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परेशानी:कृषि मंडी बंद होने से किसान औने-पौने दाम पर मिल मालिकों को बेच रहे धान

राजिम2 महीने पहले
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खुले में सुखा रहे धान, बेमौसम बारिश का भी डर - Dainik Bhaskar
खुले में सुखा रहे धान, बेमौसम बारिश का भी डर
  • किसान इतना धान घर में रख नहीं सकते और 13 अप्रैल से लॉकडाउन के चलते मंडी भी बंद

अंचल में बड़ी संख्या में किसानों ने रबी की फसल लगाई है, जो पककर तैयार भी हो गई है। किसान इसकी कटाई में व्यस्त हैं, लगभग 50% खेतों से धान कटाई का कार्य पूर्ण हो चुका है। किसान घर में इतना धान रख नहीं सकते और मंडी बंद होने से मजबूरी में वे मिल मालिकों को औने-पौने दाम पर धान बेच रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि मंडी बंद है जिससे किसान बड़ी चिंता में हैं कि अब वह अपनी उपज आखिर कहां बेचें क्योंकि घर में रखने की जगह नहीं है। बाहर रखते हैं तो मौसम का डर सता रहा है। पिछले तीन-चार दिनों से रुक-रुककर हो रही बूंदाबांदी व मौसम के बदले मिजाज से किसान चिंता में हैं। पिछले 13 अप्रैल से जिले में लॉकडाउन के चलते मंडी बंद है और वहां काम करने वाले मजदूर खाली हैं। ऐसे में एक ही सहारा है कि किसान खुद होकर राइस मिलों का दरवाजा खटखटा रहे हैं लेकिन मिल मालिक ओने-पौने दामों उनका धान ले रहे हैं। हकीकत ये है कि तकलीफ के समय यही इनके काम आते रहे हैं। धान में अभी नमी है इसलिए मिलों में धान ले जाने पर नमी काट रहे हैं। प्रति क्विंटल किलो मॉश्चर का नुकसान किसानों को हो रहा है।

किसानों की मांग- सरकार नियमों के साथ खुलवाए मंडी
किसान झंगलूराम, भोले साहू, संतोष साहू, वेदप्रकाश, दीनदयाल पटेल, बिसहत साहू, लोकेश्वर निषाद ने बताया कि मंडी में व्यापारी सीधे धान को देखकर सौदा करते हैं वहां नमीं नहीं काटी जाती। यदि धान को रोककर रखते हैं तो रखने के लिए जगह नहीं है। राइस मिल वाले व्यापारी प्रतिदिन धान की कीमत कम कर रहे हैं इससे हमें नुकसान हो रहा है। प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन से अनुरोध है कि वह नियमों के साथ शीघ्र धान की मंडी खुलवाए ताकि उन्हें उनके उपज की सही कीमत मिल सके।

किसानों ने फसल कटवाकर घर के चौराहे, गलियां या फिर खेतों में ही त्रिपाल बिछाकर फैला दी है जिससे वह सूख सके। किसानों धूप में बार-बार धान को पलटना पड़ रहा है लेकिन बेमौसम बारिश का डर भी बना हुआ है क्योंकि कुछ दिनों से बूंदाबांदी भी हो रही है। हार्वेस्टर से कटाई द्रुतगति से जारी है। हार्वेस्टर वाले प्रति एकड़ ₹2500 किराया लेते हैं तो चैन माउंटेन कुबोटा हार्वेस्टर वाले 1 घंटे का 3000 किराया लेते हैं। दोनों का काम किसानों को पसंद आ रहा है और किसान फसल कटाई व मिंजाई में इऩकी मदद ले रहे हैं। वैसे भी कोरोनाकाल में मजदूर नहीं मिल रहे हैं इसलिए हार्वेस्टर ही एक सहारा है।

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