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पर्युषण पर्व की धूम:तीसरा धर्म आर्जव, इसका मतलब सीधापन

नवापारा-राजिम6 दिन पहले
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नवापारा. जैन मंदिर में पूजा-अर्चना करते समाज के लोग। - Dainik Bhaskar
नवापारा. जैन मंदिर में पूजा-अर्चना करते समाज के लोग।

नगर के जैन मंदिर में पर्युषण पर्व मनाया जा रहा है। तीसरे दिन रविवार काे समाज के लोगों ने अभिषेक किया। धर्मसभा में ब्रह्मचारी अनिमेष ने कहा कि धर्म की व्याख्या आचार्यों ने बहुत ही अनूठी की है। आर्जव धर्म तीसरा धर्म है। ऋजोभावो आर्जव:। जब धर्म आभ्यन्तर में उतरता है, तब आर्जवता का पालन होता है। मनुष्य की चाल सर्प के समान टेढ़ी चाल है। ऊपर से धर्मात्मा, पर अंतरंग से घुड़ियां, ग्रन्थियां निकालना मुश्किल है। जिस प्रकार बर्तन की सफाई ऊपर (बाहर) के साथ-साथ अंदर की भी होती है। इसी प्रकार अंदर की सफाई आर्जव धर्म द्वारा होती है।

उन्होंने कहा सत्ता के बल पर अथवा डर द्वारा शारीरिक, वाचनिक तथा मानसिक चेष्टा बदल सकती है पर अंदर जो वक्रता है, वह दूर नहीं हो सकती है। आप अपने मन को टटोलों दूसरों को आर्जव के बारे में पूछने की आवश्यकता नहीं है। कुटिलता स्वपर अकल्याण-कारिणी है। कुटिलता का नाम कुशील व चोरी भी है। हमारे विचारों में अंतर नहीं है पर आचारों में आ सकता है। जो पर है उसको अपना कहना, यही महान वक्रता है, इसी को निकालने के लिए बार-बार धर्म आराधना की जरूरत है। धर्म बिल्कुल सरल व सीधा है।

अपने आपको भूल कर दूसरों की ओर झुकना ही आत्मा की वक्रता है। झुकने का मतलब देखना नहीं, पकड़ना है। यही हमारी टेढ़ी चाल है, यही आत्मघात है, अधोपतन टेढ़ी चाल के द्वारा ही होता है। आर्जव का मतलब सीधापन, सरलपन है। जिसका जीवन वक्रता में है वह सरलता को भी गरलता में ही ग्रहण करेगा। अच्छाई को बुराई के रूप में जो अंगीकार करता है वही वक्रता को धारण करता है। इसको हटाकर अपने जीवन को आजवमय बनाओ। आचरण में सम्यक्त्व का प्रभाव लाओ। आज की शांतिधारा के पुण्यार्जक स्वर्ण कलश-अभय, नितुल, अतुल जैन रजत कलश- मनोज, अनिल, जय जैन, रजत कलश- राकेश सत्यम सुविधि जैन, दीप प्रज्वलन- किशोर अमित सिंघई थे। जिनसहस्त्रनाम का वाचन स्वाध्यायी मनोज सुनंदा जैन ने किया।

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