समस्या / सप्ताहभर से राजिम मंडी बंद, किसानों को नहीं मिल रहे दाम, सब्जी बेचने भटकना पड़ रहा

नगर के एक किसान की बाड़ी में लगी भिंडी की फसल पड़े-पड़े खराब हो रही है। नगर के एक किसान की बाड़ी में लगी भिंडी की फसल पड़े-पड़े खराब हो रही है।
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नगर के एक किसान की बाड़ी में लगी भिंडी की फसल पड़े-पड़े खराब हो रही है।नगर के एक किसान की बाड़ी में लगी भिंडी की फसल पड़े-पड़े खराब हो रही है।

  • गर्मी में सब्जियों की बाड़ी लगाने वाले किसान परेशान, सड़ने लगी हैं सब्जियां

दैनिक भास्कर

May 24, 2020, 05:00 AM IST

राजिम. अंचल में सब्जी उत्पादक किसान अपनी-अपनी बाड़ी और खेतों में ग्रीष्मकालीन फसल के रूप में भिंडी, टमाटर, बैंगन, लौकी, बरबट्टी, मिर्च, चेंज भांजी आदि फसल लगाए हैं। इस समय तेज गर्मी पड़ती है। नतीजतन किसानों को अपनी फसलों की सेवा खूब करनी होती है। 
इसके कारण कीटनाशक का छिड़काव में मोटी रकम चली जाती है। तब कहीं जाकर कुछ मात्रा में सब्जी हाथ में आती है लेकिन सब्जियों की सही मात्रा में कीमत नहीं मिलने से किसान मायूस हो गए हैं। राजिम सब्जी मंडी में आसपास के लगभग सैकड़ों गांव के लोग सब्जी खरीदकर ले जाते हैं और हाट, बाजार आदि जगहों पर पसरा लगाकर बेचते हैं, जिससे जो आमदनी होती है, उससे लोग अपने परिवार का जीविकोपार्जन करते हैं। वहीं किसानों को मंडी में अपनी सब्जी बेचनी पड़ती है लेकिन 16 मई से अर्थात एक सप्ताह से सब्जी मंडी बंद है। इसके कारण किसानों को सब्जी बेचने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। वहीं कुछ दिन पहले एक कोरोना पॉजिटिव के मिलने से नगर कंटेनमेंट जोन में आ गया है, जिससे न सिर्फ सब्जी मंडी बल्कि मेडिकल, दूध एवं जरूरी सेवाओं को छोड़कर सब कुछ बंद कर दिया गया है और 6 दिनों से पूर्ण लॉकडाउन है। इससे सब्जी उत्पादक किसान अपने सब्जियों को आखिरकार बेचे तो किधर जाकर, क्योंकि यह कच्चा धंधा है एक दिन के बाद दूसरे दिन में ही सब्जी खराब हो जाती है या तो फिर सब्जी सड़ जाती है। ऐसे में किसानों को ही नुकसान उठाना पड़ रहा है। 
3 दिन में कीटनाशक के छिड़काव से हालत खराब
सब्जी उत्पादक किसान संतोष कुमार सोनकर ने बताया कि बाड़ी में भिंडी लगाए हैं। प्रत्येक 3 दिनों में बाड़ी में दवाई का छिड़काव करना पड़ता है। महंगी दवाई से उनकी हालत खस्ता हो गई है। यदि कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव नहीं करेंगे तो फसलों को कीट पतंगा चट कर जाएगा। सब्जी मंडी बाजार बंद होने से जो उत्पादन हो रहा है, उसे खपाने की चिंता बढ़ गई है। पिछले साल इस समय ग्रीष्मकालीन सब्जियों की कीमत भी खूब थी। इस बार लोग घर से बाहर ही नहीं निकल रहे हैं तो सामानों की कीमत कहां से बढ़ेगी। 
कई ने तो पूरी बाड़ी उजाड़ दी या पशुओं को चरा दी
नगर के एक किसान ने अपने सब्जी का सही मूल्य नहीं मिलने से फसलों को ही काट कर बाड़ी साफ कर दी। एक किसान ने बताया कि कीमत नहीं मिल रही है और ऊपर से बेचने के लिए भी ना मंडी खुल रही है न ही हम उसे कहीं बेंच पा रहे हैं। इसलिए बाड़ी ही साफ कर दी है। कई ऐसे किसान हैं जो मजबूरी में जैसी कीमत मिल रही है उसी पर बेचकर संतोष कर रहे हैं। 
सरकार को समस्या का हल निकालना चाहिए 
महेंद्र पटेल, भीखम सोनकर, अनूप कुमार आदि का कहना है कि कोरोना भगाने के लिए जारी गाइडलाइन का पालन करना भी जरूरी है तथा सब्जियों को बेचने के लिए उपयुक्त जगह की भी आवश्यकता है। शासन को सामंजस्य बिठाते हुए हल निकालना चाहिए ताकि किसानों की सब्जी भी बिक जाए और उन्हें अच्छी कीमत मिले। 

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