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परेशानी:बाजार बंद होने से किसान चिंतित, खेत में ही सड़ हो रही सब्जियां

राजिमएक महीने पहले
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  • अंचल में 30% लोग सब्जी बाड़ी बोते हैं, पीड़ितों किसानों ने शासन से लॉकडाउन में सब्जी बेचने की छूट की मांग की

गरियाबंद जिले में 23 सितंबर रात 9 बजे से लॉकडाउन होने से किसानों की हालत बद से बदतर हो गई है। खासकर सब्जी बाड़ी किसानों की स्थिति अत्यंत दयनीय होती जा रही है और सब्जी के पौधे सड़ने लगे हैं। यदि किसान इन्हें बेचने के लिए तोड़ते हैं तो इसके लिए उन्हें मजदूरों को पैसा देना पड़ेगा और लॉकडाउन के चलते मंडी और बाजार बंद होने से सब्जी मवेशियों को खिलाएंगे या फिर फेंक देंगे। इससे उनको नुकसान ही उठाना पड़ेगा इसलिए सब्जियों को पेड़ में ही छोड़ रहे हैं। किसानों ने शासन से लॉकडाउन में सब्जी बेचने की छूट देने की मांग की है। ज्ञात हो कि राजिम अंचल में ही 30% लोग सब्जी की खेती करते हैं। भास्कर संवाददाता ने नगर व आसपास के सब्जी बाड़ी किसानों का हाल चाल लिया। नगर से लगे हुए गांव बुड़ेनी के किसान कृष्णा पटेल ने बताया कि वह आधा एकड़ जमीन पर बैंगन की फसल लगाए हैं। फसल प्राप्त करने के लिए परिवार सहित दिन-रात बाड़ी में ही बिता दी। निंदाई, कोड़ाई, खाद के अलावा दवाई छिड़काव में हजारों रुपए खर्च हो गए। जैसे ही उनकी फसल आई तो दो-तीन बार सब्जी मंडी ले जाकर 40 किलो बेचा था। अब लॉकडाउन के कारण इनकी सब्जी बाड़ी में ही सड़ रही है। बालमुकुंद साहू बताते हैं कि अभी नहीं तोड़ाई कर रहे हैं। इससे फसल पूरी तरह से बर्बाद हो रही है।

रावड़ की तीन किसानों ने बोया भिंडी-बैंगन, जो सड़ रही
रावड़ के किसान भूषण, हुलास और मंगलू ने डेढ़ से दो एकड़ में बैंगन और भिंडी बोया हैं। इन किसानों ने बताया कि 2 क्विंटल तक सब्जी मार्केट में बेचने के लिए ले जा रहे थे। अब इनकी भी सब्जियां बाड़ी में ही पड़ी हैं। इन्हें चिंता है कि साहूकारों से पैसे उठाकर सब्जी बाड़ी लगाए थे। अब उनका ऋण कैसे चुकता करेंगे, इसकी चिंता सता रही है।

लॉकडाउन में सरकार को बीच का रास्ता निकालना था
चौबेबांधा के बालाराम साहू, देवनारायण निषाद, अजय सोनकर और सुखू सतनामी ने बताया कि शासन प्रशासन ने कोरोना वायरस के संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए लॉकडाउन किया है। हम भी चाहते हैं कि बीमार से शीघ्र मुक्ति मिले। गरीब किसान बड़ी मुश्किल से इन सब्जियों का उत्पादन किए हैं लेकिन हम गरीब किसानों के लिए प्रशासन की ओर से ऐसा कोई रास्ता निकालना था कि लॉकडाउन का पालन भी हो और हमारा नुकसान भी ना हो। अब इनकी भरपाई कौन करेगा। चूंकि यह कच्ची सब्जियां हैं, एक-दो दिन में ही सड़ जाती हैं। इन्हें ताजी ही बेचनी पड़ती है इसलिए 2 से 3 दिनों में सब्जियों की तोड़ाई करनी पड़ती है तब कहीं जाकर इसकी कीमत मिलती है।

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