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कोरोना इफेक्ट:सख्त गाइडलाइन के कारण कैंसल हो रहे दुर्गा की मूर्तियों के ऑर्डर

राजिम8 महीने पहले
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  • मेहनत पर फिर गया पानी, राजिम के मूर्तिकारों को लागत निकालने की चिंता, सहयोगियों को पैसे देना हुआ मुश्किल

लगातार 9 दिनों तक चलने वाले हिंदुओं का प्रमुख पर्व नवरात्र 17 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहा है। जिला प्रशासन की सख्त गाइडलाइन के चलते कई सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समितियों ने इस बार मूर्ति स्थापना करने से मना कर दिया है। यहां तक कि सरकार के दिशा निर्देश के इंतजार में इन्होंने मूर्तियों के ऑर्डर तो दे दिए थे लेकिन कठोर नियम के चलते मूर्तिकारों के ऑर्डर कैंसिल करा दिए। इससे मूर्तिकारों की मेहनत पर पानी फिर गया है। नगर के मेला मैदान में मूर्तियों को आकार दे रहे लोकेश चक्रधारी ने बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार मूर्तियां कम बनाई हैं। 15 मूर्तियों के ऑर्डर कैंसिल होने से रात में नींद नहीं आ रही है। मूर्तिकार रमेश चक्रधारी की 35 में से 14 मूर्तियों के ऑर्डर कैंसल हुए हैं जबकि 12 के ऑर्डर यथावत हैं। उन्होंने 9 मूर्तियां अतिरिक्त बनाई हैं। दोनों क चिंता लगी है कि अब क्या करें। कैंसिल मूर्तियों के निर्माण में मजदूरी दर एवं सामग्री लग चुकी है, इसकी लागत अब कैसे निकलेगी। लोकेश 8 मूर्तियों को फाइनल टच दे रहे हैं, जिसे धमतरी, रायपुर, महासमुंद एवं गरियाबंद जिले में स्थापित किया जाएगा। परिवार सहित मूर्तियों को अंतिम रूप देने में लगे हैं। मजदूरी दर पर कारीगर बुलाए हैं जो लगातार कार्य कर रहे हैं। अन्य मूर्तिकारों रमन चक्रधारी, अजय चक्रधारी, विजय चक्रधारी ने बताया कि 24 मूर्तियां बनाई हैं जिनमें मात्र 12 मूर्तियों के ऑर्डर मिले हैं जिसे पूर्ण किया जा रहा है, बाकी 12 मूर्तियां तो बन गई है लेकिन उनमें रंग रोगन एवं सजावट नहीं का जा रही है। रंजीत पटेल, पिंटू पटेल, सोनू यादव ने बताया कि एक मीडियम साइज की मूर्ति को बनाने में 4 से 5 हजार रुपए खर्च आता है। पूर्व वर्ष की भांति इस बार कम मूर्ति बनाई हैं। 24 मूर्तियों पर कम से कम 1 लाख 20 हजार रुपए का खर्चा आता है। ऑर्डर के अनुसार 12 मूर्तियां ही स्थापित होने के लिए जाएंगी । बाकी मूर्तियों को क्या करें समझ नहीं आ रहा है।

धमतरी में प्रशासन ने नियम शिथिल किए
सख्त गाइडलाइन वर्षों पुरानी परंपरा को तोड़ रही है जबकि पड़ोसी जिला धमतरी में गाइडलाइन के कड़े नियमों को शिथिल किया गया है। यहां तक कि कैमरे लगाने के निर्देश को हटाया गया है। पंडाल में दर्शन के लिए आए व्यक्ति के संक्रमित होने पर आयोजकों को खर्चा उठाने के आदेश को रद्द किया गया है तथा स्थापना विसर्जन के दौरान वाद्य यंत्र बजाने की अनुमति दी गई है। समितियों का मानना है कि कम से कम इतनी शिथिलता गरियाबंद जिले में भी मिलनी चाहिए।

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