरपूर पानी है। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

परियोजना पर नजर

  • योजना का नाम - महानदी पर हरदी एनीकट से सूक्ष्म सिंचाई योजना
  • कार्य लागत -17.92 करोड़
  • कार्य एजेंसी -जल संसाधन विभाग रायपुर
  • लाभान्वित जिला - महासमुंद, रायपुर (500 हेक्टेयर)
  • कार्य अवधि - 02/08/2016 से 31/03/2018

बिजली विभाग से नहीं मिला परमिशन, इसलिए पूरा नहीं हो पाया काम : इधर, इस पूरे मामले में निर्माण कंपनी के अधिकारी रितेश चौधरी और अमोद कुमार ने बताया कि योजना के तहत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। खेतों में पाइपलाइन भी बिछाई जा चुकी है। पानी सप्लाई के लिए 11 हजार वोल्टेज का ट्रांसफॉर्मर भी नदी के पास लगाया जा चुका है, लेकिन बिजली विभाग ने अब तक करंट सप्लाई शुरू नहीं की गई है।

दो साल पहले पाइप भी बिछा, लेकिन पानी नहीं किसानाें ने कहा-यहां प्रोजेक्ट की जरूरत ही नहीं थी
भास्कर ने जब इस पूरे मामले की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। बुधवार को भास्कर टीम ने गढ़सिवनी और पीढ़ी जाकर किसानों के साथ मौके का जायजा लिया। योजना के तहत महानदी में इंटकवेल बन चुका है। साथ ही महानदी के किनारे में जेकवेल भी बन चुका है। किसानों के खेतों तक बाकायदा पाइपलाइन भी दो साल पहले बिछ चुकी है, लेकिन इससे बूंदभर पानी भी किसानों को नहीं मिला है। ग्राम पीढ़ी के किसान रेखलाल, विदेशी साहू, हरदीडीह के कार्तिक निषाद और देवेंद्र ने बताया कि यहां तो सिंचाई के लिए सरकार को खर्च करने की जरुरत ही नहीं थी। पूरा इलाका अपासी (भरपूर पानी वाला क्षेत्र) है। आसपास नदी है, तालाब है एनीकट है, ऐसे में खेती के लिए अधिक पानी की आवश्यकता ही नहीं होती। बावजूद इसके यहां करोड़ों रुपए खर्च कर दिया गया है। बड़ी बात ये है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद दो साल बीत गए, लेकिन आज तक खेतों में पानी नहीं पहुंचा है।

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